महाराष्ट्र

गडकरी की मानहानि याचिका पर 5 अगस्त को सुनवाई

Saba Naaz
28 July 2026 8:57 PM IST
गडकरी की मानहानि याचिका पर 5 अगस्त को सुनवाई
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महाराष्ट्र, मुंबई: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की ओर से दायर मानहानि याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट 5 अगस्त को सुनवाई करेगा। यह मामला एथनॉल नीति को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कथित रूप से वायरल किए गए डीपफेक और एआई-जनरेटेड पोस्ट से जुड़ा हुआ है। गडकरी ने मेटा, एक्स कॉर्प, गूगल एलएलसी और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

बॉम्बे हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की पीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए गडकरी के वकील संदीप लड्डा को निर्देश दिया कि वह सभी प्रतिवादियों को दीवानी मुकदमे की प्रति उपलब्ध कराएं। अदालत ने कहा कि इस मामले पर अगली सुनवाई 5 अगस्त को की जाएगी।

गडकरी की याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उनके खिलाफ फर्जी और भ्रामक डीपफेक वीडियो तथा एआई से तैयार पोस्ट अपलोड किए हैं। इन पोस्ट में एथनॉल कार्यक्रम और ई-20 नीति को लेकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि इन कंटेंट में यह आरोप लगाया गया कि गडकरी और उनके परिवार को एथनॉल नीति से आर्थिक लाभ हुआ है।

याचिका के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए ये पोस्ट पूरी तरह झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक हैं। इनका उद्देश्य जनता के बीच गडकरी की छवि को खराब करना और उनके खिलाफ गलत धारणा बनाना है। गडकरी पक्ष ने अदालत से मांग की है कि ऐसे सभी फर्जी कंटेंट को तुरंत हटाने का आदेश दिया जाए और भविष्य में इनके प्रसार पर स्थायी रोक लगाई जाए।

मामले में गडकरी ने कहा है कि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम और ई-20 नीति का संचालन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत आता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई व्यक्तिगत फैसला नहीं था और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्हें इस नीति के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक मुद्दों पर निष्पक्ष बहस और आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन झूठे आरोप और मनगढ़ंत सामग्री फैलाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा से बाहर है। ऐसे कंटेंट से किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत अधिकारों को नुकसान पहुंच सकता है।

गडकरी पक्ष ने अदालत को बताया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वायरल किए गए पोस्ट से उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। इसलिए सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी बनती है कि वह ऐसे फर्जी और आपत्तिजनक कंटेंट के खिलाफ उचित कार्रवाई करें।

इस मामले में मेटा, एक्स और गूगल जैसी बड़ी टेक कंपनियां भी पक्षकार बनाई गई हैं। अदालत अब यह देखेगी कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने और उसके प्रसार को रोकने के लिए क्या निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब डीपफेक और एआई तकनीक के गलत इस्तेमाल को लेकर दुनियाभर में चिंता बढ़ रही है। राजनीतिक नेताओं, सार्वजनिक हस्तियों और आम लोगों की छवि खराब करने के लिए फर्जी वीडियो और डिजिटल कंटेंट के इस्तेमाल के कई मामले सामने आ चुके हैं।

बॉम्बे हाई कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई में यह तय हो सकता है कि सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी क्या होगी और मानहानिकारक डिजिटल सामग्री को रोकने के लिए किस तरह के कदम उठाए जा सकते हैं। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत आगे की कार्रवाई पर फैसला लेगी।

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