महाराष्ट्र

स्वास्थ्य योजनाओं में ₹1.79 करोड़ घोटाले का आरोप, FIR दर्ज

Kavita2
1 Aug 2026 10:51 AM IST
स्वास्थ्य योजनाओं में ₹1.79 करोड़ घोटाले का आरोप, FIR दर्ज
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मुंबई। वर्ली पुलिस ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना (MJPJAY) से कथित तौर पर 1.79 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि कुछ लोगों ने ऐसे मरीजों के नाम पर फर्जी इंश्योरेंस क्लेम जमा किए, जिनका वास्तव में कभी इलाज ही नहीं हुआ था।

पुलिस के अनुसार, यह मामला सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मिलने वाली चिकित्सा सहायता राशि के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी दावों को तैयार करने और उन्हें मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इन योजनाओं के तहत पात्र लाभार्थियों को अस्पतालों में इलाज की सुविधा दी जाती है और सरकार की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अस्पतालों को भुगतान किया जाता है।

आरोप है कि इसी व्यवस्था का गलत फायदा उठाकर कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेजों और गलत जानकारी के आधार पर बीमा दावे प्रस्तुत किए। बताया जा रहा है कि इन दावों में ऐसे मरीजों को दिखाया गया, जिनका अस्पताल में इलाज हुआ ही नहीं था। इसके बावजूद उनके नाम पर चिकित्सा खर्च के रूप में राशि प्राप्त करने का प्रयास किया गया।

मामले की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों की ओर से जांच की गई। जांच में कथित अनियमितताओं का पता चलने के बाद वर्ली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई। इसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होने के बाद अब सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इसमें मरीजों के रिकॉर्ड, अस्पतालों से जुड़े दस्तावेज, क्लेम आवेदन, भुगतान संबंधी जानकारी और अन्य प्रमाणों की पड़ताल की जाएगी।

जांच का एक अहम हिस्सा यह भी होगा कि फर्जी क्लेम तैयार करने में किन लोगों की भूमिका रही। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इसमें अस्पताल प्रबंधन, एजेंट, दस्तावेज तैयार करने वाले लोग या किसी अन्य व्यक्ति की मिलीभगत थी।

अधिकारियों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में किसी भी तरह की धोखाधड़ी को गंभीरता से लिया जाता है, क्योंकि इससे वास्तविक जरूरतमंद मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ सकता है। योजनाओं का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े अधिकारियों ने पहले भी कई बार चेतावनी दी है कि फर्जी दस्तावेजों या गलत दावों के माध्यम से सरकारी सहायता राशि लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में पुलिस अब आरोपों की पुष्टि के लिए विस्तृत जांच कर रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आयुष्मान भारत और MJPJAY जैसी योजनाएं लाखों लोगों को इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में इन योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है, ताकि सरकारी धन का सही इस्तेमाल हो सके।

वर्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के बाद अब सभी की नजर जांच की प्रगति पर है। पुलिस यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि यदि धोखाधड़ी हुई है तो इसमें शामिल सभी जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

फिलहाल मामले में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस दस्तावेजों और अन्य सबूतों की जांच कर रही है। आने वाले समय में जांच के आधार पर और जानकारी सामने आने की संभावना है।

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