महाराष्ट्र

एक महीने के बच्चे को 1.2 लाख में बेचने का मामला, सात लोग गिरफ्तार

Kavita2
30 Sept 2026 4:26 PM IST
एक महीने के बच्चे को 1.2 लाख में बेचने का मामला, सात लोग गिरफ्तार
x

छत्रपति संभाजीनगर। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे एक जोड़े ने कथित तौर पर अपने करीब एक महीने के बच्चे को 1.2 लाख रुपये में बेच दिया। पुलिस के अनुसार बच्चे को बेचे जाने के बाद वह कई लोगों के हाथों से होकर हैदराबाद पहुंचा। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित बचा लिया और उसे फिलहाल छत्रपति संभाजीनगर के एक अनाथालय में रखा गया है।

इस मामले में पुलिस ने बच्चे के माता-पिता समेत कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि मजदूरी करने वाले इस जोड़े ने बच्चे को बेचकर मिली रकम से कथित तौर पर मोबाइल फोन और सोना खरीदा था।

मामला तब सामने आया जब बच्चे की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उसने बताया कि उसका बच्चा 5 जुलाई को पैदा हुआ था। इसके करीब एक महीने बाद 7 अगस्त को कौशल्या पवार और उनकी बेटी सीमा रेशवाल बच्चे को अपने साथ ले गई थीं।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की तो पूरे मामले की परतें खुलती गईं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बच्चा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के पास पहुंचता रहा और उसे कथित रूप से कई बार आगे बेचा गया।

पुलिस ने बच्चे की तलाश के लिए अलग-अलग स्तर पर जांच की। संपर्कों, लेनदेन और संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद पता चला कि बच्चा हैदराबाद पहुंच चुका है।

इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए बच्चे को सुरक्षित बरामद किया। बरामदगी के बाद बच्चे को सीधे माता-पिता को सौंपने के बजाय संरक्षण में रखने का फैसला लिया गया। फिलहाल बच्चे की देखभाल शहर के एक अनाथालय में की जा रही है।

पुलिस के अनुसार मामले में सात लोगों की गिरफ्तारी की गई है। इनमें बच्चे के माता-पिता के अलावा वे लोग भी शामिल हैं, जिनकी भूमिका बच्चे की खरीद-फरोख्त और उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में सामने आई है।

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बच्चे को पहली बार किसके पास बेचा गया और बाद में किन-किन लोगों ने उसे आगे दूसरे लोगों को सौंपा। पुलिस इस पूरी श्रृंखला को समझने की कोशिश कर रही है।

बच्चे की मां की शिकायत इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हुई। उसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने 7 अगस्त से लेकर बच्चे के हैदराबाद पहुंचने तक के घटनाक्रम की जांच शुरू की।

मामले में यह भी सामने आया कि बच्चे को बेचने के बदले माता-पिता को 1.2 लाख रुपये मिले थे। आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल मोबाइल फोन और सोना खरीदने में किया गया।

पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर रही है कि रकम का भुगतान किस माध्यम से किया गया था। यदि बैंकिंग या डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल हुआ है तो उससे जुड़े रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।

वहीं यदि नकद लेनदेन किया गया था तो पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि रकम किसने दी और किसके माध्यम से माता-पिता तक पहुंची।

मामले ने बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त और गैरकानूनी गोद लेने जैसे गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस यह भी जांच रही है कि गिरफ्तार लोगों का इससे पहले भी किसी ऐसे मामले से संबंध रहा है या नहीं।

जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश में हैं कि क्या यह मामला केवल एक बच्चे की खरीद-फरोख्त तक सीमित है या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।

यदि जांच में किसी बड़े नेटवर्क के संकेत मिलते हैं तो पुलिस अन्य शहरों और राज्यों में भी कार्रवाई कर सकती है। बच्चे को हैदराबाद तक ले जाने के कारण इस मामले का दायरा अंतरराज्यीय हो गया है।

पुलिस यह भी पता लगा रही है कि बच्चे को हैदराबाद में किसके पास रखा गया था और वहां उसे रखने का उद्देश्य क्या था।

मामले में शामिल लोगों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और आपसी संपर्क जांच में अहम साबित हो सकते हैं। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि बच्चे को लेकर बातचीत कब शुरू हुई और पूरी खरीद-फरोख्त की योजना कैसे बनाई गई।

बच्चे की उम्र घटना के समय करीब एक महीने थी। इतनी कम उम्र में उसे अलग-अलग लोगों के पास ले जाना उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा था।

बरामदगी के बाद बच्चे की स्वास्थ्य जांच कराए जाने की भी संभावना है। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बच्चा सुरक्षित और स्वस्थ रहे।

फिलहाल बच्चे को अनाथालय में रखकर उसकी देखभाल की जा रही है। आगे उसे किसकी अभिरक्षा में दिया जाएगा, इसका फैसला संबंधित बाल कल्याण और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।

पुलिस सातों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। इस दौरान यह जानने की कोशिश की जा रही है कि इस सौदे में किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी और किसने किस स्तर पर बच्चे की खरीद या बिक्री में मदद की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मानव तस्करी और अवैध गोद लेने से जुड़े पहलुओं पर भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या बच्चे को किसी परिवार को अवैध तरीके से सौंपने की तैयारी थी या इसके पीछे कोई और उद्देश्य था।

छत्रपति संभाजीनगर का यह मामला कई स्तरों पर गंभीर माना जा रहा है। एक ओर माता-पिता पर अपने ही नवजात बच्चे को बेचने का आरोप है, वहीं दूसरी ओर बच्चा कई बार आगे बेचा गया और दूसरे राज्य तक पहुंच गया।

फिलहाल पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और बच्चे को सुरक्षित बचा लिया गया है। अब जांच का फोकस पूरे नेटवर्क, लेनदेन और बच्चे की खरीद-फरोख्त में शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका का पता लगाने पर है।

मामले की आगे की जांच में और भी तथ्य सामने आ सकते हैं। पुलिस का प्रयास है कि पूरी श्रृंखला का खुलासा कर यह स्पष्ट किया जाए कि बच्चे को किस उद्देश्य से बेचा गया और उसे हैदराबाद तक पहुंचाने के पीछे कौन-कौन लोग

Next Story