महाराष्ट्र

मुंबई में फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार, CSR फंड से 10 करोड़ की ठगी का आरोप

Kavita2
13 July 2026 10:14 AM IST
मुंबई में फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार, CSR फंड से 10 करोड़ की ठगी का आरोप
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Mumbai मुंबई: क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे कथित फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार किया है, जो करीब 28 वर्षों से मेडिकल प्रैक्टिशनर के रूप में काम कर रहा था। आरोपी पर आरोप है कि उसने फर्जी दस्तावेजों और नकली पहचान का इस्तेमाल कर पिछले तीन वर्षों में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड से करीब 10 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी की।

मुंबई क्राइम ब्रांच की डिटेक्शन यूनिट ने विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर यह कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, आरोपी लंबे समय से लोगों को डॉक्टर बताकर इलाज कर रहा था और अब उस पर वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं।

पुलिस ने आरोपी के ठिकाने पर तलाशी अभियान चलाया, जहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसियों को तलाशी के दौरान महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों से जुड़े लोगों और कंपनियों के दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा कई प्रोजेक्ट रिपोर्ट, रिकॉर्ड और अन्य कागजात भी बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों से संकेत मिल रहे हैं कि कथित धोखाधड़ी का नेटवर्क केवल मुंबई या महाराष्ट्र तक सीमित नहीं हो सकता है, बल्कि इसके तार कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं।

प्रारंभिक जांच में पुलिस को संदेह है कि आरोपी ने फर्जी पहचान और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर विभिन्न कंपनियों से CSR फंड हासिल किया। कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR के तहत बड़ी कंपनियां सामाजिक कार्यों, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य जनहित से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए धनराशि उपलब्ध कराती हैं।

आरोप है कि आरोपी ने इन्हीं फंड का गलत तरीके से इस्तेमाल किया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने किन-किन कंपनियों से संपर्क किया, कितनी राशि हासिल की और उस पैसे का उपयोग कहां किया गया।

जांच एजेंसियां आरोपी के बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और उससे जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही हैं। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस पूरे मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने आरोपी की मदद की।

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मेडिकल क्षेत्र में भी सवाल उठने लगे हैं कि बिना वैध प्रमाण-पत्रों के कोई व्यक्ति इतने लंबे समय तक चिकित्सा सेवा कैसे देता रहा। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी के पास मेडिकल प्रैक्टिस करने की कोई वास्तविक योग्यता थी या नहीं।

क्राइम ब्रांच अधिकारियों के अनुसार, जांच अभी शुरुआती चरण में है और आगे कई नए खुलासे हो सकते हैं। पुलिस बरामद दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि कथित फर्जीवाड़े का पूरा नेटवर्क सामने आ सके।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। पुलिस संबंधित कंपनियों और संस्थाओं से भी संपर्क कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि CSR फंड के नाम पर कितनी राशि जारी की गई और उसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि CSR फंड का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों और जनहित से जुड़े कार्यों को सहायता देना होता है। ऐसे फंड में धोखाधड़ी होने से न केवल कंपनियों को आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि उन लोगों को भी नुकसान पहुंचता है, जिनके लिए यह राशि निर्धारित की जाती है।

मुंबई क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई को फर्जी दस्तावेजों और वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

फिलहाल आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कथित धोखाधड़ी कितने बड़े स्तर पर फैली थी और इसमें कितने लोग शामिल थे।

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