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महाराष्ट्र में ‘महा CSR अथॉरिटी’ की तैयारी, फडणवीस ने दिए निर्देश

Kavita2
22 Aug 2026 11:57 AM IST
महाराष्ट्र में ‘महा CSR अथॉरिटी’ की तैयारी, फडणवीस ने दिए निर्देश
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मुंबई। महाराष्ट्र सरकार कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत मिलने वाली राशि के इस्तेमाल को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समन्वित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य में ‘महा CSR अथॉरिटी’ गठित करने का प्रस्ताव तैयार किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में CSR के तहत अलग-अलग स्तरों पर कई योजनाएं और पहलें चलाई जा रही हैं, लेकिन इनके बीच पर्याप्त समन्वय नहीं होने के कारण उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम प्रभाव हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में एक साझा मंच और केंद्रीय समन्वय व्यवस्था की आवश्यकता है।

अलग-अलग पहलों को एक मंच पर लाने की जरूरत

फडणवीस ने अधिकारियों से कहा कि राज्य में CSR से जुड़े विभिन्न प्रयासों को एक साझा व्यवस्था के तहत लाने पर विचार किया जाना चाहिए। प्रस्तावित ‘महा CSR अथॉरिटी’ कंपनियों, सरकारी विभागों और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद कर सकती है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, कई कॉर्पोरेट कंपनियां सामाजिक क्षेत्र में निवेश कर रही हैं और अलग-अलग जिलों तथा क्षेत्रों में परियोजनाएं चला रही हैं। वहीं राज्य सरकार की अपनी विकास योजनाएं भी विभिन्न क्षेत्रों में संचालित हैं। यदि इन प्रयासों के बीच बेहतर समन्वय हो तो CSR फंड का इस्तेमाल उन क्षेत्रों में किया जा सकता है जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

पारदर्शिता पर विशेष जोर

प्रस्तावित प्राधिकरण का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य CSR फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता बढ़ाना भी होगा। CSR के तहत कंपनियां शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण और अन्य सामाजिक क्षेत्रों में धन खर्च करती हैं।

फडणवीस ने इस बात पर जोर दिया कि CSR फंड का इस्तेमाल स्पष्ट प्राथमिकताओं के आधार पर होना चाहिए और इसके परिणामों का आकलन भी किया जाना चाहिए। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी परियोजना पर खर्च की गई राशि से वास्तव में कितने लोगों को लाभ मिला और उसका सामाजिक प्रभाव क्या रहा।

कंपनियों और सरकार के बीच बेहतर तालमेल

महाराष्ट्र देश के प्रमुख औद्योगिक और कारोबारी राज्यों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियां काम करती हैं। ऐसे में राज्य में CSR के माध्यम से बड़ी मात्रा में संसाधन सामाजिक विकास के लिए उपलब्ध हो सकते हैं।

सरकार का मानना है कि यदि इन संसाधनों को राज्य की प्राथमिकताओं के साथ जोड़ा जाए तो कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विकास को गति दी जा सकती है। प्रस्तावित अथॉरिटी कंपनियों को उनकी CSR गतिविधियों के लिए उपयुक्त परियोजनाओं की पहचान करने में भी मदद कर सकती है।

इसके अलावा, विभिन्न कंपनियों द्वारा एक ही क्षेत्र या समान उद्देश्य के लिए अलग-अलग परियोजनाएं चलाने की स्थिति में दोहराव को कम किया जा सकेगा।

जरूरत वाले क्षेत्रों पर ध्यान

‘महा CSR अथॉरिटी’ के जरिए CSR फंड को राज्य के उन क्षेत्रों तक पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है जहां विकास की जरूरत अधिक है। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, पेयजल, स्वच्छता, महिला सशक्तीकरण और रोजगार से जुड़े कार्यक्रमों को इससे लाभ मिल सकता है।

यदि सरकार और कंपनियां मिलकर क्षेत्रवार प्राथमिकताएं तय करें तो CSR निवेश का प्रभाव व्यापक हो सकता है। इसके लिए जिलों की जरूरतों का डेटा तैयार करना और कंपनियों को उसी आधार पर परियोजनाएं चुनने के लिए प्रोत्साहित करना प्रस्तावित व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है।

निगरानी और प्रभाव का आकलन

CSR परियोजनाओं की निगरानी भी प्रस्तावित व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। केवल धन खर्च करने के बजाय उसके परिणामों पर ध्यान देना जरूरी होगा।

उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में CSR फंड से स्कूलों के लिए सुविधाएं विकसित की जाती हैं, तो यह भी देखा जा सकता है कि इससे विद्यार्थियों की उपस्थिति, शिक्षा की गुणवत्ता या स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में कितना सुधार हुआ। इसी तरह स्वास्थ्य परियोजनाओं में लाभार्थियों की संख्या और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच जैसे मानकों का आकलन किया जा सकता है।

ऐसी व्यवस्था से CSR खर्च को केवल वित्तीय गतिविधि के बजाय सामाजिक प्रभाव से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

मौजूदा प्रयासों में समन्वय की कोशिश

मुख्यमंत्री ने इस पहल के पीछे मुख्य वजह राज्य में चल रही CSR गतिविधियों का बिखरा हुआ स्वरूप बताया। अलग-अलग कंपनियां और संस्थाएं अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर परियोजनाएं संचालित करती हैं। कई सरकारी विभाग भी सामाजिक क्षेत्र में योजनाएं लागू करते हैं।

एक केंद्रीय समन्वय मंच होने पर इन पहलों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है। इससे सरकार यह भी पहचान सकेगी कि किन क्षेत्रों में CSR गतिविधियां पर्याप्त हैं और किन क्षेत्रों में अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता है।

उद्योग जगत की भागीदारी महत्वपूर्ण

प्रस्तावित प्राधिकरण को सफल बनाने के लिए उद्योग जगत की भागीदारी अहम होगी। कंपनियों के CSR प्रमुखों और सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों के साथ नियमित संवाद स्थापित किया जा सकता है।

सरकार की कोशिश हो सकती है कि कंपनियों को ऐसी परियोजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाए जिनका राज्य के विकास लक्ष्यों से सीधा संबंध हो। इससे कंपनियों को भी अपने CSR बजट के प्रभावी इस्तेमाल में मदद मिल सकती है।

आगे तैयार होगा प्रस्ताव

फडणवीस के निर्देश के बाद अब संबंधित अधिकारी ‘महा CSR अथॉरिटी’ के गठन से जुड़े प्रस्ताव पर काम करेंगे। इसमें प्राधिकरण की संरचना, अधिकार, कार्यक्षेत्र, निगरानी व्यवस्था और सरकारी विभागों तथा कंपनियों के साथ समन्वय की भूमिका जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा।

सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि प्रस्तावित व्यवस्था CSR गतिविधियों को नियंत्रित करने के बजाय उन्हें बेहतर दिशा देने वाली समन्वय प्रणाली के रूप में विकसित हो।

मुख्यमंत्री की इस पहल का उद्देश्य स्पष्ट है—राज्य में उपलब्ध CSR संसाधनों को अधिक व्यवस्थित तरीके से सामाजिक विकास में लगाना और उनके प्रभाव को बढ़ाना। यदि प्रस्तावित ‘महा CSR अथॉरिटी’ प्रभावी ढंग से काम करती है, तो महाराष्ट्र में कॉर्पोरेट सामाजिक निवेश को सरकारी विकास प्राथमिकताओं के साथ जोड़ने का एक नया मॉडल विकसित हो सकता है।

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