- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- रश्मि शुक्ला की...
महाराष्ट्र
रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट पर पूर्व एडीजी पी.के. जैन का बयान, बोले
SHIDDHANT
10 Jan 2026 9:49 PM IST

x
Maharashtra महाराष्ट्र: पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रश्मि शुक्ला द्वारा सरकार को सौंपी गई कथित रिपोर्ट को लेकर अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इस संदर्भ में पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) पी.के. जैन ने अहम बयान देते हुए कहा कि यदि रश्मि शुक्ला ने सरकार को कोई रिपोर्ट सौंपी है, तो उसके पीछे निश्चित रूप से ठोस कारण रहे होंगे। पूर्व एडीजी पी.के. जैन ने कहा, “रश्मि शुक्ला एक वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी रही हैं। अगर उन्होंने सरकार को कोई रिपोर्ट दी है, तो उन्होंने उसमें कुछ तथ्य जरूर रखे होंगे। ऐसे मामलों में केवल मौखिक बातें नहीं होतीं, बल्कि दस्तावेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत किए जाते हैं।”
उन्होंने कहा कि किसी भी पूर्व डीजीपी द्वारा सरकार को रिपोर्ट देना एक गंभीर और जिम्मेदारी भरा कदम होता है। ऐसा अधिकारी बिना ठोस आधार और प्रमाण के कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करता। पी.के. जैन के अनुसार, रश्मि शुक्ला ने अपनी रिपोर्ट में निश्चित रूप से ऐसे तथ्य और दस्तावेज शामिल किए होंगे, जिन्हें वह महत्वपूर्ण मानती थीं। पूर्व एडीजी ने यह भी कहा कि पुलिस प्रशासन में उच्च पदों पर रहे अधिकारियों का दायित्व केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं होता, बल्कि सरकार को सही और तथ्यपरक जानकारी उपलब्ध कराना भी होता है। यदि किसी मुद्दे पर उन्हें लगता है कि सरकार को अवगत कराना आवश्यक है, तो वे रिपोर्ट के माध्यम से ऐसा करते हैं।
उन्होंने कहा कि रश्मि शुक्ला की छवि एक कर्तव्यनिष्ठ और पेशेवर अधिकारी की रही है। ऐसे में यह मानना स्वाभाविक है कि उनकी रिपोर्ट पूरी तैयारी और जांच-पड़ताल के बाद ही सौंपी गई होगी। पी.के. जैन ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी रिपोर्ट की सत्यता और निष्कर्षों का मूल्यांकन सरकार और संबंधित एजेंसियों द्वारा किया जाना चाहिए। पूर्व एडीजी के अनुसार, रिपोर्ट सामने आने के बाद सरकार को निष्पक्ष तरीके से उसका अध्ययन करना चाहिए और यदि उसमें किसी प्रकार की अनियमितता या गंभीर मुद्दे उजागर होते हैं, तो उस पर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है।
पी.के. जैन ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए। किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट को केवल राजनीतिक चश्मे से देखना उचित नहीं है। तथ्यों और सबूतों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाले जाने चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पुलिस और सरकार के बीच संवाद और विश्वास का रिश्ता बना रहना चाहिए। जब भी कोई वरिष्ठ अधिकारी किसी मुद्दे को गंभीर मानते हुए रिपोर्ट देता है, तो उसका उद्देश्य व्यवस्था को मजबूत करना होता है, न कि किसी को बदनाम करना।
गौरतलब है कि रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट को लेकर पहले से ही राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है। अब पूर्व एडीजी पी.के. जैन के इस बयान के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से इस रिपोर्ट पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
Tagsमुंबईमहाराष्ट्रपी.के. जैनपूर्व एडीजीरश्मि शुक्लापूर्व डीजीपीरिपोर्टसरकारदस्तावेजी सबूतप्रशासनपुलिसजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi news
Next Story





