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Maharashtra महाराष्ट्र: नासिक लोकल अथॉरिटीज़ निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल जारी है। निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गीते के नाम वापस लेने के बाद भी महायुति गठबंधन की स्थिति को लेकर चर्चाएं थम नहीं रही हैं। हालांकि, राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से महायुति उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है, फिर भी गठबंधन के भीतर पूर्ण एकजुटता को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में महायुति नेतृत्व ने अपने स्थानीय कॉर्पोरेटर्स को राज्य स्तर के वरिष्ठ नेताओं से मार्गदर्शन लेने के लिए मुंबई और ठाणे के दौरे पर भेजने का निर्णय लिया है। इस कदम को राजनीतिक हलकों में “टूर डिप्लोमेसी” के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस रणनीति का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उभर रहे मतभेदों को दूर करना और गठबंधन के भीतर समन्वय को मजबूत करना है।
नासिक निर्वाचन क्षेत्र में संख्याबल के आधार पर महायुति की स्थिति मजबूत बताई जा रही है। इसके बावजूद स्थानीय नेतृत्व किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतना चाहता। महायुति उम्मीदवार नरेंद्र दराडे इस चुनाव को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी संभावित जोखिम से बचने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गीते ने वरिष्ठ मंत्रियों के समझाने के बाद अपना नामांकन वापस ले लिया था। हालांकि, नाम वापस लेने के बाद भी उन्होंने यह संकेत दिया कि वे महायुति उम्मीदवार के लिए सक्रिय रूप से प्रचार नहीं करेंगे। इसी तरह, गणेश गीते भी चुनावी प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं, जिससे स्थानीय समीकरणों में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
इस घटनाक्रम ने महायुति के भीतर आंतरिक समन्वय को लेकर नई अटकलों को जन्म दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही चुनावी जीत की संभावना मजबूत हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर सहयोग की कमी और कुछ नेताओं की निष्क्रियता चिंता का विषय बनी हुई है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए महायुति नेतृत्व ने स्थानीय कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों को मुंबई-ठाणे भेजकर वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कराने का फैसला लिया है। इन बैठकों में संगठनात्मक रणनीति, मतभेदों को दूर करने और चुनावी अभियान को एकजुट रूप से आगे बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद गठबंधन सहयोगियों के बीच चल रहे मतभेदों को सुलझाने की कोशिश की जाएगी। नेतृत्व को उम्मीद है कि इन बैठकों के बाद सभी घटक दल एक साझा रणनीति के तहत काम करेंगे।
कुल मिलाकर, नासिक विधान परिषद चुनाव में संख्या बल महायुति के पक्ष में होने के बावजूद राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौतियाँ पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि “टूर डिप्लोमेसी” और वरिष्ठ नेताओं की भूमिका से गठबंधन के भीतर कितनी एकजुटता स्थापित हो पाती है।





