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महाराष्ट्र में प्याज खरीद की जांच के लिए समिति गठित, नासिक कलेक्टर आयुष प्रसाद करेंगे अध्यक्षता

Kavita2
1 Oct 2026 11:57 AM IST
महाराष्ट्र में प्याज खरीद की जांच के लिए समिति गठित, नासिक कलेक्टर आयुष प्रसाद करेंगे अध्यक्षता
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नासिक। महाराष्ट्र में 2026-27 सीजन के लिए प्याज खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और कुप्रबंधन की शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने जांच समिति गठित कर दी है। यह समिति नासिक जिला कलेक्टर आयुष प्रसाद की अध्यक्षता में काम करेगी। महाराष्ट्र सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने 29 सितंबर 2026 को इस संबंध में सरकारी आदेश जारी किया है।

प्याज की यह खरीद केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड यानी PSF योजना के तहत की जा रही है। इसके लिए नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी NAFED और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी NCCF को केंद्रीय नोडल एजेंसियों के रूप में जिम्मेदारी दी गई है।

राज्य सरकार को इस खरीद प्रक्रिया को लेकर जनप्रतिनिधियों, प्याज उत्पादक किसानों और किसान उत्पादक संगठनों की ओर से कई शिकायतें मिली थीं। इनमें खरीद के दौरान कथित अनियमितता, प्रक्रिया में खामियां और कुप्रबंधन जैसे आरोप शामिल हैं। इन्हीं शिकायतों की तथ्यात्मक जांच के लिए समिति गठित की गई है।

जांच समिति में नासिक जिला कलेक्टर आयुष प्रसाद के अलावा संबंधित उपविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, कलेक्टर द्वारा नामित एक प्रतिनिधि और नासिक के जिला उपनिबंधक, सहकारी संस्थाएं शामिल होंगे। जिला उपनिबंधक समिति के सदस्य सचिव की जिम्मेदारी निभाएंगे।

समिति का काम केवल शिकायतों को दर्ज करना ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े दस्तावेजों और सबूतों की भी जांच करना होगा। सरकार ने प्याज उत्पादक किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, व्यापारियों और अन्य संबंधित लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास खरीद प्रक्रिया में किसी तरह की कथित अनियमितता या गड़बड़ी से जुड़ी जानकारी है तो वे लिखित शिकायत दर्ज कराएं।

शिकायतें नासिक के जिला उपनिबंधक, सहकारी संस्थाएं कार्यालय में जमा की जा सकती हैं। संबंधित पक्षों को इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। साथ ही शिकायत के समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज, रिकॉर्ड और अन्य सबूत भी जमा करने को कहा गया है, ताकि समिति जांच को केवल आरोपों के आधार पर नहीं बल्कि तथ्यों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर आगे बढ़ा सके।

जिला कलेक्टर आयुष प्रसाद ने भी किसानों और अन्य संबंधित पक्षों से इस अवसर का इस्तेमाल करने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि जिन लोगों के पास प्याज खरीद प्रक्रिया से संबंधित कोई जानकारी या प्रमाण हैं, वे निर्धारित समय सीमा के भीतर समिति के सामने रखें।

जांच समिति को खरीद प्रक्रिया के दौरान अपनाई गई पूरी व्यवस्था की समीक्षा करनी होगी। इसमें यह देखा जाएगा कि खरीद तय नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुसार हुई या नहीं। इसके साथ ही किसानों से वास्तविक खरीद, संबंधित एजेंसियों की भूमिका और रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी का भी मिलान किया जा सकता है।

कुछ किसान संगठनों की ओर से खरीद प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें कथित रूप से वास्तविक किसानों के बजाय व्यापारियों से माल खरीदने और रिकॉर्ड में दूसरे नाम दर्ज किए जाने जैसे आरोप भी शामिल हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी। समिति का गठन इन्हीं दावों और शिकायतों की निष्पक्ष जांच के लिए किया गया है।

प्याज महाराष्ट्र की प्रमुख कृषि उपज में शामिल है और नासिक देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। प्याज के दाम में तेज उतार-चढ़ाव का असर सीधे किसानों और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ता है। इसी वजह से केंद्र सरकार प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड के तहत प्याज की खरीद करती है।

PSF योजना का उद्देश्य बाजार में जरूरत के समय बफर स्टॉक तैयार करना और कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है। इसके तहत केंद्रीय एजेंसियां किसानों और अन्य अधिकृत माध्यमों से प्याज खरीदती हैं और जरूरत पड़ने पर बाजार में इसकी आपूर्ति करती हैं।

ऐसे में खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि वास्तविक किसान तक योजना का लाभ नहीं पहुंचता या खरीद में नियमों का पालन नहीं होता तो योजना का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। इसी कारण महाराष्ट्र सरकार ने शिकायतों को देखते हुए जांच शुरू की है।

समिति कथित कुप्रबंधन और प्रक्रियागत खामियों की भी जांच करेगी। इसमें यह देखा जा सकता है कि खरीद केंद्रों पर किसानों का पंजीकरण कैसे किया गया, खरीद किससे की गई, भुगतान की प्रक्रिया क्या रही और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा वास्तविक खरीद से मेल खाती है या नहीं।

सरकारी आदेश के अनुसार समिति को अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद रिपोर्ट में सामने आने वाले निष्कर्षों के आधार पर प्रशासनिक या अन्य जरूरी कार्रवाई पर फैसला किया जा सकता है।

प्याज उत्पादक किसानों के लिए यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय से खरीद व्यवस्था, बाजार मूल्य और सरकारी एजेंसियों की प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। इस बार राज्य सरकार ने सीधे जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति बनाकर शिकायतों की जांच कराने का फैसला किया है।

समिति के सामने अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी विभिन्न पक्षों से आने वाली शिकायतों और दस्तावेजों का निष्पक्ष सत्यापन करना है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि NAFED और NCCF के माध्यम से की गई 2026-27 सीजन की प्याज खरीद में वास्तव में कोई अनियमितता हुई या शिकायतें प्रक्रियागत भ्रम तक सीमित थीं।

फिलहाल सरकार ने किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, व्यापारियों और अन्य संबंधित लोगों से सामने आने और उपलब्ध प्रमाण जमा करने को कहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि प्याज खरीद प्रक्रिया में किसी स्तर पर जवाबदेही तय करने या सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है या नहीं।

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