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अमीर इलाकों में 75% तो रेड-लाइट एरिया में 92% वोट गडकरी ने बताया चुनावी गणित

नागपुर। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपने चुनावी वोट बैंक को लेकर एक दिलचस्प दावा किया है। नागपुर में आयोजित ‘मीडिया कॉन्क्लेव 2026’ के दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें समाज के अलग-अलग वर्गों से समर्थन मिलता रहा है। गडकरी के मुताबिक, पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से संपन्न माने जाने वाले इलाकों में उन्हें करीब 70 से 75 प्रतिशत वोट मिले, जबकि अपराधियों, अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों और रेड-लाइट इलाके में उनका वोट प्रतिशत लगभग 92 प्रतिशत तक पहुंच गया। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
6 सितंबर को नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने चुनावी राजनीति और मतदाताओं से अपने संबंधों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि वाले मतदाताओं से मिलने वाले समर्थन का जिक्र करते हुए कहा कि उनका प्रयास हमेशा समाज के हर वर्ग तक पहुंचने का रहा है। इसी दौरान उन्होंने विभिन्न इलाकों में मिले वोट प्रतिशत का उदाहरण दिया।
गडकरी ने दावा किया कि शिक्षित और अमीर लोगों की आबादी वाले क्षेत्रों में उन्हें करीब 70 से 75 प्रतिशत तक वोट मिले। इसके उलट उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्र, जिन्हें अपराधियों, अंडरवर्ल्ड या रेड-लाइट इलाके के रूप में जाना जाता है, वहां उन्हें करीब 92 प्रतिशत वोट मिले। केंद्रीय मंत्री ने इस आंकड़े का उल्लेख समाज के विभिन्न वर्गों में अपनी स्वीकार्यता के संदर्भ में किया।
हालांकि, गडकरी ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए यह भी कहा कि ऐसे इलाकों से अधिक वोट मिलने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वह किसी गैर-कानूनी गतिविधि या अपराध का समर्थन करते हैं। उन्होंने इस अंतर को साफ करते हुए बताया कि किसी क्षेत्र के लोगों से चुनावी समर्थन मिलना और वहां होने वाली गैर-कानूनी गतिविधियों का समर्थन करना दो अलग-अलग बातें हैं।
गडकरी के इस बयान का एक प्रमुख पहलू यह रहा कि उन्होंने मतदाताओं को केवल उनकी सामाजिक या आर्थिक स्थिति के आधार पर देखने के बजाय सभी वर्गों तक पहुंच बनाने की बात सामने रखी। उनका कहना था कि राजनीति में लोगों से संवाद और उनके साथ संबंध महत्वपूर्ण हैं। चुनाव में मिलने वाला समर्थन कई कारणों पर निर्भर करता है और इसे किसी व्यक्ति या क्षेत्र की गतिविधियों के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
नागपुर नितिन गडकरी का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। वह लंबे समय से यहां सक्रिय राजनीति करते रहे हैं और लोकसभा में नागपुर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने के बावजूद नागपुर के साथ उनका राजनीतिक जुड़ाव लगातार बना रहा है। ऐसे में अपने निर्वाचन क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में मिले समर्थन को लेकर किया गया उनका दावा चर्चा का विषय बन गया।
मीडिया कॉन्क्लेव में गडकरी ने जिस तरह अलग-अलग इलाकों के वोट प्रतिशत का उल्लेख किया, उसने राजनीतिक समर्थन की प्रकृति को लेकर भी बहस छेड़ दी है। आमतौर पर चुनावी विश्लेषण में जाति, वर्ग, आयु, आय, शिक्षा और क्षेत्र जैसे पहलुओं के आधार पर मतदान के रुझानों को समझने की कोशिश की जाती है। लेकिन गडकरी ने अपने बयान में समाज के ऐसे तबकों और क्षेत्रों का उल्लेख किया, जिनकी चर्चा चुनावी मंचों पर इस तरह कम ही देखने को मिलती है।
केंद्रीय मंत्री का जोर इस बात पर रहा कि किसी नेता को मिलने वाले वोट को मतदाता की पूरी जीवनशैली या गतिविधियों से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक उम्मीदवार को उसके काम, व्यक्तिगत संपर्क, विकास के मुद्दों या अन्य कारणों से समर्थन दे सकता है। ऐसे में किसी खास इलाके से भारी समर्थन मिलने का अर्थ वहां होने वाली प्रत्येक गतिविधि को राजनीतिक स्वीकृति देना नहीं है।
गडकरी अपने बयानों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में बेबाक अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं। वह कई मौकों पर चुनावी राजनीति, विकास, प्रशासन और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अपने अनुभव साझा करते रहे हैं। नागपुर के कार्यक्रम में दिया गया उनका ताजा बयान भी इसी शैली में सामने आया, जिसमें उन्होंने अपने चुनावी अनुभव के जरिए समाज के अलग-अलग वर्गों से मिले समर्थन की चर्चा की।
इस बयान का राजनीतिक अर्थ भी निकाला जा रहा है। किसी नेता के लिए अलग-अलग आर्थिक और सामाजिक वर्गों में स्वीकार्यता चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। गडकरी ने अपने दावे के जरिए यह बताने की कोशिश की कि उनका समर्थन केवल संपन्न या शिक्षित मतदाताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के दूसरे हिस्सों में भी उन्हें बड़ी संख्या में वोट मिले हैं।
हालांकि, अपराध और रेड-लाइट इलाकों का स्पष्ट उल्लेख होने के कारण उनका बयान सामान्य चुनावी आंकड़ों की चर्चा से अलग दिखाई देता है। यही वजह है कि उनके कथन ने लोगों का ध्यान खींचा है। गडकरी ने साथ ही यह सफाई देकर किसी संभावित गलत अर्थ को दूर करने की कोशिश की कि अपराध प्रभावित क्षेत्रों से समर्थन मिलने का मतलब अपराध या गैर-कानूनी गतिविधियों के प्रति समर्थन नहीं है।
कुल मिलाकर नागपुर के ‘मीडिया कॉन्क्लेव 2026’ में नितिन गडकरी ने अपने चुनावी समर्थन को लेकर ऐसा दावा किया, जिसने वोट बैंक की राजनीति पर नई चर्चा शुरू कर दी है। पढ़े-लिखे और अमीर इलाकों में 70-75 प्रतिशत और अपराध, अंडरवर्ल्ड तथा रेड-लाइट क्षेत्र में करीब 92 प्रतिशत वोट मिलने के उनके दावे ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। साथ ही उन्होंने साफ किया कि समाज के किसी वर्ग से राजनीतिक समर्थन हासिल करना उसकी गैर-कानूनी गतिविधियों का समर्थन करना नहीं माना जाना चाहिए।





