महाराष्ट्र

पालघर के आवासीय स्कूल में 7 साल के छात्र की मौत, 26 अन्य अस्पताल में भर्ती

Kavita2
25 Aug 2026 10:35 AM IST
पालघर के आवासीय स्कूल में 7 साल के छात्र की मौत, 26 अन्य अस्पताल में भर्ती
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पालघर। महाराष्ट्र के पालघर जिले के मसवान स्थित एक आवासीय स्कूल में बीमारी का मामला सामने आया है। यहां पहली कक्षा में पढ़ने वाले सात वर्षीय छात्र की तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ के बाद मौत हो गई, जबकि 26 अन्य छात्रों को सर्दी, खांसी और बुखार जैसे लक्षणों के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद स्कूल और स्वास्थ्य विभाग में चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों ने प्रभावित छात्रों की चिकित्सकीय निगरानी शुरू कर दी है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब इसी महीने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के एक आवासीय स्कूल के छात्रावास में जमीन पर सो रही तीन आदिवासी लड़कियों की जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई थी। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने राज्य के आवासीय और आश्रम स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

22 अगस्त को बिगड़ी छात्र की तबीयत

अधिकारियों के मुताबिक, पालघर जिले के मसवान स्थित आश्रम स्कूल में पहली कक्षा के छात्र को 22 अगस्त को तेज बुखार आया था। स्कूल प्रबंधन की ओर से उसे इलाज के लिए स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) ले जाया गया। वहां उसका उपचार किया गया और स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही थी।

हालांकि, सोमवार को छात्र का बुखार दोबारा बढ़ गया। उसकी हालत का परीक्षण करने पर PHC के मेडिकल ऑफिसर ने पाया कि उसका ऑक्सीजन स्तर कम हो रहा था। सांस लेने में परेशानी को देखते हुए डॉक्टर ने उसे तत्काल बेहतर चिकित्सा सुविधा वाले अस्पताल में ले जाने की सलाह दी।

इसके बाद छात्र को एंबुलेंस के जरिए मनोर के ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया। लेकिन इलाज के दौरान उसकी हालत गंभीर बनी रही और उसकी मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि छात्र की मौत तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ के बाद हुई।

26 छात्रों में भी बीमारी के लक्षण

इसी स्कूल के 26 अन्य छात्रों में भी सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षण पाए गए हैं। स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों के बाद इन छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।

बड़ी संख्या में छात्रों के एक साथ बीमार पड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों की ओर से प्रभावित छात्रों की जांच की जा रही है, ताकि बीमारी के संभावित कारणों का पता लगाया जा सके।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सभी छात्रों की बीमारी का कारण क्या है। छात्रों में एक जैसे लक्षण पाए जाने के कारण संक्रमण की संभावना समेत अन्य संभावित कारणों की भी जांच की जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

स्कूल में स्वास्थ्य जांच पर जोर

एक ही संस्थान में बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने के बाद स्कूल परिसर में स्वास्थ्य संबंधी जांच और निगरानी बढ़ाए जाने की संभावना है। आवासीय स्कूलों में बच्चे एक साथ रहते और भोजन करते हैं, इसलिए किसी संक्रामक बीमारी की स्थिति में संक्रमण फैलने का जोखिम अधिक हो सकता है।

ऐसे संस्थानों में साफ-सफाई, पीने के पानी, भोजन की गुणवत्ता, स्वास्थ्य जांच और बीमार बच्चों को समय पर अलग चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण माना जाता है। पालघर की घटना के बाद इन व्यवस्थाओं पर भी अधिकारियों की नजर है।

गढ़चिरौली की घटना के बाद फिर सवाल

पालघर का मामला ऐसे समय सामने आया है जब इसी महीने गढ़चिरौली जिले के एक आवासीय स्कूल के छात्रावास में तीन आदिवासी छात्राओं की सांप के काटने से मौत हो गई थी। बताया गया था कि तीनों लड़कियां छात्रावास में जमीन पर सो रही थीं।

उस घटना के बाद आवासीय स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, भवनों की स्थिति और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठे थे। अब पालघर में एक छात्र की बीमारी के बाद मौत और 26 छात्रों के अस्पताल में भर्ती होने से इन संस्थानों में स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था पर फिर ध्यान गया है।

बच्चों के लिए समय पर चिकित्सा जरूरी

आवासीय स्कूलों में पढ़ने वाले कई बच्चे दूरदराज और ग्रामीण इलाकों से आते हैं। ऐसे में स्कूल परिसर में प्राथमिक चिकित्सा सुविधा और गंभीर स्थिति में तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

पालघर की घटना में छात्र को पहले स्थानीय PHC ले जाया गया और बाद में ऑक्सीजन स्तर गिरने पर मनोर ग्रामीण अस्पताल भेजने की सलाह दी गई। इससे गंभीर स्थिति में बच्चों को समय पर उच्च चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत भी सामने आती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, तेज बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। खासकर बच्चों में ऑक्सीजन स्तर गिरना गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है और ऐसे मामलों में तत्काल चिकित्सा सहायता आवश्यक होती है।

जांच के बाद स्पष्ट होगा कारण

फिलहाल छात्र की मौत के सटीक चिकित्सकीय कारण को लेकर अधिकारियों की ओर से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। एक साथ कई छात्रों के बीमार पड़ने के कारण स्वास्थ्य विभाग की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच से यह पता चल सकेगा कि बच्चों में बीमारी फैलने के पीछे कोई संक्रमण, मौसम से जुड़ी समस्या, भोजन-पानी से संबंधित कारण या कोई अन्य वजह थी।

अस्पताल में भर्ती 26 छात्रों की स्थिति पर भी स्वास्थ्य विभाग नजर रख रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल बीमार बच्चों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना और स्कूल में बीमारी को फैलने से रोकना है।

पालघर के मसवान स्थित आश्रम स्कूल की घटना ने एक बार फिर आवासीय स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चिंता पैदा कर दी है। सात वर्षीय छात्र की मौत के बाद 26 बच्चों का अस्पताल में भर्ती होना प्रशासन के लिए गंभीर मामला है। आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग की जांच से बीमारी के कारणों और स्कूल में स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं की स्थिति को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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