- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- मराठी भाषा टेस्ट में...
महाराष्ट्र
मराठी भाषा टेस्ट में ऑटो चालकों की अग्निपरीक्षा बड़ी संख्या में हुए फेल
Ratna Netam
21 Aug 2026 2:36 PM IST

x
महाराष्ट्र : ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए शुरू की गई मराठी भाषा परीक्षा अब चर्चा का विषय बन गई है। राज्य परिवहन विभाग की ओर से शुरू किए गए इस अभियान के पहले ही दिन बड़ी संख्या में चालक मराठी भाषा की परीक्षा में सफल नहीं हो पाए। आरटीओ अधिकारियों ने जांच के दौरान कई चालकों से मराठी में बातचीत की और यात्रियों से जुड़े रोजमर्रा के सवाल पूछे। इस प्रक्रिया में 1200 से अधिक चालक तय मानकों पर खरे नहीं उतर पाए।
जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो रिक्शा, टैक्सी और अन्य सार्वजनिक यात्री वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान जरूरी किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चालक यात्रियों से आसानी से संवाद कर सकें और स्थानीय भाषा समझने में सक्षम हों। इसके तहत आरटीओ की टीमों ने सड़क पर ही चालकों की भाषा क्षमता की जांच शुरू की।
इस मराठी टेस्ट में चालकों से कुल 16 सवाल पूछे गए। सवाल बेहद सामान्य बातचीत से जुड़े थे, जिनमें यात्री से गंतव्य पूछना, किराया बताना, रास्ते की जानकारी देना, समय बताना और डिजिटल भुगतान जैसे विषय शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा का उद्देश्य कठिन भाषा ज्ञान की जांच करना नहीं, बल्कि यात्रियों के साथ संवाद करने की क्षमता को परखना है।
मुंबई महानगर क्षेत्र में आरटीओ की टीमों ने बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सी चालकों की जांच की। जांच के दौरान कई चालक मराठी में पूछे गए सामान्य सवालों का जवाब नहीं दे पाए। ऐसे चालकों को नोटिस जारी कर सुधार का मौका दिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उन्हें दोबारा भाषा सीखकर परीक्षा में शामिल होना होगा।
परिवहन विभाग की इस कार्रवाई के बाद ऑटो-टैक्सी चालकों में चिंता बढ़ गई है। कई चालकों का कहना है कि वे वर्षों से महाराष्ट्र में काम कर रहे हैं, लेकिन अब अचानक भाषा परीक्षा के कारण उनके रोजगार पर असर पड़ सकता है। कुछ यूनियनों ने भी सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय और प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।
वहीं, सरकार का पक्ष है कि महाराष्ट्र की आधिकारिक भाषा मराठी का सम्मान और यात्रियों की सुविधा दोनों जरूरी हैं। अधिकारियों के अनुसार, सार्वजनिक सेवा से जुड़े लोगों के लिए स्थानीय भाषा का सामान्य ज्ञान होना यात्रियों और चालकों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद करेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि बेहतर सेवा व्यवस्था के लिए उठाया गया है।
आरटीओ की ओर से असफल रहने वाले चालकों को एक निश्चित समय दिया जा रहा है ताकि वे मराठी सीख सकें और दोबारा परीक्षा पास कर सकें। यदि चालक आगे भी निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते हैं तो उनके बैज या परमिट पर कार्रवाई की जा सकती है। इससे हजारों चालकों के सामने अपने काम को जारी रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
महाराष्ट्र में भाषा और रोजगार का मुद्दा पहले भी राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। मराठी भाषा को बढ़ावा देने की मांग लंबे समय से उठती रही है, वहीं दूसरे राज्यों से आए लोगों का कहना है कि रोजगार के अवसरों पर भाषा के नाम पर रोक नहीं लगनी चाहिए। ऑटो-टैक्सी चालकों की यह परीक्षा इसी बहस को फिर से सामने ले आई है।
फिलहाल आरटीओ की कार्रवाई जारी है और आने वाले दिनों में और चालकों की भाषा जांच की जाएगी। सरकार और परिवहन विभाग का कहना है कि नियमों का पालन सभी को करना होगा, जबकि चालक संगठन अपने सदस्यों के हितों को लेकर आगे की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
TagsTestauto-rickshaw driverstrial by fireटेस्टऑटोचालकोंअग्निपरीक्षाजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





