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MPSC अभ्यर्थी प्रथमेश देशमुख के परिवार से मिले अभिजीत दिपके

धाराशिव। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने गुरुवार को महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे प्रथमेश देशमुख के परिवार से मुलाकात की। प्रथमेश की पुणे में मौत हो गई थी। दिपके ने धाराशिव स्थित उनके घर पहुंचकर शोक संतप्त परिजनों को सांत्वना दी और इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।
अभिजीत दिपके ने परिवार से मुलाकात का एक वीडियो सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी साझा किया। वीडियो में वह प्रथमेश के माता-पिता और अन्य रिश्तेदारों के साथ बातचीत करते दिखाई दिए। परिवार के सदस्य इस दौरान बेहद भावुक नजर आए। दिपके ने प्रथमेश की मौत पर दुख जताते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों की आर्थिक और मानसिक परेशानियों का मुद्दा उठाया।
Dharashiv, Maharashtra: Cockroach Janta Party Founder Abhijeet Dipke Meets family of 28-Year-Old MPSC aspirant Prathamesh Deshmukh who died while preparing for competitive exams pic.twitter.com/18aadOPaHM
— IANS (@ians_india) September 10, 2026
प्रथमेश देशमुख धाराशिव जिले के रहने वाले थे और करीब दो वर्षों से पुणे में रहकर MPSC परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। उनकी उम्र को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट में अंतर है। कुछ खबरों में उन्हें 28 वर्ष का बताया गया है जबकि उनकी उम्र 25 वर्ष बताई गई है। आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही उम्र की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रथमेश पुणे में किराये के कमरे में रहते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। पुलिस को उनके पास से एक कथित नोट मिला है जिसकी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में आर्थिक परेशानियों और कर्ज की बात सामने आई है। हालांकि मृत्यु के वास्तविक कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकेगा।
अभिजीत दिपके ने इस घटना को केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी तक सीमित नहीं बताते हुए प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी व्यापक समस्याओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा कई वर्षों तक सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं। परीक्षा में देरी, भर्ती प्रक्रिया लंबित रहने और परिणाम घोषित होने में समय लगने से उनके सामने अनिश्चितता की स्थिति पैदा होती है।
उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में बार-बार आने वाली समस्याओं से विद्यार्थियों का भरोसा प्रभावित हो रहा है। दिपके ने सरकार से प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था की समीक्षा करने और अभ्यर्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर कदम उठाने की मांग की। इन आरोपों पर राज्य सरकार अथवा MPSC की तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दिपके ने कहा कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों को बड़े शहरों में रहकर तैयारी करने के दौरान कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। किराया, भोजन, कोचिंग, किताबों और परीक्षा शुल्क का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल हो सकता है। लंबी तैयारी के बावजूद भर्ती पूरी नहीं होने पर उनका आर्थिक और भावनात्मक दबाव और बढ़ सकता है।
प्रथमेश के परिवार से मुलाकात के दौरान उनकी मां ने बेटे के भविष्य को लेकर देखे गए सपनों को याद किया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक परिवार को उम्मीद थी कि प्रथमेश परीक्षा में सफल होकर सरकारी अधिकारी बनेगा। उसकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है। दिपके ने परिजनों की बात सुनी और उन्हें न्याय तथा सहायता दिलाने के लिए आवाज उठाने की बात कही।
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट में भी दिपके के परिवार से मिलने और विद्यार्थियों की आर्थिक परेशानियों को उठाने का उल्लेख किया गया है। हालांकि कर्ज की राशि और मौत के पीछे बताई जा रही परिस्थितियां फिलहाल जांच का हिस्सा हैं। इन्हें अंतिम या सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पुलिस प्रथमेश के कमरे से मिले कथित नोट और दूसरे साक्ष्यों की जांच कर रही है। परिवार, मित्रों और परिचितों से जानकारी जुटाई जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि घटना से पहले वह किन परिस्थितियों से गुजर रहे थे। जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति, संस्था या एकमात्र कारण को उनकी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
इस घटना के बाद MPSC की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों की समस्याओं को लेकर राज्य में चर्चा तेज हो गई है। विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षाओं का स्पष्ट कैलेंडर जारी किया जाना चाहिए और भर्ती प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी होनी चाहिए। पेपर लीक या अनियमितता की शिकायत सामने आने पर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए।
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं पर परिवार की उम्मीदों और नौकरी पाने का दबाव भी रहता है। कई विद्यार्थी वर्षों तक तैयारी करते हुए आर्थिक संकट का सामना करते हैं। ऐसे अभ्यर्थियों के लिए सुलभ मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, आर्थिक मार्गदर्शन और शिकायत निवारण प्रणाली की आवश्यकता पर विशेषज्ञ लगातार जोर देते हैं।
अभिजीत दिपके ने युवाओं से निराशा में कोई कठोर कदम नहीं उठाने और परेशानी होने पर परिवार, दोस्तों या विशेषज्ञों से बात करने की अपील की। उन्होंने कहा कि परीक्षा और नौकरी से जुड़ी समस्याओं का सामूहिक तथा लोकतांत्रिक तरीके से समाधान तलाशा जाना चाहिए। कोई भी परीक्षा या परिणाम जीवन से बड़ा नहीं हो सकता।
प्रथमेश देशमुख की मौत ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा का सवाल फिर सामने ला दिया है। परिवार से दिपके की मुलाकात के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज होने की संभावना है। फिलहाल पुलिस मामले की परिस्थितियों की जांच कर रही है और जांच के निष्कर्षों का इंतजार है।
यदि कोई व्यक्ति गंभीर तनाव या स्वयं को नुकसान पहुंचाने के विचारों से जूझ रहा है तो उसे अकेला न छोड़ें। परिवार के भरोसेमंद सदस्य या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से तत्काल संपर्क करें। टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 अथवा आपातकालीन सहायता नंबर 112 से मदद मांगी जा सकती है।





