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सड़क किनारे मिले घायल कुत्ते ने बदल दी जिंदगी, शरण्या शेट्टी ने शुरू की पशु सेवा की अनोखी यात्रा

नासिक। दो दशक से भी ज्यादा समय पहले शरण्या शेट्टी ने कभी नहीं सोचा था कि वह जानवरों की सेवा के लिए कोई संस्था शुरू करेंगी। उस समय न कोई एनजीओ था, न शेल्टर होम, न एंबुलेंस और न ही कोई बड़ी टीम। बस जानवरों के प्रति गहरा लगाव था और एक ऐसी घटना, जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी।
करीब 21-22 साल पहले शरण्या शेट्टी को सड़क के डिवाइडर से बंधा एक आवारा कुत्ता मिला था। वह बेबस हालत में तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच फंसा हुआ था और किसी भी समय हादसे का शिकार हो सकता था। उस कुत्ते को बचाने की कोशिश ने शरण्या को पशु सेवा के रास्ते पर आगे बढ़ा दिया।
मदद के लिए भटकती रहीं शरण्या
शरण्या शेट्टी ने जब उस कुत्ते को देखा तो उन्होंने उसे बचाने का फैसला किया। उन्होंने आसपास मौजूद लोगों से मदद मांगी, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
कई लोगों से संपर्क करने के बाद भी जब कोई ठोस मदद नहीं मिली तो उन्होंने नगर निगम से संपर्क किया। उन्हें उम्मीद थी कि प्रशासनिक अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे और जानवर की मदद की जाएगी।
लेकिन उस समय पशुओं की देखभाल और बचाव को लेकर व्यवस्थाएं बहुत सीमित थीं। शरण्या को महसूस हुआ कि सड़क पर घायल और बेसहारा जानवरों के लिए एक ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जहां उन्हें समय पर मदद मिल सके।
एक घटना बनी जीवन का मिशन
उस कुत्ते को बचाने का प्रयास शरण्या के लिए सिर्फ एक घटना नहीं थी, बल्कि एक नई सोच की शुरुआत थी।
उन्होंने महसूस किया कि शहरों में बड़ी संख्या में ऐसे जानवर हैं जो बीमारी, दुर्घटना या लोगों की बेरुखी का शिकार होते हैं। कई बार उन्हें सिर्फ इसलिए मदद नहीं मिल पाती क्योंकि उनके लिए कोई संगठित व्यवस्था मौजूद नहीं होती।
यही सोच धीरे-धीरे उनके जीवन का उद्देश्य बन गई और उन्होंने पशुओं के लिए काम करना शुरू किया।
धीरे-धीरे खड़ी की मदद की व्यवस्था
शुरुआत में शरण्या के पास सीमित संसाधन थे। न कोई बड़ा फंड था और न ही कोई बड़ी टीम। उन्होंने अपने स्तर पर घायल और जरूरतमंद जानवरों की मदद करनी शुरू की।
समय के साथ उनके काम से जुड़े लोग बढ़ते गए। पशु प्रेमियों ने उनका साथ देना शुरू किया और धीरे-धीरे एक ऐसी टीम तैयार हुई, जो जरूरतमंद जानवरों तक पहुंचने लगी।
उन्होंने पशुओं के इलाज, बचाव और देखभाल के लिए कई स्तरों पर काम शुरू किया।
जानवरों के लिए बनीं उम्मीद की किरण
आज शरण्या शेट्टी का नाम पशु सेवा से जुड़े कार्यों के लिए जाना जाता है। जिस काम की शुरुआत एक अकेले घायल कुत्ते को बचाने की कोशिश से हुई थी, वह अब बड़े अभियान का रूप ले चुका है।
उनकी पहल ने कई लोगों को प्रेरित किया है कि वे भी बेसहारा जानवरों की मदद के लिए आगे आएं।
समाज में जागरूकता बढ़ाने पर जोर
शरण्या शेट्टी का मानना है कि पशुओं की मदद केवल संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की भूमिका होनी चाहिए।
वह लोगों को जागरूक करने पर भी जोर देती हैं कि सड़क पर घायल या परेशान जानवर दिखे तो उसे नजरअंदाज न करें।
उनके अनुसार, छोटी सी मदद भी किसी जानवर की जिंदगी बचा सकती है।
चुनौतियों के बावजूद जारी है सफर
पशु सेवा का काम आसान नहीं होता। इलाज, देखभाल, संसाधन और लोगों की मानसिकता जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
लेकिन शरण्या ने इन परेशानियों को अपने रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने लगातार प्रयास जारी रखा और पशुओं के लिए बेहतर व्यवस्था बनाने की दिशा में काम किया।
एक कुत्ते से शुरू हुई कहानी बनी प्रेरणा
शरण्या शेट्टी की कहानी यह दिखाती है कि बदलाव की शुरुआत किसी बड़े संसाधन से नहीं, बल्कि संवेदनशील सोच से होती है।
एक सड़क किनारे मिले असहाय कुत्ते ने उनके जीवन का उद्देश्य बदल दिया। आज वही भावना हजारों जरूरतमंद जानवरों के लिए उम्मीद बन चुकी है।
उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि किसी भी जीव के प्रति दया और जिम्मेदारी की भावना समाज में बड़ा बदलाव ला सकती है।





