- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- महाराष्ट्र में जल संकट...
महाराष्ट्र में जल संकट को लेकर HVP की मांग, अगले साल IPL मैच रद्द करने का सुझाव

मुंबई। महाराष्ट्र में गंभीर सूखे और जल संकट की आशंका के बीच हिंदू विधिज्ञ परिषद (HVP) ने राज्य सरकार से पानी बचाने के लिए अभी से कड़े कदम उठाने की मांग की है। परिषद ने सरकार को कई सुझाव दिए हैं, जिनमें अगले साल महाराष्ट्र में होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग यानी IPL के मैचों को रद्द करना और शराब तथा बेवरेज उद्योगों में पानी के इस्तेमाल पर सख्त सीमा लगाना शामिल है।
महाराष्ट्र के बड़े हिस्से में इस वर्ष कम बारिश के कारण पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। राज्य सरकार ने 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है और जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए विभिन्न स्तरों पर कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य के कई क्षेत्रों में बारिश की कमी के साथ किसानों और ग्रामीण इलाकों में पानी तथा चारे की उपलब्धता एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है।
इसी स्थिति को देखते हुए हिंदू विधिज्ञ परिषद ने सरकार से कहा है कि आने वाले महीनों में जल संकट और गंभीर हो सकता है, इसलिए पानी के गैर-जरूरी इस्तेमाल को कम करने के लिए पहले से योजना बनाई जानी चाहिए। संगठन का कहना है कि उपलब्ध पानी को सबसे पहले आम लोगों की पीने की जरूरतों, खेती और पशुओं के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
HVP ने अपने सुझावों में IPL मैचों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। परिषद का तर्क है कि क्रिकेट स्टेडियमों में मैदान और पिच के रखरखाव के लिए बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। यदि राज्य को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है तो अगले साल महाराष्ट्र में IPL मैचों के आयोजन पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
संगठन का कहना है कि सूखे के दौरान खेल प्रतियोगिताओं के लिए बड़ी मात्रा में पानी इस्तेमाल करने के बजाय इसे पीने और दूसरी जरूरी आवश्यकताओं के लिए बचाया जाना चाहिए। इसी आधार पर अगले IPL सीजन के दौरान महाराष्ट्र में प्रस्तावित मुकाबलों को रद्द करने या राज्य के बाहर स्थानांतरित करने की मांग की गई है। हालांकि इस सुझाव पर राज्य सरकार या क्रिकेट से जुड़े संगठनों की ओर से किसी फैसले की जानकारी सामने नहीं आई है।
परिषद ने औद्योगिक स्तर पर पानी की खपत को लेकर भी सवाल उठाए हैं। विशेष रूप से शराब और अन्य पेय पदार्थ बनाने वाली इकाइयों में इस्तेमाल होने वाले पानी के लिए सख्त सीमा तय करने की मांग की गई है। HVP का कहना है कि जब ग्रामीण इलाकों में लोगों को पीने के पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा हो, तब उद्योगों को उपलब्ध कराए जाने वाले पानी की मात्रा की समीक्षा की जानी चाहिए।
महाराष्ट्र सरकार भी संभावित जल संकट को देखते हुए पानी के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के विकल्पों पर विचार कर रही है। शहरी इलाकों में पानी की आपूर्ति में लगभग 10 प्रतिशत कटौती जैसे प्रस्तावों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा सूखा प्रभावित क्षेत्रों के बांधों के पानी को अगले वर्ष अगस्त तक पीने की जरूरतों के लिए सुरक्षित रखने की दिशा में भी तैयारी की जा रही है।
मुंबई में भी पानी की उपलब्धता पर निगरानी बढ़ाई गई है। शहर को पानी उपलब्ध कराने वाली सात झीलों में मौजूद जल भंडार और अगले मानसून तक उसकी पर्याप्तता को लेकर प्रशासन सतर्क है। कम बारिश के कारण आने वाले गर्मी के मौसम में पानी की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
HVP ने इसी पृष्ठभूमि में सरकार से जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की है। परिषद का कहना है कि पानी की कमी गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय अभी से ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जानी चाहिए, जहां पानी की खपत कम की जा सकती है।
संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि सरकार उद्योगों के पानी इस्तेमाल का अलग-अलग आकलन करे। जिन उद्योगों में पानी की खपत अधिक होती है, उनके लिए स्पष्ट सीमा निर्धारित की जाए। साथ ही यह देखा जाए कि उत्पादन प्रक्रिया में पानी को दोबारा इस्तेमाल करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
जल संकट का सबसे बड़ा असर ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में देखने को मिलता है। पानी की कमी से जहां फसलों की सिंचाई प्रभावित होती है, वहीं पशुओं के लिए चारा और पानी जुटाना भी मुश्किल हो जाता है। कई इलाकों में बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का आकलन और राहत संबंधी प्रक्रिया भी शुरू की है।
HVP का कहना है कि अगले मानसून तक उपलब्ध पानी का इस्तेमाल बेहद सावधानी से करने की जरूरत है। संगठन के अनुसार अगर अभी से पानी बचाने के उपाय नहीं किए गए तो गर्मी बढ़ने के साथ स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
परिषद की मांगों में IPL मैचों को रद्द करना सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन सकता है। महाराष्ट्र में मुंबई सहित कई शहर क्रिकेट के बड़े मुकाबलों की मेजबानी करते हैं। ऐसे में यदि सरकार इस प्रस्ताव पर विचार करती है तो खेल आयोजन, स्टेडियम प्रबंधन और जल उपयोग के बीच संतुलन का सवाल भी सामने आएगा।
फिलहाल यह HVP की ओर से सरकार को दिया गया सुझाव है और IPL मैच रद्द करने का कोई सरकारी निर्णय सामने नहीं आया है। इसी तरह शराब और बेवरेज उद्योगों के पानी इस्तेमाल पर नई सीमा लागू करने की भी अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
महाराष्ट्र में मौजूदा जल स्थिति को देखते हुए सरकार के सामने आने वाले महीनों के लिए पानी का संतुलित वितरण बड़ी चुनौती है। एक तरफ लोगों की पीने के पानी की जरूरत है तो दूसरी ओर खेती, उद्योग और शहरी क्षेत्रों की मांग भी बनी हुई है। इसी बीच हिंदू विधिज्ञ परिषद ने IPL जैसे आयोजनों और पानी की अधिक खपत वाले उद्योगों पर नियंत्रण लगाने की मांग कर जल संरक्षण से जुड़ी बहस को आगे बढ़ा दिया है।





