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महाराष्ट्र में मराठी टेस्ट अनिवार्य कैब ड्राइवरों की बढ़ी मुश्किल

Ratna Netam
12 Aug 2026 4:02 PM IST
महाराष्ट्र में मराठी टेस्ट अनिवार्य कैब ड्राइवरों की बढ़ी मुश्किल
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मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में यात्री परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने और यात्रियों तथा वाहन चालकों के बीच संवाद आसान करने के उद्देश्य से कमर्शियल पैसेंजर वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा के व्यावहारिक ज्ञान को जरूरी कर दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार की ओर से लागू किए गए नए नियमों के तहत ऑटो-रिक्शा, पारंपरिक टैक्सी और ऐप आधारित कैब चलाने वाले ड्राइवरों को भी मराठी में सामान्य बातचीत करने में सक्षम होना होगा। इसका मतलब है कि Ola, Uber और Rapido जैसी कंपनियों के माध्यम से कैब चलाने वाले ड्राइवर भी इस नियम के दायरे में आएंगे।
राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार, 12 अगस्त को साफ किया कि ऐप आधारित कैब चालकों को मराठी भाषा की इस अनिवार्यता से कोई छूट नहीं मिलेगी। सरकार ने 'महाराष्ट्र मोटर वाहन (संशोधन) नियम, 2026' के तहत 1989 के नियमों में बदलाव किया है। संशोधित नियमों में सार्वजनिक यात्री वाहन चलाने से जुड़े परमिट और उसके नवीनीकरण के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान एक जरूरी शर्त के रूप में शामिल किया गया है।
सरकार का कहना है कि यात्री परिवहन सेवा में स्थानीय भाषा की जानकारी होने से यात्रियों और ड्राइवरों के बीच संवाद बेहतर होगा। खासकर उन परिस्थितियों में जब यात्री को किसी स्थान, रास्ते, किराए, सुरक्षा या अन्य जरूरी जानकारी को लेकर चालक से बातचीत करनी हो, तब स्थानीय भाषा का सामान्य ज्ञान उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, इस नियम को लेकर दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र आकर कैब और ऑटो चलाने वाले ड्राइवरों के बीच चिंता भी बढ़ सकती है।
नए प्रावधानों के तहत क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों को नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार दिया गया है। पहली बार नियम तोड़ने पर ड्राइविंग लाइसेंस को तीन महीने तक निलंबित किया जा सकता है। यदि कोई चालक बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके परमिट को स्थायी रूप से रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। यह प्रावधान केवल ड्राइवरों तक सीमित नहीं है, बल्कि परमिट धारकों और नए परमिट के आवेदन या उसके नवीनीकरण से जुड़े मामलों में भी लागू होगा।
संशोधित नियमों में पब्लिक सर्विस वाहनों की मंजूरी, परमिट और परमिट नवीनीकरण से जुड़े प्रावधानों में भाषा संबंधी शर्त जोड़ी गई है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाली मोटर कैब और ऐप आधारित कैब भी शामिल हैं। यानी किसी कंपनी के ऐप के जरिए यात्रियों को सेवा देने वाला ड्राइवर भी इस नियम से बाहर नहीं रहेगा। मराठी में व्यावहारिक बातचीत करने में असमर्थ पाए जाने पर संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में इस नियम के लागू होने को लेकर विशेष चर्चा है। इन शहरों में बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से आए लोग कैब, टैक्सी और ऑटो जैसी यात्री परिवहन सेवाओं से जुड़े हुए हैं। ऐसे में नए नियम के कारण इन ड्राइवरों को मराठी सीखने की जरूरत पड़ सकती है। नियम के उल्लंघन पर लाइसेंस और परमिट से जुड़ी कार्रवाई के प्रावधानों के चलते ड्राइवरों के लिए भाषा की शर्त को पूरा करना महत्वपूर्ण हो गया है।
हालांकि, सरकार ने ड्राइवरों के सामने केवल नियम रखकर उन्हें छोड़ने के बजाय भाषा सीखने के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था भी शुरू की है। महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ जैसे संगठनों के सहयोग से यात्री वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। विभाग के अनुसार यह प्रशिक्षण रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस और भाषा प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से चलाया जा रहा है।
परिवहन विभाग के मुताबिक बड़ी संख्या में गैर-मराठी भाषी यात्री वाहन चालक इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा ले चुके हैं। बताया गया है कि 1.10 लाख से अधिक गैर-मराठी भाषी यात्री वाहन चालकों ने चार घंटे का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। इस पहल का उद्देश्य ड्राइवरों को रोजमर्रा के यात्री संवाद के लिए जरूरी मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान देना है।
प्रशिक्षण पूरा करने वाले ड्राइवरों को प्रमाणपत्र भी दिए जाएंगे। 17 अगस्त को ठाणे में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में ड्राइवरों को प्रमाणपत्र दिए जाने की योजना है। परिवहन विभाग की ओर से तय समयसीमा से पहले अधिक से अधिक ड्राइवरों को प्रशिक्षण पूरा कराने की कोशिश की जा रही है।
सरकार के इस फैसले से जहां स्थानीय भाषा में यात्री सेवा को मजबूत करने की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं दूसरे राज्यों से आए ड्राइवरों के बीच रोजगार को लेकर सवाल भी उठ सकते हैं। खासकर उन लोगों के लिए मराठी सीखना जरूरी हो जाएगा जो लंबे समय से महाराष्ट्र में कैब या ऑटो चलाकर अपनी आजीविका चला रहे हैं। अब आने वाले समय में इस नियम का जमीन पर किस तरह पालन कराया जाता है और ड्राइवरों पर कार्रवाई कितनी सख्ती से होती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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