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दशकों पुराने जमीन विवाद में पीएम मोदी से मिले 81 वर्षीय सहपाठी, CBI जांच की मांग

मुंबई : मीरा रोड निवासी 81 वर्षीय असगरअली वोहरा ने दशकों से चले आ रहे एक जमीन विवाद में न्याय दिलाने और मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद मांगी है। वोहरा का कहना है कि वह गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में प्रधानमंत्री मोदी के साथ पढ़ चुके हैं। उन्होंने आठ सितंबर को प्रधानमंत्री से मुलाकात कर जमीन विवाद से जुड़ी अपनी समस्या उनके सामने रखी और हस्तक्षेप की मांग की।
असगरअली वोहरा के अनुसार, जमीन से जुड़ा उनका विवाद कई दशकों से चल रहा है। लंबे समय से न्याय पाने के लिए प्रयास करने के बावजूद उन्हें अब तक अपेक्षित राहत नहीं मिली है। इसी कारण उन्होंने मामले को प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का फैसला किया। वोहरा चाहते हैं कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई से कराई जाए, ताकि विवाद से जुड़े सभी तथ्य सामने आ सकें।
आठ सितंबर को हुई मुलाकात में वोहरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने विवाद से संबंधित परिस्थितियों और लंबे समय से चल रहे संघर्ष के बारे में जानकारी दी। वोहरा का दावा है कि प्रधानमंत्री की ओर से उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इसके बाद उनमें इस बात की उम्मीद जगी है कि अब उनकी शिकायत पर ध्यान दिया जाएगा और न्याय मिलने का रास्ता खुलेगा।
वोहरा और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात को उनके पुराने स्कूल संबंध के कारण भी खास माना जा रहा है। वोहरा ने बताया कि उन्होंने वडनगर के बीएन स्कूल में मोदी के साथ पढ़ाई की थी। लंबे अंतराल के बाद हुई इस मुलाकात में उन्होंने अपने पुराने सहपाठी के सामने निजी संघर्ष और जमीन विवाद की समस्या रखी। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित कराया जाए।
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने भी असगरअली वोहरा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात से संबंधित तस्वीरें तथा एक प्रेस नोट जारी किया है। सरनाईक ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री अपने पुराने मित्र को न्याय दिलाने में सहायता करेंगे। मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद यह मामला सार्वजनिक चर्चा में आ गया है।
हालांकि जमीन विवाद की शुरुआत कब हुई, विवादित भूमि कहां स्थित है और इसमें कौन-कौन से पक्ष शामिल हैं, इससे संबंधित विस्तृत तथ्य अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। वोहरा ने मुख्य रूप से मामले में न्याय दिलाने और सीबीआई जांच कराने की मांग रखी है। उनकी मांग पर संबंधित सरकारी विभाग या जांच एजेंसी की ओर से किसी औपचारिक कार्रवाई की जानकारी भी अभी सामने नहीं आई है।
वोहरा का कहना है कि वह उम्र के इस पड़ाव में अपने लंबे संघर्ष का समाधान चाहते हैं। दशकों तक न्याय की प्रतीक्षा करने के बाद उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री से अपनी बात कही है। प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद उन्होंने भरोसा जताया कि अब उनके मामले में उचित कदम उठाया जा सकता है।
मामले की सीबीआई जांच की मांग के पीछे वोहरा की दलील है कि स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच किए जाने से विवाद से जुड़े तथ्य निष्पक्ष रूप से सामने आ सकेंगे। हालांकि किसी मामले को सीबीआई के पास भेजने के लिए निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया होती है। संबंधित सरकार की सहमति, अदालत के आदेश या केंद्र सरकार के निर्णय के आधार पर ही जांच एजेंसी किसी प्रकरण को अपने हाथ में लेती है।
प्रधानमंत्री से मुलाकात को लेकर जारी तस्वीरों में वोहरा उनके साथ दिखाई दे रहे हैं। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक द्वारा प्रेस नोट जारी किए जाने से मुलाकात और वोहरा की मांग को सार्वजनिक रूप से सामने आने का अवसर मिला है। सरनाईक ने भी मामले के न्यायसंगत समाधान की उम्मीद व्यक्त की है।
यह मामला अब इसलिए भी ध्यान खींच रहा है क्योंकि शिकायत करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को प्रधानमंत्री मोदी का स्कूल का सहपाठी बताया है। दोनों ने वडनगर के बीएन स्कूल में पढ़ाई की थी। हालांकि वोहरा ने अपनी मांग को केवल पुराने संबंध तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विवाद की निष्पक्ष जांच और कानूनी रूप से न्याय दिलाने का आग्रह किया है।
वोहरा की प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद अब आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। यदि उनका आवेदन किसी संबंधित मंत्रालय, राज्य सरकार या सक्षम विभाग को भेजा जाता है तो विवाद के दस्तावेजों और पुराने रिकॉर्ड का परीक्षण किया जा सकता है। इसके बाद ही यह तय होगा कि मामले में किस स्तर पर कार्रवाई संभव है।
जमीन विवादों में स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज, राजस्व अभिलेख, पुराने समझौते और संबंधित न्यायिक आदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए असगरअली वोहरा के दावे की वास्तविक स्थिति भी उपलब्ध दस्तावेजों और कानूनी रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। सीबीआई जांच की उनकी मांग स्वीकार होगी या प्रकरण किसी अन्य सक्षम एजेंसी को भेजा जाएगा, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक द्वारा मुलाकात की तस्वीरें जारी करने के बाद वोहरा की न्याय की मांग को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान मिला है। सरनाईक ने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री अपने पुराने मित्र की समस्या पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित प्रक्रिया और विवाद के तथ्यों के आधार पर ही लिया जाएगा।
फिलहाल असगरअली वोहरा प्रधानमंत्री से मिली कथित सकारात्मक प्रतिक्रिया को अपने लिए उम्मीद की नई किरण मान रहे हैं। उन्हें भरोसा है कि दशकों से जारी जमीन विवाद में अब निष्पक्ष जांच होगी और उन्हें न्याय मिलेगा। दूसरी ओर, इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय या संबंधित प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।





