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NEET पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, ₹10 लाख में खरीदा गया पेपर ₹15 लाख में बेचने का आरोप

Maharashtra महाराष्ट्र: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में पेपर लीक के आरोपों के बाद देशभर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए खुलासे सामने आ रहे हैं, जिनसे परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में आरोपी शुभम खैरनार की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि शुभम ने पुणे के अपने एक परिचित धनंजय के साथ मिलकर इस पेपर लीक को अंजाम दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि धनंजय ने कथित तौर पर लीक हुआ प्रश्नपत्र शुभम को ₹10 लाख में उपलब्ध कराया था।
इसके बाद जांच में यह भी सामने आया है कि शुभम ने इस लीक हुए प्रश्नपत्र को आगे टेलीग्राम जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ₹15 लाख में बेचने की कोशिश की। एजेंसियों को संदेह है कि यह पूरा लेनदेन एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाकर अवैध तरीके से पैसे कमाने में शामिल है।
जांचकर्ताओं का मानना है कि यह मामला केवल दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा और संगठित रैकेट सक्रिय हो सकता है, जो विभिन्न माध्यमों से परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक कराने और उसे बेचने का काम करता है। इस तरह के नेटवर्क छात्रों और शिक्षा प्रणाली दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। कई जगहों पर परीक्षा प्रणाली में सुधार और सख्त निगरानी की मांग उठ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए इस तरह की गतिविधियां तेजी से फैल रही हैं, जिससे इन्हें रोकना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
एजेंसियों ने बताया कि इस मामले में कई डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है, जिनमें चैट रिकॉर्ड, ट्रांजैक्शन डिटेल और नेटवर्क से जुड़े अन्य लिंक शामिल हैं। साथ ही, यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस और जांच एजेंसियां इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। आरोपियों से पूछताछ जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
सरकारी स्तर पर भी इस मामले को लेकर चिंता जताई गई है और परीक्षा सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल यह मामला देश में परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है और जांच के नतीजों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।





