महाराष्ट्र

1,267 दिन बाद रोड सेफ्टी काउंसिल की बैठक

Kavita2
23 Sept 2026 10:22 AM IST
1,267 दिन बाद रोड सेफ्टी काउंसिल की बैठक
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मुंबई। महाराष्ट्र में सड़क सुरक्षा को लेकर लंबे अंतराल के बाद स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल की बैठक आयोजित की गई। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने मंगलवार को मंत्रालय में काउंसिल की 13वीं बैठक बुलाई। इससे पहले काउंसिल की बैठक 3 अप्रैल 2023 को हुई थी। यानी पिछली बैठक और मंगलवार की बैठक के बीच करीब 1,267 दिनों का अंतर रहा।

इस अवधि में महाराष्ट्र में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े चिंताजनक रहे। अप्रैल 2023 में हुई पिछली बैठक के बाद से राज्य में 1.17 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज होने और इनमें 50,488 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। बैठक में सड़क हादसों और उनसे होने वाली मौतों को कम करने के लिए अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया।

1,267 दिनों के बाद हुई 13वीं बैठक

स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल की पिछली बैठक 3 अप्रैल 2023 को आयोजित हुई थी। इसके बाद लंबे समय तक बैठक नहीं हो सकी। अब 1,267 दिनों के अंतराल के बाद काउंसिल की 13वीं बैठक मंत्रालय में हुई।

यह लंबा अंतराल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्धारित व्यवस्था के तहत रोड सेफ्टी काउंसिल की बैठक साल में कम से कम दो बार होनी चाहिए। ऐसे में तीन साल से ज्यादा समय तक बैठक नहीं होना सड़क सुरक्षा से जुड़ी नियमित समीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।

काउंसिल की बैठक में राज्य में सड़क हादसों की स्थिति, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों और अलग-अलग विभागों द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा की गई।

तीन साल में 1.17 लाख से ज्यादा सड़क हादसे

पिछली बैठक के बाद से महाराष्ट्र में 1.17 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन दुर्घटनाओं में 50,488 लोगों की जान चली गई। यह आंकड़ा सड़क सुरक्षा के सामने मौजूद चुनौती को दिखाता है।

सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए यातायात नियमों के पालन के साथ सड़कों की स्थिति, दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान, घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई जैसे कई स्तरों पर काम करने की जरूरत होती है।

बैठक में इसी वजह से अलग-अलग विभागों को मिलकर काम करने पर जोर दिया गया।

पुलिस PWD और स्वास्थ्य विभाग को निर्देश

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने बैठक के दौरान पुलिस, लोक निर्माण विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सड़क हादसों और मौतों को कम करने के प्रयासों में बेहतर तालमेल बनाने के निर्देश दिए।

सड़क दुर्घटनाओं को रोकना केवल परिवहन या यातायात विभाग की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है। पुलिस यातायात नियमों को लागू करने और दुर्घटनाओं की जांच में भूमिका निभाती है, जबकि लोक निर्माण विभाग सड़कों की स्थिति और दुर्घटना संभावित स्थानों को सुरक्षित बनाने से जुड़ा होता है।

वहीं हादसे के बाद घायल व्यक्ति की जान बचाने में स्वास्थ्य विभाग और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय को सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में कमी लाने के लिए अहम माना जाता है।

साल में कम से कम दो बार होनी चाहिए बैठक

स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल का गठन केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 215 के तहत किया जाता है। इसका उद्देश्य राज्य स्तर पर सड़क सुरक्षा से जुड़े अलग-अलग विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करना है।

तय व्यवस्था के मुताबिक काउंसिल की बैठक साल में कम से कम दो बार होनी चाहिए। इन बैठकों में राज्य के सड़क दुर्घटना संबंधी आंकड़ों और ट्रेंड्स की समीक्षा की जाती है।

इसके अलावा दुर्घटनाओं के पीछे सामने आने वाले प्रमुख कारणों पर चर्चा की जाती है और उन स्थानों की पहचान की जाती है, जहां बार-बार सड़क हादसे होते हैं।

ब्लैक स्पॉट की पहचान अहम

रोड सेफ्टी काउंसिल की प्रमुख जिम्मेदारियों में दुर्घटना संभावित स्थानों यानी ब्लैक स्पॉट की पहचान करना भी शामिल है। जिन सड़क हिस्सों पर बार-बार गंभीर दुर्घटनाएं होती हैं, वहां इंजीनियरिंग से जुड़ी कमियों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

ऐसे स्थानों पर जरूरत के अनुसार संकेतक, स्ट्रीट लाइट, स्पीड ब्रेकर, बैरिकेड, रोड मार्किंग या अन्य सुरक्षा इंतजाम किए जा सकते हैं। सड़क के डिजाइन में समस्या होने पर उसमें बदलाव की जरूरत भी पड़ सकती है।

काउंसिल इन सुधारों की प्रगति और सड़क सुरक्षा के लिए लागू किए गए उपायों की निगरानी करने का काम भी करती है।

हादसे के बाद इलाज में देरी भी चुनौती

सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती समय घायल व्यक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाने और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने से उसकी जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है।

इसी वजह से रोड सेफ्टी व्यवस्था में एम्बुलेंस नेटवर्क, ट्रॉमा केयर सेंटर और अस्पतालों के बीच बेहतर तालमेल को महत्वपूर्ण माना जाता है।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग की भागीदारी इसी व्यापक सड़क सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। दुर्घटना के बाद प्रतिक्रिया समय कम करना भी सड़क हादसों से होने वाली मौतों में कमी लाने की रणनीति का महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है।

विभागों के बीच तालमेल पर जोर

सड़क हादसों के कारण कई तरह के हो सकते हैं। तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना, हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, सड़क की खराब स्थिति और अपर्याप्त संकेतक जैसे कारण दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं।

इनमें से अलग-अलग समस्याओं का समाधान अलग-अलग विभागों से जुड़ा होता है। इसी कारण परिवहन मंत्री ने संबंधित एजेंसियों को अपने प्रयासों में समन्वय स्थापित करने को कहा है।

नियमित समीक्षा की जरूरत

करीब साढ़े तीन साल बाद आयोजित हुई स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल की बैठक ने नियमित समीक्षा की जरूरत को भी सामने रखा है। निर्धारित नियम के अनुसार साल में कम से कम दो बैठकें होने से सड़क हादसों के आंकड़ों, ब्लैक स्पॉट और विभागीय कार्रवाई की लगातार समीक्षा की जा सकती है।

पिछली बैठक के बाद राज्य में 1.17 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं और 50,488 मौतें दर्ज होने के आंकड़े सड़क सुरक्षा उपायों के महत्व को रेखांकित करते हैं। अब काउंसिल की बैठक के बाद नजर इस बात पर रहेगी कि पुलिस, परिवहन, लोक निर्माण और स्वास्थ्य विभाग आपसी समन्वय के साथ सड़क हादसों तथा उनमें होने वाली मौतों को कम करने के लिए किस तरह के कदम उठाते हैं।

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