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लासलगांव मंडी में प्याज 5,100 रुपये प्रति क्विंटल, सीमित स्टॉक से किसान मायूस

लासलगांव। प्याज की कीमतों में तेजी का सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा। लासलगांव एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमिटी (एपीएमसी) में गर्मी के मौसम वाली प्याज का अधिकतम भाव 5,100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। लंबे समय तक कम कीमत मिलने से नुकसान झेलने वाले किसानों के लिए भाव में हुई यह बढ़ोतरी राहत की खबर है। हालांकि, बड़ी संख्या में किसानों के पास अब बहुत कम प्याज बची है। इस कारण मौजूदा तेजी का पूरा लाभ किसानों को मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है।
बुधवार को लासलगांव एपीएमसी में गर्मी के मौसम वाली कुल 8,548 क्विंटल प्याज की आवक दर्ज की गई। नीलामी के लिए कुल 689 लॉट लगाए गए। इनमें 538 लॉट अच्छी गुणवत्ता वाली प्याज के थे, जबकि 151 लॉट में कम गुणवत्ता या खराब श्रेणी की प्याज शामिल थी। अच्छी गुणवत्ता वाली प्याज की मांग अधिक रहने के कारण उसके भाव में तेजी देखी गई। बेहतर आकार, रंग और भंडारण क्षमता वाली प्याज को व्यापारियों ने प्राथमिकता दी।
मंडी में अधिकतम भाव 5,100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचने से उन किसानों में उम्मीद जगी है, जिन्होंने अपनी कुछ उपज भंडारित कर रखी थी। ऐसे किसान अब बेहतर कीमत मिलने की संभावना से उत्साहित हैं। इसके बावजूद मंडी की मौजूदा स्थिति का लाभ सीमित किसानों को ही मिल सकता है। सीजन की शुरुआत में आर्थिक जरूरतों, भंडारण सुविधाओं की कमी और प्याज खराब होने की आशंका के कारण किसानों ने अपनी उपज का बड़ा हिस्सा कम भाव पर बेच दिया था।
शुरुआती दौर में बाजार में प्याज की आवक अधिक थी, जबकि उसके मुकाबले मांग अपेक्षाकृत कमजोर रही। इसका असर कीमतों पर पड़ा और किसानों को अपनी उपज कम दाम पर बेचनी पड़ी। जिन किसानों ने उत्पादन के लिए बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और परिवहन पर बड़ी रकम खर्च की थी, उन्हें लागत निकालने में भी कठिनाई हुई। अब कीमतों में बढ़ोतरी होने के बाद भी उनकी ज्यादातर उपज बाजार में पहले ही बिक चुकी है।
किसानों का कहना है कि जब उनके पास बड़ी मात्रा में प्याज उपलब्ध थी, तब कीमतें कम थीं। अब भाव बढ़े हैं तो बेचने के लिए पर्याप्त माल नहीं बचा है। इस स्थिति के कारण बाजार की तेजी से किसानों की आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पाएगी। जिन किसानों के पास प्याज का सीमित स्टॉक मौजूद है, वे भी भाव में आगे और वृद्धि की संभावना तथा भंडारित उपज की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए बिक्री का निर्णय ले रहे हैं।
गर्मी के मौसम में उत्पादित प्याज को आम तौर पर कुछ समय तक भंडारित किया जा सकता है। किसान बाजार में बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद में इसे प्याज भंडार गृहों या परंपरागत संरचनाओं में रखते हैं। लेकिन लंबे समय तक भंडारण करने में खराब मौसम, नमी, सड़न और वजन कम होने का जोखिम बना रहता है। यदि प्याज खराब होने लगे तो उसकी गुणवत्ता गिर जाती है और मंडी में अपेक्षित भाव नहीं मिल पाता।
बुधवार की नीलामी के आंकड़ों से भी प्याज की गुणवत्ता में अंतर स्पष्ट हुआ। कुल 689 लॉट में से 538 लॉट अच्छी गुणवत्ता वाले रहे। इससे पता चलता है कि मंडी में पहुंची प्याज का बड़ा हिस्सा व्यापार योग्य बेहतर श्रेणी का था। वहीं 151 लॉट कम गुणवत्ता या खराब प्याज के थे। ऐसे माल को अच्छी गुणवत्ता वाली प्याज के मुकाबले कम भाव मिलने की संभावना रहती है। कीमत तय करने में प्याज का आकार, रंग, नमी, सड़न की स्थिति और उसकी भंडारण क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
बाजार से जुड़े लोगों की नजर अब आने वाले दिनों की आवक पर रहेगी। यदि मंडी में प्याज की आवक सीमित रहती है और व्यापारियों की मांग बनी रहती है तो कीमतों में मजबूती जारी रह सकती है। वहीं आवक अचानक बढ़ने या मांग कमजोर पड़ने की स्थिति में भाव में बदलाव भी संभव है। ऐसे में किसान रोजाना मंडी के भाव पर नजर रखते हुए अपनी बची हुई उपज बेचने की योजना बना रहे हैं।
प्याज की कीमतों में मौजूदा तेजी उपभोक्ताओं के लिए चिंता बढ़ा सकती है। मंडी स्तर पर कीमत बढ़ने का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने पर प्याज के दाम और अधिक हो सकते हैं। थोक कीमत के अतिरिक्त परिवहन, छंटाई, भंडारण और खुदरा विक्रेताओं का खर्च जुड़ने के कारण उपभोक्ताओं को मंडी भाव से अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। हालांकि खुदरा बाजार में इसका कितना असर पड़ेगा, यह स्थानीय आपूर्ति और मांग पर निर्भर करेगा।
किसानों के लिए यह तेजी राहत तो है, लेकिन देर से आई राहत मानी जा रही है। यदि यही कीमत उस समय मिलती, जब किसानों के पास बड़ी मात्रा में प्याज थी, तो उन्हें उत्पादन लागत निकालने और पुराने नुकसान की भरपाई करने में अधिक मदद मिल सकती थी। अब जिन किसानों ने जोखिम उठाकर अपनी उपज सुरक्षित रखी है, वे बढ़ी हुई कीमत का लाभ उठा सकते हैं। दूसरी ओर, पहले ही कम भाव में प्याज बेच चुके किसानों को बाजार की मौजूदा तेजी का प्रत्यक्ष फायदा नहीं मिलेगा।
लासलगांव एपीएमसी में प्याज का अधिकतम भाव 5,100 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंचना बाजार में मजबूत मांग और सीमित उपलब्धता की ओर संकेत करता है। फिलहाल किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं की निगाहें आगामी आवक तथा कीमतों के रुख पर टिकी हैं।





