महाराष्ट्र

Jalgaon : जर्जर स्कूल भवनों में पढ़ने को मजबूर छात्र, ₹6.18 करोड़ मरम्मत निधि लौटाई गई

Kavita2
15 Jun 2026 2:55 PM IST
Jalgaon : जर्जर स्कूल भवनों में पढ़ने को मजबूर छात्र, ₹6.18 करोड़ मरम्मत निधि लौटाई गई
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Maharashtra महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के जलगांव जिले में शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहां सैकड़ों छात्र आज भी जर्जर और असुरक्षित स्कूल भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। जबकि मरम्मत के लिए धन उपलब्ध था, इसके बावजूद जरूरी कार्य समय पर नहीं किए गए।

Jalgaon जिले में कुल 362 जिला परिषद स्कूलों की 720 कक्षाओं को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता बताई गई थी। इसके लिए सरकार की ओर से ₹6.18 करोड़ रुपये का बजट भी मंजूर किया गया था, लेकिन यह राशि उपयोग में नहीं लाई गई और प्रशासनिक देरी के कारण अंततः वापस कर दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 वित्तीय वर्ष में जिला परिषद को कुल आवंटित धन में से ₹43.72 करोड़ रुपये खर्च नहीं किए गए। इसमें स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए निर्धारित राशि भी शामिल थी, जो पूरी तरह से अप्रयुक्त रह गई।

शिक्षा विभाग और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस स्थिति के पीछे योजना की कमी, विभागों के बीच समन्वय का अभाव और प्रशासनिक निष्क्रियता प्रमुख कारण रहे। जिला योजना समिति द्वारा बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया गया।

Zilla Parishad के अंतर्गत आने वाले कई स्कूलों की स्थिति इतनी खराब है कि बरसात के मौसम में छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी खतरा बना हुआ है। दीवारों में दरारें, टपकती छतें और कमजोर संरचनाएं बच्चों की पढ़ाई पर गंभीर असर डाल रही हैं।

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, जिससे अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है। कई लोगों ने सवाल उठाया है कि जब धन उपलब्ध था तो उसका उपयोग समय पर क्यों नहीं किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला न केवल वित्तीय प्रबंधन की विफलता को दर्शाता है, बल्कि ग्रामीण शिक्षा प्रणाली की गंभीर समस्याओं को भी उजागर करता है। उनका कहना है कि यदि समय पर मरम्मत कार्य शुरू हो जाता तो छात्रों को सुरक्षित वातावरण मिल सकता था।

स्थानीय प्रशासन ने अब मामले की समीक्षा शुरू करने की बात कही है और भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

कुल मिलाकर, जलगांव का यह मामला शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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