महाराष्ट्र

ब्लिंकिट पर बड़ा एक्शन, 33 लाख का एक्सपायर्ड माल मिलने पर यूनिट सस्पेंड

Rajeshwari Nishad
24 Oct 2026 12:10 AM IST
ब्लिंकिट पर बड़ा एक्शन, 33 लाख का एक्सपायर्ड माल मिलने पर यूनिट सस्पेंड
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मुंबई। महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने ऑनलाइन ग्रॉसरी डिलीवरी कंपनी ब्लिंकिट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने ठाणे जिले के भिवंडी स्थित कंपनी के वेयरहाउस का फूड बिजनेस लाइसेंस निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई 21 अक्टूबर 2026 को हुई जांच के बाद की गई, जिसमें करीब 18,405 एक्सपायर्ड, क्षतिग्रस्त और रिजेक्टेड खाद्य उत्पादों का संतोषजनक रिकॉर्ड नहीं मिला। इन उत्पादों की कीमत 32.71 लाख रुपये से अधिक बताई गई है।
एफडीए के अनुसार, कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि बिक्री के योग्य नहीं रहे इन खाद्य पदार्थों को नियमों के अनुसार सुरक्षित तरीके से नष्ट किया गया था। विभाग ने इसे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए संबंधित परिसर में लाइसेंस के तहत होने वाली खाद्य कारोबारी गतिविधियों को तत्काल रोकने का आदेश दिया है। साथ ही कंपनी के अधिकारियों और खाद्य सामग्री के निपटान से जुड़े विक्रेताओं के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है।
21 अक्टूबर को वेयरहाउस में हुई थी छापेमारी
जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने 21 अक्टूबर को भिवंडी स्थित ब्लिंकिट के वेयरहाउस का निरीक्षण किया था।जांच का उद्देश्य खाद्य पदार्थों के भंडारण, वितरण और एक्सपायर्ड सामान के निपटान से संबंधित नियमों के पालन की स्थिति का पता लगाना था।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने खाद्य उत्पादों का रिकॉर्ड मांगा।जांच में सामने आया कि लगभग 18,405 ऐसे खाद्य उत्पादों के संबंध में पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिन्हें एक्सपायर्ड, क्षतिग्रस्त या रिजेक्टेड श्रेणी में रखा गया था।इन वस्तुओं का कुल मूल्य 32.71 लाख रुपये से अधिक बताया गया।
एक्सपायर सामान को नष्ट करने का रिकॉर्ड नहीं मिला
एफडीए अधिकारियों के अनुसार, खाद्य पदार्थों के निपटान की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।कंपनी से यह जानकारी मांगी गई थी कि बिक्री के योग्य नहीं रहे उत्पाद कब, कहां और किस प्रक्रिया के तहत नष्ट किए गए।इसके अलावा यह भी पूछा गया कि संबंधित सामग्री किस एजेंसी को सौंपी गई थी।विभाग का आरोप है कि कंपनी इन उत्पादों की पूरी ट्रेसबिलिटी यानी आवाजाही और अंतिम निपटान का सत्यापित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करा सकी।ऐसी स्थिति में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि संबंधित खाद्य उत्पादों का वास्तव में क्या हुआ।अधिकारियों ने आशंका जताई कि इस तरह की सामग्री दोबारा बाजार में पहुंच सकती है।हालांकि, इस विशेष स्टॉक की वास्तविक पुनर्बिक्री हुई थी या नहीं, यह जांच का विषय है।
32.71 लाख रुपये के सामान को लेकर सवाल
भिवंडी स्थित वेयरहाउस में जिन उत्पादों का हिसाब नहीं मिला, उनकी कीमत 32 लाख 71 हजार रुपये से अधिक बताई गई है।एफडीए का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड और रिजेक्टेड खाद्य सामग्री का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होना गंभीर लापरवाही का संकेत है।खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, बिक्री के लिए अनुपयुक्त उत्पादों की पहचान करना और उन्हें नियमित स्टॉक से अलग रखना महत्वपूर्ण होता है।इनका सुरक्षित निपटान सुनिश्चित करना भी संबंधित खाद्य कारोबारी की जिम्मेदारी है।यदि ऐसी सामग्री दोबारा आपूर्ति व्यवस्था में पहुंचती है, तो उपभोक्ताओं को खराब या असुरक्षित खाद्य पदार्थ मिलने का खतरा पैदा हो सकता है।
तत्काल प्रभाव से फूड लाइसेंस निलंबित
निरीक्षण के बाद एफडीए ने ब्लिंक कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड के भिवंडी परिसर का खाद्य व्यवसाय लाइसेंस निलंबित कर दिया।विभाग ने संबंधित परिसर में लाइसेंस के तहत संचालित खाद्य कारोबार को तत्काल बंद करने का आदेश दिया है।अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई है।हालांकि, यह निलंबन भिवंडी के संबंधित परिसर से जुड़ा है। इससे पूरे देश में ब्लिंकिट की सभी सेवाओं का लाइसेंस निलंबित होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
कंपनी अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज
लाइसेंस निलंबित करने के साथ एफडीए ने भिवंडी तालुका पुलिस थाने में प्राथमिकी भी दर्ज कराई है।इसमें कंपनी के एक पूर्णकालिक निदेशक, वेयरहाउस प्रबंधकों और स्क्रैप डिस्पोजल से जुड़े कई विक्रेताओं को आरोपी बनाया गया है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ व्यक्तियों ने आर्थिक लाभ के उद्देश्य से एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थों को नष्ट करने के बजाय दोबारा बेचने की साजिश रची।आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं तथा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 59(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है।हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। आरोपों की वास्तविकता जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।
एक्सपायर्ड सामान दोबारा बाजार में पहुंचने की आशंकाएफडीए की जांच केवल एक वेयरहाउस तक सीमित नहीं है।विभाग पिछले कुछ समय से ऐसे नेटवर्क की जांच कर रहा है, जिन पर एक्सपायर्ड, खराब और ग्राहकों द्वारा लौटाए गए खाद्य पदार्थों को दोबारा बाजार में बेचने का संदेह है।अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में कंपनियों से नष्ट करने के लिए भेजी गई खाद्य सामग्री कथित तौर पर बिचौलियों और स्थानीय व्यापारियों तक पहुंच रही थी।इन उत्पादों को छांटकर ऐसे पैकेट अलग किए जाने का आरोप है, जो बाहर से ठीक दिखाई देते थे।इसके बाद उन्हें कम कीमत पर बेचने की कोशिश किए जाने की आशंका जताई गई है।जांच एजेंसियां संबंधित एजेंसियों और कारोबारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
पहले भी पांच वेयरहाउस पर हुई कार्रवाई
महाराष्ट्र एफडीए ने अक्टूबर महीने में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर कई कंपनियों के वेयरहाउस पर कार्रवाई की थी।14 और 15 अक्टूबर को ठाणे तथा पुणे जिलों में चलाए गए अभियान में रिलायंस से जुड़े प्रतिष्ठानों, जोमैटो हाइपरप्योर और ब्लिंकिट के परिसरों की जांच की गई थी।इस दौरान लगभग 8,392 किलोग्राम खाद्य सामग्री जब्त की गई, जिसकी कीमत 48.08 लाख रुपये से अधिक बताई गई।विभाग ने पांच प्रतिष्ठानों के फूड लाइसेंस निलंबित किए थे।जांच में खराब भंडारण व्यवस्था, एक्सपायर्ड सामान के निपटान संबंधी रिकॉर्ड की कमी और अन्य खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों की जानकारी सामने आई थी।
डिस्पोजल एजेंसियों की भूमिका की जांच
इस पूरे मामले में खाद्य पदार्थों का निपटान करने वाली एजेंसियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।जांच अधिकारियों को संदेह है कि कुछ एजेंसियों ने उत्पाद नष्ट किए जाने से संबंधित दस्तावेज जारी किए, लेकिन वास्तविक निपटान का पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं था।ऐसी आशंका भी जताई गई है कि खराब खाद्य सामग्री को अवैध छंटाई केंद्रों और बिचौलियों के माध्यम से बाजार तक पहुंचाया गया।एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में विभाग खाद्य आपूर्ति और कचरा निपटान से जुड़े नेटवर्क की निगरानी बढ़ा रहा है।जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खराब और एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद किसी भी स्थिति में उपभोक्ताओं तक न पहुंचें।
उपभोक्ताओं की सेहत से जुड़ा गंभीर मामला
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सपायरी डेट पार कर चुके उत्पादों का इस्तेमाल जोखिमपूर्ण हो सकता है।विशेष रूप से डेयरी उत्पाद, तैयार भोजन और उचित तापमान पर रखे जाने वाले खाद्य पदार्थों के मामले में भंडारण की स्थिति महत्वपूर्ण होती है।उपभोक्ताओं को ऑनलाइन या ऑफलाइन खरीदे गए खाद्य उत्पादों पर एक्सपायरी डेट, पैकेट की स्थिति और भंडारण संबंधी निर्देश जांचने चाहिए।यदि कोई उत्पाद खराब, रिसाव वाला या संदिग्ध दिखाई दे, तो उसका सेवन नहीं करना चाहिए।ऐसी शिकायतें संबंधित कंपनी या खाद्य सुरक्षा विभाग को दी जा सकती हैं।
आगे की जांच पर टिकी निगाहें
भिवंडी वेयरहाउस के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद अब एफडीए की जांच और पुलिस की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि 18,405 उत्पादों का अंतिम निपटान कहां हुआ और संबंधित एजेंसियों की क्या भूमिका रही।साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या इन उत्पादों का कोई हिस्सा वास्तव में दोबारा बाजार में पहुंचा था।
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