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सूखा राहत बैठक से गैरहाजिर रहे कैज तहसीलदार, कलेक्टर ने पदभार वापस लिया

बीड। जिले में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए कलेक्टर विवेक जॉनसन ने कैज के तहसीलदार भरत गंगावणे से उनका पदभार वापस ले लिया है। यह कार्रवाई मंगलवार को की गई। बताया जा रहा है कि गंगावणे कैज की विधायक नमिता मुंडाडा की अध्यक्षता में आयोजित सूखा राहत समीक्षा की एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हुए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाया गया।
कलेक्टर के आदेश के बाद तहसीलदार का अतिरिक्त प्रभार नायब तहसीलदार राजस्व-2 अशोक भंडारे को सौंप दिया गया है। भंडारे अगले आदेश तक अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों के साथ कैज तहसीलदार का अतिरिक्त कार्यभार भी संभालेंगे।
जिले में सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए राजस्व अधिकारियों को पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे बिना पूर्व अनुमति के अपना मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे। ऐसे समय में राहत और प्रशासनिक कार्यों की लगातार निगरानी आवश्यक मानी जा रही है। इसी कारण अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर प्रशासन सख्त रुख अपना रहा है।
विधायक नमिता मुंडाडा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में सूखा राहत से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होनी थी। इसमें स्थानीय प्रशासन, राजस्व विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।
हालांकि बैठक में तहसीलदार भरत गंगावणे की अनुपस्थिति को लेकर विधायक ने नाराजगी जताई। बताया गया कि इस संबंध में जिला प्रशासन के सामने औपचारिक शिकायत भी रखी गई।
इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की। कलेक्टर विवेक जॉनसन ने तहसीलदार का पदभार वापस लेने का आदेश जारी कर दिया।
सूखे की स्थिति में तहसीलदार की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। तहसील स्तर पर फसल नुकसान का सर्वे, राहत प्रस्ताव, पानी की उपलब्धता, चारा व्यवस्था और प्रभावित गांवों की स्थिति से जुड़े काम राजस्व प्रशासन की निगरानी में होते हैं।
ऐसे समय में अधिकारियों की अनुपस्थिति से राहत कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि प्रशासन ने पहले से सभी राजस्व अधिकारियों को मुख्यालय पर रहने के निर्देश दिए थे।
कलेक्टर के आदेश के बाद अशोक भंडारे को तत्काल अतिरिक्त जिम्मेदारी दे दी गई है। वह राजस्व-2 के नायब तहसीलदार के तौर पर अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों के साथ तहसीलदार के कार्य भी देखेंगे।
प्रशासन की कोशिश है कि पदभार में बदलाव के कारण सूखा राहत से जुड़ा कोई काम प्रभावित न हो। इसलिए नए प्रभारी अधिकारी को तुरंत जिम्मेदारी सौंप दी गई।
कैज तहसील में सूखे की स्थिति को लेकर विभिन्न स्तरों पर समीक्षा की जा रही है। किसानों की फसल स्थिति, पानी की उपलब्धता और राहत कार्यों की प्रगति पर नजर रखी जा रही है।
जिले के कई इलाकों में कम बारिश और जल संकट के कारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ऐसे में जिला प्रशासन लगातार संबंधित विभागों से रिपोर्ट ले रहा है।
राजस्व विभाग को प्रभावित गांवों की स्थिति का आकलन करने और आवश्यकता के अनुसार राहत प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारी गांव स्तर पर मिलने वाली शिकायतों और समस्याओं को भी दर्ज कर रहे हैं।
इस बीच विधायक की समीक्षा बैठक में तहसीलदार की अनुपस्थिति को प्रशासनिक अनुशासन से जोड़कर देखा गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में होने वाली राहत समीक्षा बैठकों में विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति जरूरी मानी जाती है।
प्रशासन का मानना है कि सूखे जैसी गंभीर स्थिति में अधिकारियों के बीच समन्वय और उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। इसी वजह से मुख्यालय नहीं छोड़ने का आदेश जारी किया गया था।
भरत गंगावणे के खिलाफ कार्रवाई के बाद अन्य अधिकारियों को भी स्पष्ट संदेश गया है कि राहत कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला प्रशासन अब यह सुनिश्चित कर रहा है कि सभी तहसीलों में राहत से जुड़े कार्य नियमित रूप से चलते रहें। इसके लिए अधिकारियों को समय-समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने और समीक्षा बैठकों में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
सूखा राहत से जुड़े मामलों में खेतों का निरीक्षण, नुकसान का रिकॉर्ड, पेयजल की समस्या और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक सहायता जैसे विषय प्राथमिकता में रखे गए हैं।
अशोक भंडारे को अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद उनसे भी लंबित कामों की समीक्षा और राहत कार्यों को गति देने की अपेक्षा की जा रही है।
स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों से यह उम्मीद की जा रही है कि वे गंभीर परिस्थितियों में अपने कार्यस्थल पर उपलब्ध रहें और जनप्रतिनिधियों तथा आम लोगों की शिकायतों पर तुरंत प्रतिक्रिया दें।
सूखे की स्थिति में प्रशासन की जिम्मेदारी केवल राहत वितरण तक सीमित नहीं होती, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी भी जरूरी होती है। इसी कारण तहसील स्तर पर नेतृत्व की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।
कलेक्टर के आदेश के बाद अब कैज तहसील के प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी अशोक भंडारे संभालेंगे। वह अगले आदेश तक इस अतिरिक्त पद पर बने रहेंगे।
फिलहाल भरत गंगावणे से पदभार वापस लेने की कार्रवाई ने जिले में प्रशासनिक अनुशासन को लेकर सख्त संदेश दिया है। सूखा राहत की संवेदनशील स्थिति के बीच जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि समीक्षा बैठकों और राहत कार्यों में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।





