महाराष्ट्र

गुजरात से मुंबई गुटखा पहुंचाने में मदद का आरोप, दो GRP कॉन्स्टेबल निलंबित

Kavita2
13 Sept 2026 11:34 AM IST
गुजरात से मुंबई गुटखा पहुंचाने में मदद का आरोप, दो GRP कॉन्स्टेबल निलंबित
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मुंबई : प्रतिबंधित गुटखे की कथित तस्करी में मदद करने के आरोप में मुंबई रेलवे पुलिस ने दो सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) कॉन्स्टेबलों को निलंबित कर दिया है। रेलवे पुलिस कमिश्नर राकेश कलासागर ने विभागीय जांच में दोनों कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका सामने आने के बाद निलंबन का आदेश जारी किया। आरोप है कि गुजरात से ट्रेनों के माध्यम से मुंबई भेजे जाने वाले गुटखे की खेप को सुरक्षित पहुंचाने में दोनों कर्मचारी सहयोग करते थे।

निलंबित कर्मचारियों की पहचान बोरीवली जीआरपी थाने में तैनात अनिल गुजर और वसई जीआरपी थाने में तैनात तुषार ठाकुर के रूप में हुई है। दोनों को 7 सितंबर को निलंबित किया गया था। वरिष्ठ जीआरपी अधिकारी ने विभागीय कार्रवाई की पुष्टि की है। हालांकि दोनों कर्मचारियों पर लगे आरोपों की आगे जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

मामले का खुलासा एक नागरिक द्वारा वरिष्ठ जीआरपी अधिकारियों को दी गई शिकायत के बाद हुआ। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दोनों कॉन्स्टेबल गुटखा सप्लायरों के संपर्क में थे और गुजरात से मुंबई तक प्रतिबंधित सामग्री की खेप पहुंचाने में मदद कर रहे थे। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विभागीय स्तर पर जांच शुरू की गई।

विभागीय जांच के बाद निलंबन

प्रारंभिक विभागीय जांच में दोनों कॉन्स्टेबलों की कथित भूमिका पाए जाने के बाद रेलवे पुलिस कमिश्नर राकेश कलासागर ने उन्हें निलंबित करने का आदेश दिया। निलंबन को जांच के दौरान उठाया गया प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना और संबंधित कर्मचारियों को उनकी मौजूदा जिम्मेदारियों से अलग रखना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अनिल गुजर बोरीवली जीआरपी और तुषार ठाकुर वसई जीआरपी में तैनात थे। दोनों स्टेशन गुजरात की दिशा से मुंबई आने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनों के मार्ग से जुड़े हैं। आरोप है कि गुटखा सप्लायर इस रेल मार्ग का इस्तेमाल खेपों को मुंबई पहुंचाने के लिए करते थे। टाइम्स ऑफ इंडिया

जांच में अब यह पता लगाया जा रहा है कि दोनों कर्मचारियों की कथित भूमिका कितने समय से थी और उन्होंने किन लोगों के साथ संपर्क बनाया हुआ था। सप्लायरों, ठेकेदारों और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

ट्रेन के एसी कोच में छिपाई जाती थी खेप

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रतिबंधित गुटखे के पैकेट काले रंग के बैगों में भरकर ट्रेनों में रखे जाते थे। एक कथित वीडियो में गुटखे से भरे बैग वातानुकूलित कोच के बेडरोल रखने वाले हिस्से में दिखाई दिए। इस जगह का उपयोग सामान्य रूप से यात्रियों को दिए जाने वाले बिस्तर और दूसरे सामान के भंडारण के लिए किया जाता है।

आरोप है कि ठेके से जुड़े कुछ कर्मचारी इन बैगों को ट्रेन के भीतर सुरक्षित स्थान पर रखने में मदद करते थे। इसके बदले सप्लायरों द्वारा उन्हें रकम दिए जाने की बात भी सामने आई है। कुछ अन्य सुरक्षा एजेंसियों के कर्मचारियों की संभावित भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं, लेकिन उनकी संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

गुटखे की खेप गुजरात से आने वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में रखी जाती थी। कथित रूप से इसे वसई या बोरीवली रेलवे स्टेशन पर लोड किया जाता और गंतव्य पर पहुंचने के बाद टैक्सी या दूसरे वाहनों के माध्यम से आगे भेजा जाता था।

कई लंबी दूरी की ट्रेनों के इस्तेमाल का आरोप

जांच से जुड़े सूत्रों ने आशंका जताई है कि इस नेटवर्क में कई लंबी दूरी की ट्रेनों का इस्तेमाल किया गया। इनमें सूर्यनगरी एक्सप्रेस, गोल्डन टेंपल मेल, गरीब रथ एक्सप्रेस, अवध एक्सप्रेस, भावनगर एक्सप्रेस और हरिद्वार एक्सप्रेस के नाम शामिल बताए गए हैं।

इन ट्रेनों से कथित रूप से आने वाली खेपों को बांद्रा टर्मिनस और अन्य स्थानों तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद बैगों को ट्रेन से उतारकर सड़क मार्ग से अलग-अलग ठिकानों तक भेजा जाता था। हालांकि किस ट्रेन से कितनी खेप लाई गई और यह सिलसिला कितने समय से चल रहा था, इसका पूरा विवरण सामने आना बाकी है।

जांच में संबंधित स्टेशनों और ट्रेनों के सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रिकॉर्ड और संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्कों का परीक्षण महत्वपूर्ण हो सकता है। मोबाइल कॉल विवरण और वित्तीय लेनदेन से भी कथित नेटवर्क की कड़ियों का पता लगाया जा सकता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

रेलवे परिसर और ट्रेनों के भीतर प्रतिबंधित सामग्री पहुंचने के आरोपों ने निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यात्रियों और उनके सामान की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों पर ही तस्करों की मदद करने का आरोप लगना विभाग के लिए चिंता का विषय है।

ट्रेनों में मौजूद भंडारण स्थानों का उपयोग प्रतिबंधित सामान छिपाने के लिए किया गया तो इसमें कोच के भीतर काम करने वाले अन्य लोगों की भूमिका की जांच भी आवश्यक होगी। यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि खेप को स्टेशन तक कौन लाता था, ट्रेन में कौन रखता था और मुंबई पहुंचने के बाद उसे कौन प्राप्त करता था।

रेलवे पुलिस के सामने अब केवल दोनों कॉन्स्टेबलों की भूमिका की जांच ही नहीं, बल्कि इस कथित तस्करी नेटवर्क की पूरी शृंखला का पता लगाने की चुनौती है। सप्लायर से लेकर परिवहन और वितरण तक जुड़े लोगों की पहचान होने पर मामले का दायरा बढ़ सकता है।

आरोप सिद्ध होना अभी बाकी

कॉन्स्टेबल अनिल गुजर और तुषार ठाकुर को निलंबित किया जाना विभागीय कार्रवाई है। इसे आरोपों की अंतिम पुष्टि या दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। दोनों कर्मचारियों के विरुद्ध आरोपों की जांच पूरी होने और उनका पक्ष सुने जाने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

रेलवे पुलिस कमिश्नर के आदेश से यह संकेत मिला है कि कर्मचारियों की मिलीभगत से जुड़े आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है। यदि जांच में अन्य कर्मचारियों या ठेकेदारों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी विभागीय अथवा कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

इस मामले में नागरिक की शिकायत से शुरू हुई जांच अब कथित अंतरराज्यीय गुटखा परिवहन नेटवर्क तक पहुंच गई है। आगे की जांच से स्पष्ट होगा कि गुजरात से मुंबई तक खेप पहुंचाने का पूरा तरीका क्या था और इसमें कितने लोग शामिल थे।

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