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मुंबई : चुनाव में कथित गड़बड़ी और मतदाता सूची को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों पर अभिनेत्री शबाना आज़मी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लोकतंत्र, मतदान के अधिकार और लोगों की आवाज़ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जनता की ताकत को अब रोका नहीं जा सकता। मुंबई में भी शुक्रवार को चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हुआ, जिसमें शबाना आज़मी शामिल हुईं। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। चुनाव आयोग और सरकार ने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों से इनकार किया है।
शबाना आज़मी ने कहा कि यह मुद्दा किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिकों की आवाज़ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि देश में लोगों को बचपन से ही मतदान करने, अपने अधिकारों के लिए खड़े होने और जरूरत पड़ने पर अपनी आवाज़ उठाने की सीख दी जाती है। ऐसे में यदि किसी नागरिक को लगता है कि उसके मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना उसकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया है।
शबाना आज़मी ने कहा, “यह हमारे लोकतंत्र का सवाल है। यह हमारे अधिकारों का सवाल है। यह हमारी आवाज़ का सवाल है।” उन्होंने आगे कहा कि लोगों को हमेशा अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने और अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाने के लिए कहा गया है। उनका कहना था कि यदि लोगों को लगता है कि उनके अधिकार छीने जा रहे हैं या उनमें हेरफेर हो रहा है तो उनके सामने विरोध दर्ज कराने का रास्ता रहता है।
अभिनेत्री ने विरोध-प्रदर्शनों में लोगों की भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि अब जनता की ताकत को रोकना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा, “एक बार जब चिंगारी जल उठती है, तो आप देख सकते हैं कि वह कैसे फैलती है; पूरे भारत में ऐसा ही हो रहा है।” उनके इस बयान को देश में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर जारी बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है।
इससे पहले शबाना आज़मी ने लोगों से मुंबई में मतदाता सूची और मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने की अपील भी की थी। उन्होंने अपने संदेश में मतदान को नागरिक का अधिकार और उसकी आवाज़ बताया था। मुंबई के शिवाजी पार्क में शुक्रवार को हुए प्रदर्शन में वह स्वयं भी पहुंचीं और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर अपनी बात रखी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के केंद्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़ी आपत्तियां हैं। प्रदर्शन आयोजित करने वाले समूहों ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों को चुनाव आयोग और सरकार ने स्वीकार नहीं किया है। इसलिए मतदाता सूची में जानबूझकर गड़बड़ी किए जाने के दावे आरोपों के रूप में ही सामने आए हैं, न कि स्थापित निष्कर्ष के रूप में।
मुंबई से पहले दिल्ली में भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन हुआ था। दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में प्रदर्शन की कोशिश के दौरान कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी और आसपास के क्षेत्रों में आवाजाही को लेकर प्रतिबंध लगाए गए थे।
शबाना आज़मी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को सवाल पूछने और अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने मतदान के अधिकार को सीधे नागरिक की आवाज़ से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए लोगों की भागीदारी जरूरी है। उनके मुताबिक यदि नागरिकों को चुनावी प्रक्रिया को लेकर कोई चिंता है तो वे संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सामने रख सकते हैं।
इस पूरे विवाद में एक तरफ प्रदर्शनकारी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग और सरकार ने गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और नागरिकों के मतदान अधिकार को लेकर बहस तेज बनी हुई है। शबाना आज़मी के बयान ने इसी बहस में एक और आवाज़ जोड़ दी है, जिसमें उन्होंने लोकतंत्र और अधिकारों की रक्षा के लिए नागरिकों की भागीदारी पर जोर दिया है।
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