महाराष्ट्र

कैडिला केस में FDA को झटका हाई कोर्ट ने लगाई फटकार

Ratna Netam
11 Aug 2026 7:09 PM IST
कैडिला केस में FDA को झटका हाई कोर्ट ने लगाई फटकार
x
महाराष्ट्र : बॉम्बे हाई कोर्ट ने दवा कंपनी कैडिला फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के खिलाफ महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने बिक्री रोकने और दवाओं का स्टॉक जब्त करने जैसे कदमों को लेकर नियामक एजेंसी के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि कानून में पहले कार्रवाई करना और बाद में सवाल पूछना स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद महाराष्ट्र FDA ने कैडिला के खिलाफ जारी मौजूदा स्टॉप-सेल आदेश वापस लेने पर सहमति जताई है। एजेंसी ने अदालत को भरोसा दिलाया कि भविष्य में किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई से पहले उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आर.वी. घुगे और जस्टिस गौतम अंखाद की पीठ कैडिला फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कंपनी ने महाराष्ट्र FDA के उन निर्देशों को चुनौती दी थी, जिनके तहत उसकी कुछ दवाओं की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने के साथ करीब 2.45 करोड़ रुपये का स्टॉक जब्त किया गया था। कंपनी की ओर से अदालत में कहा गया कि FDA ने कार्रवाई करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया।
मामला कैडिला की कुछ दवाओं के नाम और ब्रांडिंग में कथित समानता से जुड़ा है। FDA ने एसीलोक 150, एसीलोक 150 प्लस, एसीलोक 300 और एसीलोक 300 प्लस जैसी दवाओं को लेकर कार्रवाई की थी। नियामक एजेंसी का तर्क था कि इन दवाओं की ब्रांडिंग में समानता के कारण मरीजों और ग्राहकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी आधार पर राज्यभर में कुछ दवाओं की बिक्री और वितरण पर रोक लगाई गई थी तथा कंपनी के लगभग 2.45 करोड़ रुपये के स्टॉक को जब्त किया गया था।
हालांकि, अदालत ने FDA के इस कदम की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी कंपनी के खिलाफ कठोर नियामकीय कार्रवाई करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने FDA की जल्दबाजी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि "पहले गोली चलाना और बाद में सवाल पूछना" भले ही वाइल्ड वेस्ट का नियम रहा हो, लेकिन कानून के शासन में ऐसा तरीका नहीं अपनाया जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने FDA की कार्रवाई को लेकर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि एजेंसी के पास तलवार चलाने की ताकत है, लेकिन उसका इस्तेमाल मच्छर मारने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने नियामक शक्तियों के विवेकपूर्ण और उचित इस्तेमाल पर जोर दिया। पीठ ने यह भी संकेत दिया कि यदि इसी तरह कठोर और जल्दबाजी वाली कार्रवाई के मामले सामने आते रहे तो संबंधित एजेंसी पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
सरकारी वकील नेहा भिडे ने अदालत को बताया कि दवाओं के नाम और ब्रांडिंग में समानता के कारण उपभोक्ताओं के बीच भ्रम पैदा होने की आशंका थी। उन्होंने FDA की कार्रवाई को एहतियाती कदम बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य किसी कंपनी को नुकसान पहुंचाना नहीं था। हालांकि, अदालत ने कहा कि नियामक एजेंसी को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार करना चाहिए।
अदालत ने इस पूरे मामले में कंपनी के संभावित आर्थिक नुकसान से अधिक मरीजों और उपभोक्ताओं की परेशानी को महत्वपूर्ण बताया। पीठ ने कहा कि पिछले दो सप्ताह में कंपनी को कितना नुकसान हुआ, यह प्राथमिक चिंता नहीं है। चिंता इस बात की है कि यदि दवा की बिक्री रोक दी जाती है तो उन मरीजों पर क्या असर पड़ेगा जिन्हें संबंधित दवाओं की जरूरत है।
कैडिला की ओर से यह भी कहा गया कि बिक्री रोकने का आदेश जारी करने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया था। कंपनी ने अदालत से FDA के आदेशों में हस्तक्षेप की मांग की थी। सुनवाई के बाद FDA ने अपने मौजूदा स्टॉप-सेल आदेश वापस लेने पर सहमति जताई और आगे कोई कदम उठाने से पहले उचित प्रक्रिया अपनाने का भरोसा दिया।
बॉम्बे हाई कोर्ट की इस टिप्पणी से नियामक एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश गया है। अदालत ने साफ किया कि जनहित और दवाओं की सुरक्षा के नाम पर कार्रवाई करना जरूरी हो सकता है, लेकिन ऐसी कार्रवाई कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप ही होनी चाहिए। किसी कंपनी के खिलाफ कठोर कदम उठाने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देना भी जरूरी है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने FDA को अपनी शक्तियों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की नसीहत दी। अब महाराष्ट्र FDA द्वारा मौजूदा आदेश वापस लेने और आगे की कार्रवाई के लिए उचित प्रक्रिया अपनाने के बाद इस मामले में अगला कदम महत्वपूर्ण होगा। वहीं, अदालत की सख्त टिप्पणियों ने दवा नियमन और उपभोक्ता हितों के बीच संतुलन को लेकर एक अहम बहस भी खड़ी कर दी है।
Next Story