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नासिक। वरिष्ठ विचारक और पद्म श्री सम्मानित रमेश पतंगे ने कहा कि भारतीय संविधान देश के हर नागरिक को आर्थिक स्वतंत्रता, सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार और अपनी पसंद का पेशा, व्यापार या कारोबार चुनने की आजादी देता है। उन्होंने कहा कि संविधान में दिए गए ये अधिकार देश में उद्यमिता को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
रमेश पतंगे नासिक इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (NIMA) द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम का विषय "संविधान और औद्योगिक निवेश" था, जिसमें उन्होंने उद्योग, निवेश और संवैधानिक अधिकारों के बीच संबंध पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम में NIMA के अध्यक्ष आशीष नाहर, अंबड़ इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIMA) के अध्यक्ष राजेंद्र पंसारे, भारतीय जनता पार्टी के राज्य प्रवक्ता लक्ष्मण सावजी, NIMA के उपाध्यक्ष के.एल. राठी सहित कई उद्योगपति, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
अपने संबोधन में पतंगे ने कहा कि भारतीय संविधान केवल राजनीतिक अधिकारों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह नागरिकों को आर्थिक अवसरों और आत्मनिर्भर बनने का आधार भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत प्रत्येक नागरिक को अपनी क्षमता और रुचि के अनुसार रोजगार, व्यवसाय या उद्योग शुरू करने का अधिकार प्राप्त है।
उन्होंने कहा कि किसी भी देश की आर्थिक प्रगति में उद्यमियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब नागरिकों को स्वतंत्र रूप से व्यवसाय करने और नए विचारों को लागू करने का अवसर मिलता है, तो इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
रमेश पतंगे ने कहा कि संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों ने देश में एक ऐसा वातावरण तैयार किया, जिसमें छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े उद्योगपतियों तक को आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास केवल आर्थिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह समाज के विकास और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का माध्यम भी है।
उन्होंने उद्योग जगत से जुड़े लोगों से अपील की कि वे संविधान के मूल्यों को समझते हुए अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि उद्योगों को केवल मुनाफे तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र निर्माण में भी योगदान देना चाहिए।
कार्यक्रम में मौजूद उद्योग प्रतिनिधियों ने भी औद्योगिक क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि उद्योगों के विकास के लिए अनुकूल नीतियां, बेहतर बुनियादी ढांचा और निवेश के लिए सकारात्मक माहौल जरूरी है।
NIMA अध्यक्ष आशीष नाहर ने कहा कि उद्योग क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार है। उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों और स्वतंत्रताओं ने उद्यमियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया है। उन्होंने उद्योग जगत और सरकार के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
AIMA अध्यक्ष राजेंद्र पंसारे ने कहा कि छोटे और मध्यम उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को प्रोत्साहन देने वाली नीतियां रोजगार बढ़ाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करती हैं।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर भी चर्चा की कि बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में भारतीय उद्योगों को नई तकनीक, नवाचार और कौशल विकास पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि संविधान में दिए गए अधिकार उद्योगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं, लेकिन सफलता के लिए मेहनत, अनुशासन और जिम्मेदारी भी जरूरी है।
विशेष व्याख्यान में उद्योग और संविधान के बीच संबंधों को लेकर कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आर्थिक स्वतंत्रता और समान अवसर किसी भी मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान हैं।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और वक्ताओं का धन्यवाद किया। NIMA की ओर से कहा गया कि इस तरह के कार्यक्रम उद्योग जगत को संवैधानिक मूल्यों और आर्थिक विकास के संबंध को समझने में मदद करते हैं।
रमेश पतंगे के संबोधन में यह संदेश प्रमुख रहा कि संविधान केवल अधिकारों की बात नहीं करता, बल्कि नागरिकों को जिम्मेदारी के साथ आर्थिक और सामाजिक विकास में भागीदारी का अवसर भी देता है। उन्होंने कहा कि उद्यमिता और औद्योगिक विकास भारत को आत्मनिर्भर और मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।





