महाराष्ट्र

साहिल वाकोडे मौत मामले में बढ़ा विरोध क्राइम ब्रांच जांच के बीच प्रदर्शन

Ratna Netam
23 Sept 2026 7:11 PM IST
साहिल वाकोडे मौत मामले में बढ़ा विरोध क्राइम ब्रांच जांच के बीच प्रदर्शन
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मुंबई। IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले को लेकर बुधवार को एक बार फिर विरोध प्रदर्शन हुआ। मुंबई यूथ कांग्रेस और वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) की युवा इकाई के सदस्यों ने संस्थान के पवई परिसर में प्रदर्शन करते हुए साहिल को न्याय देने और एफआईआर में नामजद प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने अपने माथे पर काली पट्टियां बांधकर विरोध जताया।प्रदर्शनकारी संगठनों ने आरोप लगाया कि मामले में अब तक पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने प्रोफेसर की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। हालांकि प्रोफेसर के खिलाफ आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और उनकी आपराधिक जिम्मेदारी पर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
साहिल वाकोडे IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में दूसरे वर्ष के बीटेक छात्र थे। 20 वर्षीय साहिल 18 सितंबर को अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे। उनकी मौत से कुछ घंटे पहले एक परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के कथित इस्तेमाल का मामला सामने आया था। इसके बाद छात्र की मौत को लेकर परिसर में विरोध शुरू हो गया और परिवार ने उत्पीड़न तथा जातिगत भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए।पुलिस ने मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच बाद में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। क्राइम ब्रांच अब सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर साहिल की मौत से पहले के घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है।
बुधवार को प्रदर्शन करने पहुंचे यूथ कांग्रेस और VBA की युवा इकाई के सदस्यों ने IIT बॉम्बे प्रशासन पर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारी समूहों ने आरोप लगाया कि संस्थान में भेदभाव से जुड़े सवालों और विद्यार्थियों की मौत की घटनाओं को गंभीरता से देखने की जरूरत है। उन्होंने हाल के महीनों में परिसर में छात्रों की मौत के मामलों की स्वतंत्र क्राइम ब्रांच जांच कराने की मांग की।प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बातचीत में यूथ कांग्रेस के एक प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि मामले के शुरुआती चरण में संस्थान की प्रतिक्रिया उचित नहीं थी। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले शांतिपूर्ण विरोध करने पहुंचे कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। 21 सितंबर को IIT बॉम्बे के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान विभिन्न संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई थीं।
इस बीच IIT बॉम्बे प्रशासन ने मामले में कुछ कदम उठाए हैं। प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को पहले उनकी प्रशासनिक जिम्मेदारी से हटाया गया और बाद में उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने की जानकारी सामने आई। संस्थान ने मामले की जांच के लिए एक समिति भी गठित की है।IIT बॉम्बे के विद्यार्थियों ने भी साहिल की मौत के बाद कई मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं। इनमें स्वतंत्र जांच, छात्र कल्याण व्यवस्था में सुधार, शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने और परिसर में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने जैसी मांगें शामिल हैं। छात्रों ने प्रशासन को 18 सूत्रीय मांगपत्र दिया था। संस्थान के निदेशक ने इस चार्टर पर सहमति जताई थी और आगे की कार्रवाई को लेकर विद्यार्थियों से चर्चा की गई।
मामले को लेकर परिसर में अलग-अलग पक्ष भी सामने आए हैं। IIT बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर डूला के समर्थन में बयान जारी करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं छात्र प्रतिनिधियों के एक बयान में भी कहा गया कि प्रोफेसर के खिलाफ किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। छात्रों के एक वर्ग ने उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अस्थायी रूप से अलग रखने की मांग को एहतियाती कदम बताया है न कि दोषी मानने का आधार।साहिल के परिवार ने दूसरी ओर आरोप लगाया है कि उन्हें कथित जातिगत टिप्पणियों और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था। परिवार ने एफआईआर में नामजद लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है। साहिल के माता-पिता ने कहा है कि उनके बेटे ने पहले भी अपनी परेशानी का जिक्र किया था। ये परिवार के आरोप हैं और उनकी सत्यता की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है।
साहिल के कुछ सहपाठियों ने जातिगत उत्पीड़न के आरोपों से अलग दृष्टिकोण भी सामने रखा है। कुछ छात्रों का कहना है कि उन्होंने साहिल के साथ अपने संपर्क में इस तरह के भेदभाव को नहीं देखा था। इस तरह मामले में अलग-अलग दावे सामने आने के कारण पुलिस जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।मुंबई क्राइम ब्रांच का फोकस फिलहाल साहिल की मौत से पहले के अंतिम घंटों की घटनाओं को दोबारा जोड़ने पर है। जांच अधिकारी परिसर के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखने के साथ विद्यार्थियों और शिक्षकों के बयान दर्ज कर रहे हैं। एफआईआर में जिन लोगों के नाम हैं उनसे भी जांच के क्रम में पूछताछ की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
बुधवार के प्रदर्शन के साथ मामला एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के विरोध का केंद्र बन गया। यूथ कांग्रेस और VBA की युवा इकाई ने काली पट्टियां बांधकर साहिल के लिए न्याय की मांग की और कहा कि जांच में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।फिलहाल साहिल वाकोडे की मौत की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के पास है। परिवार और प्रदर्शनकारी संगठन गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं, जबकि संस्थान के फैकल्टी और छात्रों के कुछ समूह निष्पक्ष जांच तथा जांच पूरी होने से पहले दोष तय नहीं करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में अब क्राइम ब्रांच की जांच से सामने आने वाले साक्ष्य इस मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।
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