महाराष्ट्र

पुणे-नाशिक रेल प्रोजेक्ट की समीक्षा करेंगे डॉ. काकोडकर

Kavita2
7 Aug 2026 11:58 AM IST
पुणे-नाशिक रेल प्रोजेक्ट की समीक्षा करेंगे डॉ. काकोडकर
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मुंबई। महाराष्ट्र सरकार पुणे-अहिल्यानगर-नाशिक रेलवे रूट परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए सक्रिय हो गई है। इस महत्वाकांक्षी रेलवे परियोजना से जुड़े तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं की समीक्षा के लिए राज्य सरकार ने परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया है।

यह समिति मुख्य रूप से इस बात की जांच करेगी कि प्रस्तावित सेमी-हाई-स्पीड रेलवे लाइन का अलाइनमेंट (मार्ग निर्धारण) वैज्ञानिक संस्थानों और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त है या नहीं। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया को गति देने की उम्मीद है।

पुणे-अहिल्यानगर-नाशिक रेलवे रूट को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। इस परियोजना के पूरा होने से तीन प्रमुख शहरों के बीच यात्रा आसान होगी और उद्योग, व्यापार तथा पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

सरकार के सामने इस परियोजना को आगे बढ़ाने के दौरान कुछ तकनीकी चुनौतियां भी हैं। इनमें विशेष रूप से नारायणगांव के खोदाद गांव में स्थित जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (GMRT) से जुड़ा मुद्दा प्रमुख है। GMRT दुनिया के महत्वपूर्ण रेडियो खगोलीय अनुसंधान केंद्रों में से एक है और इसका वैज्ञानिक महत्व काफी अधिक है।

डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता वाली समिति यह भी देखेगी कि रेलवे लाइन का प्रस्तावित मार्ग GMRT की वैज्ञानिक गतिविधियों को प्रभावित तो नहीं करेगा। समिति परियोजना और वैज्ञानिक संस्थान के बीच संतुलन बनाने के लिए आवश्यक सुझाव देगी।

समिति में डॉ. काकोडकर के अलावा रेलवे बोर्ड के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रमुख विवेक गुप्ता और पुणे तथा नाशिक डिवीजन के डिवीजनल कमिश्नर को सदस्य बनाया गया है। इन विशेषज्ञों की मदद से परियोजना के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।

GMRT का संचालन नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स (NCRA) द्वारा किया जाता है। NCRA सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय परिसर में स्थित है और यह मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के तहत काम करता है।

GMRT की स्थापना 23 देशों के सहयोग से की गई थी और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक केंद्र है। यहां ब्रह्मांड, आकाशगंगाओं, तारों और अंतरिक्ष से जुड़े कई महत्वपूर्ण शोध किए जाते हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि रेडियो टेलीस्कोप के आसपास इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हस्तक्षेप को कम रखना जरूरी होता है, ताकि अंतरिक्ष से आने वाले कमजोर रेडियो संकेतों का अध्ययन किया जा सके। ऐसे में किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के दौरान वैज्ञानिक गतिविधियों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बन जाती है।

रेलवे परियोजना को लेकर सरकार का उद्देश्य विकास और वैज्ञानिक हितों के बीच संतुलन बनाना है। समिति इसी दिशा में काम करेगी और यह सुझाव देगी कि रेलवे लाइन का निर्माण किस तरह किया जाए, जिससे दोनों उद्देश्यों को पूरा किया जा सके।

पुणे-अहिल्यानगर-नाशिक रेलवे रूट को क्षेत्र के लिए गेम चेंजर परियोजना के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि कृषि, औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी नई गति मिल सकती है।

नाशिक क्षेत्र कृषि उत्पादन, विशेष रूप से फल और सब्जियों के लिए जाना जाता है। बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने से किसानों और व्यापारियों को अपने उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिल सकती है।

वहीं, पुणे एक प्रमुख आईटी, शिक्षा और औद्योगिक केंद्र है, जबकि नाशिक और अहिल्यानगर भी तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र हैं। इन शहरों के बीच तेज रेल संपर्क बनने से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

राज्य सरकार इस परियोजना को जल्द आगे बढ़ाने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वय कर रही है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद रेलवे लाइन के अलाइनमेंट और अन्य तकनीकी मुद्दों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

फिलहाल, डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता वाली समिति से उम्मीद की जा रही है कि वह वैज्ञानिक महत्व वाले GMRT और प्रस्तावित रेलवे परियोजना के बीच बेहतर तालमेल का रास्ता सुझाएगी। इससे विकास और शोध दोनों क्षेत्रों के हितों की रक्षा करते हुए परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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