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मुंबई। शहर में पानी की उपलब्धता को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाली सात प्रमुख झीलों में कुल जल भंडार बढ़कर 96.61 प्रतिशत हो गया है। हाइड्रोलिक इंजीनियर विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 13 सितंबर को सुबह 6 बजे तक इन झीलों में कुल 13 लाख 98 हजार 318 मिलियन लीटर उपयोगी पानी उपलब्ध था। सातों झीलों की कुल लाइव स्टोरेज क्षमता 14 लाख 47 हजार 363 मिलियन लीटर है। इस तरह झीलों में उनकी कुल क्षमता के मुकाबले 96.61 प्रतिशत पानी जमा हो चुका है।
विभाग की रिपोर्ट में सातों झीलों के जलस्तर और उपयोगी पानी की स्थिति की जानकारी दी गई है। इनमें विहार झील पूरी तरह भर चुकी है। झील में उसकी उपयोगी क्षमता का 100 प्रतिशत पानी दर्ज किया गया है। शहर की जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़ी अन्य झीलों में भी पानी का भंडार काफी बेहतर स्थिति में बना हुआ है।
तान्सा झील अपनी उपयोगी क्षमता के 98.85 प्रतिशत तक भर चुकी है। यह आंकड़ा बताता है कि तान्सा में अब बहुत कम क्षमता खाली है। भात्सा झील में भी जल भंडार 97.82 प्रतिशत दर्ज किया गया है। मुंबई की जलापूर्ति में इन झीलों की महत्वपूर्ण भूमिका है और इनमें पानी का उच्च स्तर शहर के लिए राहत का संकेत है।
तुलसी झील में कुल उपयोगी क्षमता का 96.89 प्रतिशत पानी मौजूद है। वहीं मिडिल वैतरणा झील का जल भंडार 96.42 प्रतिशत दर्ज किया गया है। दोनों झीलों में पानी का स्तर 96 प्रतिशत से अधिक है। इससे साफ है कि सातों झीलों में जल संग्रह की स्थिति मजबूत बनी हुई है।
अपर वैतरणा झील में पानी का भंडार 92.78 प्रतिशत दर्ज किया गया। सातों झीलों की तुलना में इसका प्रतिशत कुछ कम है, लेकिन झील में उपलब्ध पानी का स्तर फिर भी 90 प्रतिशत से काफी अधिक है। मोदक सागर झील में उसकी उपयोगी क्षमता का 93.66 प्रतिशत पानी जमा है। इस प्रकार किसी भी झील का जल भंडार 92 प्रतिशत से नीचे नहीं है।
हाइड्रोलिक इंजीनियर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सातों झीलों की संयुक्त कुल लाइव स्टोरेज क्षमता 14 लाख 47 हजार 363 मिलियन लीटर है। इसके मुकाबले 13 लाख 98 हजार 318 मिलियन लीटर उपयोगी पानी उपलब्ध है। कुल क्षमता और उपलब्ध जल भंडार के बीच अब करीब 49 हजार 45 मिलियन लीटर का अंतर बचा है। आंकड़ों के आधार पर यह स्पष्ट है कि झीलों का अधिकांश भंडारण क्षेत्र पानी से भर चुका है।
झीलों की अलग-अलग स्थिति देखें तो विहार झील 100 प्रतिशत भरकर सबसे आगे है। इसके बाद तान्सा झील में 98.85 प्रतिशत और भात्सा में 97.82 प्रतिशत जल भंडार दर्ज किया गया है। तुलसी झील 96.89 प्रतिशत और मिडिल वैतरणा 96.42 प्रतिशत तक भरी हुई है। मोदक सागर में 93.66 प्रतिशत तथा अपर वैतरणा में 92.78 प्रतिशत पानी उपलब्ध है।
मुंबई जैसे बड़े महानगर में नियमित जलापूर्ति के लिए झीलों में उपलब्ध पानी की मात्रा बेहद महत्वपूर्ण होती है। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था इन्हीं प्रमुख जलस्रोतों पर आधारित है। इसलिए सातों झीलों का कुल जल भंडार 96 प्रतिशत से ऊपर पहुंचना जल उपलब्धता के लिहाज से राहत देने वाला आंकड़ा है।
ताजा रिपोर्ट में सभी झीलों की स्थिति संतोषजनक दिखाई दे रही है। खास बात यह है कि विहार झील अपनी पूरी क्षमता तक भर चुकी है और तान्सा भी 99 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। भात्सा, तुलसी और मिडिल वैतरणा में भी 96 प्रतिशत से अधिक पानी दर्ज किया गया है। मोदक सागर तथा अपर वैतरणा में उपलब्ध पानी का प्रतिशत अन्य झीलों की तुलना में थोड़ा कम है, लेकिन यहां भी भंडार 90 प्रतिशत से अधिक बना हुआ है।
विभाग की ओर से झीलों में उपलब्ध उपयोगी पानी की नियमित निगरानी की जाती है। सुबह 6 बजे तक दर्ज आंकड़ों के आधार पर संयुक्त जल भंडार 96.61 प्रतिशत रहा। यह आंकड़ा सातों झीलों में मौजूद उस पानी को दर्शाता है, जिसका उपयोग शहर की जलापूर्ति के लिए किया जा सकता है।
ताजा स्थिति के अनुसार मुंबई की जलापूर्ति करने वाली सभी सात झीलें अपनी क्षमता के बड़े हिस्से तक भर चुकी हैं। विहार झील का पूरी तरह भरना और दूसरी प्रमुख झीलों में भी 92 से 99 प्रतिशत के बीच पानी उपलब्ध होना शहरवासियों के लिए राहत की खबर है। आने वाले समय में जलापूर्ति की स्थिति झीलों के जलस्तर, उपलब्ध उपयोगी पानी और विभाग की वितरण व्यवस्था पर निर्भर करेगी। फिलहाल 13 सितंबर की रिपोर्ट मुंबई के जल भंडार की मजबूत स्थिति को सामने रखती है।





