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Mumbai : पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़े, इस महीने तीसरी बढ़ोतरी

Kavita2
23 May 2026 9:59 AM IST
Mumbai : पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़े, इस महीने तीसरी बढ़ोतरी
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Mumbai मुंबई: मुंबई में शनिवार को ईंधन की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। पेट्रोल और डीजल के दामों में यह इस महीने की तीसरी बढ़ोतरी है, जिससे शहर में परिवहन लागत पर भी असर पड़ने की आशंका है।

नई कीमतों के अनुसार, मुंबई में पेट्रोल अब 109 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गया है, जबकि डीजल की कीमत 95 रुपये प्रति लीटर को पार कर गई है। लगातार हो रही इस वृद्धि के चलते वाहन चालकों और आम जनता में चिंता बढ़ गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण हैं। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव और अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल के दामों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है।

इस महीने लगातार तीसरी बार हुई कीमतों में वृद्धि से मुंबई जैसे बड़े महानगर में जीवन-यापन की लागत पर भी असर पड़ सकता है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोग और रोजाना यात्रा करने वाले नागरिक इस बढ़ोतरी से अधिक प्रभावित हो रहे हैं। टैक्सी, ऑटो और लॉजिस्टिक्स सेवाओं की परिचालन लागत बढ़ने की संभावना है, जिससे आने वाले दिनों में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी असर दिख सकता है।

ईंधन की कीमतों में लगातार बदलाव को लेकर आम उपभोक्ताओं में असंतोष देखा जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि बढ़ती कीमतें उनके मासिक बजट को प्रभावित कर रही हैं, खासकर उन परिवारों पर जो दैनिक यात्रा के लिए निजी वाहनों पर निर्भर हैं।

सरकारी और पेट्रोलियम क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों में स्थिरता आने तक ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार की स्थिति पर भारत में ईंधन दरों का सीधा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है।

मुंबई में लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने एक बार फिर महंगाई के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह रुझान जारी रहता है, तो इसका असर शहरी उपभोक्ता खर्च और महंगाई दर पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल शहर के लोग इस बढ़ोतरी के बीच अपने दैनिक खर्चों को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि बाजार की नजर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और सरकारी नीति पर टिकी हुई है।

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