महाराष्ट्र

सरकार के प्याज स्टॉक जारी करने के फैसले का असर

Kavita2
28 Aug 2026 2:18 PM IST
सरकार के प्याज स्टॉक जारी करने के फैसले का असर
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नासिक। प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान शहरी ग्राहकों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए कदम का असर अब मंडियों में भी दिखाई देने लगा है। सरकार द्वारा बफर स्टॉक से प्याज जारी करने के फैसले के बाद महाराष्ट्र की प्रमुख लासलगांव मंडी में प्याज की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।

घरेलू बाजारों में प्याज की खुदरा कीमतें 60 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने के बाद सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया था। इसके तहत प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड (पीएसएफ) के तहत खरीदे गए प्याज के स्टॉक में से 840 टन प्याज दिल्ली भेजने का फैसला लिया गया।

बफर स्टॉक से प्याज जारी करने का फैसला

केंद्र सरकार ने प्याज की कीमतों पर नियंत्रण रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से अपने बफर स्टॉक का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया।

सरकार ने नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (NCCF) के माध्यम से प्याज को बाजार में पहुंचाने की योजना बनाई।

इस फैसले का सीधा असर थोक बाजारों पर पड़ा और व्यापारियों में कीमतों को लेकर दबाव देखने को मिला।

लासलगांव मंडी में गिरे भाव

महाराष्ट्र की लासलगांव एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) में सोमवार, 24 अगस्त को प्याज की औसत कीमत 4,251 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई थी।

हालांकि, जैसे ही बफर स्टॉक से प्याज दिल्ली के बाजार में भेजे जाने की खबर सामने आई, बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ गया।

इसके बाद लासलगांव मंडी में प्याज की औसत कीमत में करीब 450 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई।

व्यापारियों में बदली बाजार की धारणा

मंडी कारोबारियों के अनुसार, सरकार के हस्तक्षेप से बाजार में यह संदेश गया कि आने वाले दिनों में प्याज की उपलब्धता बढ़ सकती है।

इस वजह से व्यापारियों ने ऊंची कीमतों पर खरीदारी में सावधानी बरतनी शुरू कर दी।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति बढ़ने पर कीमतों में और स्थिरता आ सकती है।

खुदरा ग्राहकों को राहत की उम्मीद

प्याज की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा था।

घरेलू बाजारों में प्याज के दाम बढ़ने से रसोई का बजट प्रभावित हो रहा था। सरकार के इस कदम से उम्मीद है कि आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में भी प्याज की कीमतों में कमी आ सकती है।

हालांकि, खुदरा कीमतों में गिरावट का असर थोक बाजार की तुलना में कुछ समय बाद दिखाई देता है।

सरकार ने कीमत नियंत्रण के लिए उठाया कदम

केंद्र सरकार समय-समय पर प्याज जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बफर स्टॉक का इस्तेमाल करती रही है।

प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड के तहत प्याज की खरीद कर उसे जरूरत के समय बाजार में उतारा जाता है, ताकि अचानक कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी को नियंत्रित किया जा सके।

इस बार भी बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने इसी व्यवस्था का सहारा लिया।

किसानों और बाजार पर भी असर

जहां उपभोक्ताओं को प्याज की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं किसानों और व्यापारियों की नजर भी बाजार की स्थिति पर बनी हुई है।

किसानों का कहना है कि कीमतों में बहुत ज्यादा गिरावट आने से उन्हें नुकसान हो सकता है।

वहीं व्यापारियों का मानना है कि बाजार में संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसानों को उचित दाम भी मिले और ग्राहकों को राहत भी मिल सके।

आगे कीमतों पर रहेगी नजर

लासलगांव जैसी बड़ी प्याज मंडियों में कीमतों का रुख देशभर के बाजारों को प्रभावित करता है।

सरकार के प्याज जारी करने के फैसले के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में मंडियों और खुदरा बाजारों में कीमतों पर कितना असर पड़ता है।

फिलहाल बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति शुरू होने की खबर ने बाजार में तेजी पर रोक लगाई है और कीमतों में नरमी का संकेत दिया है।

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