महाराष्ट्र

लंबित मांगों को लेकर राज्यभर में नर्सों का दो घंटे का कार्यबहिष्कार

Kavita2
5 Aug 2026 2:33 PM IST
लंबित मांगों को लेकर राज्यभर में नर्सों का दो घंटे का कार्यबहिष्कार
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बीड। सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत नर्सिंग कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर मंगलवार को महाराष्ट्र भर में नर्सों ने दो घंटे का काम-बंद आंदोलन किया। महाराष्ट्र गवर्नमेंट नर्सेस फेडरेशन के आह्वान पर आयोजित इस राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन में बीड सिविल अस्पताल की नर्सों ने भी हिस्सा लिया और निर्धारित समय तक कार्य का बहिष्कार कर सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।

नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन अब तक उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। इसी के विरोध में राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में कार्यरत नर्सों ने सांकेतिक रूप से दो घंटे तक काम बंद रखा। आंदोलन के दौरान नर्सों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए और प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग की।

बीड सिविल अस्पताल में भी बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टाफ इस आंदोलन में शामिल हुआ। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं कीं। आपातकालीन सेवाएं और गंभीर मरीजों के उपचार से जुड़ी व्यवस्थाओं को जारी रखा गया, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

महाराष्ट्र गवर्नमेंट नर्सेस फेडरेशन का कहना है कि नर्सिंग कैडर से जुड़े कई मुद्दे वर्षों से लंबित हैं। संगठन का आरोप है कि बार-बार सरकार और संबंधित विभाग के समक्ष मांगें रखने के बावजूद उनके समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। ऐसे में राज्यव्यापी आंदोलन का निर्णय लिया गया।

आंदोलन में शामिल नर्सों ने कहा कि वे स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और मरीजों की सेवा में दिन-रात जुटी रहती हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा शर्तों, पदोन्नति, कैडर पुनर्गठन और अन्य प्रशासनिक मामलों से जुड़ी मांगों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से नर्सिंग कैडर से संबंधित लंबित प्रस्तावों को जल्द मंजूरी देने, सेवा संबंधी विसंगतियों को दूर करने और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नर्सिंग कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान आवश्यक है।

अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि आंदोलन की पूर्व सूचना होने के कारण आवश्यक तैयारियां कर ली गई थीं। मरीजों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए आपातकालीन सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित किया गया। ओपीडी और अन्य नियमित सेवाओं में कुछ हद तक असर जरूर पड़ा, लेकिन गंभीर मरीजों की देखभाल में कोई बाधा नहीं आने दी गई।

स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि नर्सिंग स्टाफ अस्पतालों की रीढ़ माना जाता है। मरीजों की देखभाल, उपचार प्रक्रिया और अस्पतालों के सुचारु संचालन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में यदि उनकी सेवा संबंधी समस्याओं का समय पर समाधान नहीं किया जाता है, तो इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।

महाराष्ट्र गवर्नमेंट नर्सेस फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। संगठन ने सरकार से वार्ता कर समाधान निकालने की अपील भी की है।

फिलहाल दो घंटे के सांकेतिक कार्यबहिष्कार के माध्यम से नर्सों ने अपनी नाराजगी दर्ज कराई है। अब निगाहें राज्य सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि सरकार और नर्सिंग संगठन के बीच बातचीत सफल रहती है, तो विवाद का समाधान निकल सकता है। अन्यथा, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इस मुद्दे पर आगे और बड़े आंदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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