महाराष्ट्र

मुंबई-नासिक हाईवे पर कसारा घाट में रिटेनिंग वॉल गिरी

Kavita2
12 July 2026 5:14 PM IST
मुंबई-नासिक हाईवे पर कसारा घाट में रिटेनिंग वॉल गिरी
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मुंबई : पिछले सप्ताह हुई भारी बारिश ने मुंबई-नासिक हाईवे के पुराने कसारा घाट सेक्शन में बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है। लगातार बारिश के कारण जवाहर फाटा इलाके के पास एक रिटेनिंग वॉल गिर गई, जिससे सड़क को काफी नुकसान पहुंचा है। हादसे के बाद सड़क किनारे बड़े-बड़े पत्थरों का मलबा जमा हो गया है और कई जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं।

रिटेनिंग वॉल गिरने के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी पूरी तरह बह गई, जिससे हाईवे का एक हिस्सा कमजोर होकर हवा में लटक गया है। इस स्थिति ने वाहन चालकों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों को डर है कि अगर दोबारा भारी बारिश हुई तो सड़क का यह हिस्सा पूरी तरह टूट सकता है और बड़ा हादसा हो सकता है।

जानकारी के अनुसार, यह घटना पुराने कसारा घाट सेक्शन में जवाहर फाटा के पास हुई। यह मार्ग मुंबई और नासिक को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण रास्ता है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। सड़क के क्षतिग्रस्त होने के बाद यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को काफी सावधानी बरतनी पड़ रही है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले दिनों हुई तेज बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्र में पानी का बहाव बढ़ गया था। लगातार पानी के दबाव के कारण सड़क के किनारे बनी सुरक्षा दीवार कमजोर हो गई और आखिरकार ढह गई। दीवार गिरने के बाद सड़क के नीचे की जमीन कट गई, जिससे सड़क की मजबूती प्रभावित हुई है।

हालांकि, राहत की बात यह रही कि पिछले दो दिनों में बारिश की तीव्रता कम हो गई, जिससे किसी बड़े हादसे को टाला जा सका। अगर लगातार तेज बारिश जारी रहती तो सड़क का कमजोर हिस्सा पूरी तरह धंस सकता था, जिससे यातायात बाधित होने के साथ-साथ जान-माल का खतरा भी बढ़ सकता था।

स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों का कहना है कि सड़क की मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन को तुरंत कदम उठाने चाहिए। उनका कहना है कि केवल अस्थायी मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सड़क की मजबूती के लिए स्थायी उपाय किए जाने जरूरी हैं।

वाहन चालकों के अनुसार, रात के समय इस मार्ग से गुजरना और भी जोखिम भरा हो गया है। सड़क किनारे हुए नुकसान और गड्ढों के कारण दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। लोगों ने मांग की है कि क्षतिग्रस्त हिस्से पर सुरक्षा बैरिकेड लगाए जाएं और पर्याप्त चेतावनी संकेत लगाए जाएं।

बारिश के मौसम में पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। कसारा घाट क्षेत्र भी भौगोलिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। यहां भारी बारिश के दौरान मिट्टी खिसकने और सड़क किनारे की संरचनाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान जल निकासी व्यवस्था और सुरक्षा दीवारों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। लंबे समय तक बारिश का पानी जमा रहने से पहाड़ी इलाकों में सड़क की नींव कमजोर हो सकती है।

प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और क्षतिग्रस्त हिस्से की जांच की जा रही है। सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए मरम्मत कार्य और आवश्यक कदम उठाने की तैयारी की जा रही है।

मुंबई-नासिक हाईवे महाराष्ट्र के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ यातायात व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन जाती हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द से जल्द इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा, ताकि आने वाले दिनों में किसी बड़े हादसे की आशंका को खत्म किया जा सके।

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