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शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर बुधवार देर रात महिलाओं का विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया। अमोला थाना क्षेत्र के थरखेड़ा गांव में महिलाओं का एक समूह शराब दुकान पर पहुंचा और परिसर के अंदर रखे शराब के क्रेट बाहर निकाल लिए। इसके बाद महिलाओं ने क्रेट सड़क पर फेंककर डंडों से तोड़ दिए। घटना की जानकारी मिलने पर अमोला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और महिलाओं को समझाकर प्रदर्शन समाप्त कराया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, थरखेड़ा गांव की महिलाएं इलाके में संचालित शराब दुकान का लंबे समय से विरोध कर रही थीं। उनका कहना था कि गांव में दुकान होने के कारण शराब आसानी से उपलब्ध हो रही है और इसका प्रतिकूल प्रभाव परिवारों तथा सामाजिक वातावरण पर पड़ रहा है। महिलाओं ने प्रशासन से शराब दुकान को गांव से हटाकर किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की।
#WATCH | MP: Angry Women Storm Liquor Shop In #Shivpuri, Smash Alcohol Crates With Sticks Over Financial Burden#MadhyaPradesh #MPNews pic.twitter.com/6PttvySsLI
— Free Press Madhya Pradesh (@FreePressMP) September 10, 2026
बुधवार देर रात बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्र होकर शराब दुकान पहुंचीं। महिलाएं अपने हाथों में डंडे लिए हुए थीं और दुकान हटाने की मांग करते हुए नारे लगा रही थीं। विरोध के दौरान कुछ महिलाएं दुकान के भीतर दाखिल हो गईं। उन्होंने वहां रखे शराब के क्रेट उठाए और एक-एक कर दुकान के बाहर लाना शुरू कर दिया।
दुकान से बाहर लाए गए क्रेट सड़क पर फेंक दिए गए। इसके बाद महिलाओं ने डंडों से उन पर लगातार प्रहार किया। क्रेट टूटने से शराब की बोतलें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। अचानक हुए इस प्रदर्शन से दुकान के आसपास अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद लोगों ने घटना की जानकारी संबंधित थाना पुलिस को दी।
सूचना मिलते ही अमोला थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारी महिलाओं से बातचीत की और उन्हें शांत कराने की कोशिश की। अधिकारियों ने महिलाओं से कहा कि शराब दुकान हटाने की मांग उचित माध्यम से प्रशासन के सामने रखी जा सकती है और कानून हाथ में लेकर तोड़फोड़ करना सही तरीका नहीं है।
काफी समझाइश के बाद महिलाएं शांत हुईं और विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। पुलिस के हस्तक्षेप से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। घटना के बाद गांव में स्थिति शांतिपूर्ण बताई गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस इलाके की गतिविधियों पर नजर रख रही है।
महिलाओं का आरोप है कि शराब की दुकान के कारण गांव के कई परिवार परेशान हैं। शराब सेवन के बाद होने वाले घरेलू विवाद, आर्थिक नुकसान और सार्वजनिक स्थानों पर असामाजिक गतिविधियों जैसी समस्याओं को लेकर उनमें नाराजगी है। उनका कहना है कि परिवार की आय का एक हिस्सा शराब पर खर्च हो जाने से घर का बजट प्रभावित होता है और बच्चों की पढ़ाई तथा दैनिक जरूरतों पर असर पड़ता है।
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने स्पष्ट किया कि वे गांव में शराब दुकान का संचालन नहीं चाहतीं। उनका कहना है कि दुकान हटाने की मांग को लेकर प्रशासन को पहले भी अवगत कराया गया था या स्थानीय स्तर पर शिकायत की गई थी। हालांकि, इससे जुड़े किसी लिखित आवेदन और उस पर हुई कार्रवाई का विस्तृत विवरण अभी सामने नहीं आया है।
घटना के बाद शराब दुकान को हुए वास्तविक आर्थिक नुकसान का आकलन किया जा रहा है। कितने क्रेट और बोतलें क्षतिग्रस्त हुईं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। दुकान संचालक की ओर से कोई शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं, यह भी अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। शिकायत मिलने पर घटनास्थल पर मौजूद साक्ष्यों और वीडियो के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जा सकती है।
विरोध के दौरान किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है। पुलिस के समय पर पहुंचने से प्रदर्शन को आगे बढ़ने से रोक लिया गया। यदि प्रदर्शन अधिक देर तक चलता तो सड़क पर यातायात प्रभावित होने और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका थी।
अब प्रशासन के सामने महिलाओं की शिकायत का समाधान निकालने की चुनौती है। शराब दुकान को हटाने या स्थानांतरित करने से संबंधित निर्णय नियमों, दुकान के लाइसेंस और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर लिया जाता है। आबकारी विभाग को दुकान की मौजूदा जगह, आबादी से उसकी दूरी और स्थानीय निवासियों की आपत्तियों का आकलन करना पड़ सकता है।
ग्रामीण क्षेत्र में शराब की दुकान खोलने या उसे दूसरी जगह स्थानांतरित करने के मामले में स्थानीय लोगों की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं। लोगों का तर्क रहता है कि आवासीय क्षेत्र, स्कूल, मंदिर या सार्वजनिक स्थान के पास शराब दुकान होने से सामाजिक वातावरण प्रभावित होता है। वहीं लाइसेंसी दुकान संचालक निर्धारित सरकारी अनुमति के आधार पर कारोबार करने की बात कहते हैं।
थरखेड़ा की घटना में महिलाओं की नाराजगी सीधे तौर पर सामने आई है। प्रदर्शन का स्वरूप हिंसक या उग्र होने से उनका मूल मुद्दा कानूनी विवाद में बदल सकता है। इसलिए प्रशासन के लिए जरूरी होगा कि एक ओर तोड़फोड़ की घटना से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल की जाए और दूसरी ओर महिलाओं द्वारा उठाई गई समस्याओं को भी गंभीरता से सुना जाए।
गांव में शांति बनाए रखने के लिए स्थानीय अधिकारियों, आबकारी विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों, दुकान संचालक और महिलाओं के बीच बैठक कराई जा सकती है। बातचीत के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि दुकान को लेकर ग्रामीणों की वास्तविक आपत्तियां क्या हैं और मौजूदा नियमों के तहत कौन-सा समाधान संभव है।
महिलाओं द्वारा शराब विरोधी आंदोलन नया नहीं है। देश के कई ग्रामीण इलाकों में महिलाओं ने शराबबंदी या शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किए हैं। इन आंदोलनों के पीछे अक्सर घरेलू हिंसा, परिवार की आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य और बच्चों के भविष्य से जुड़ी चिंताएं होती हैं। थरखेड़ा गांव का प्रदर्शन भी इन्हीं सामाजिक समस्याओं से जुड़ा बताया जा रहा है।
घटना के वीडियो सामने आने पर यह मामला चर्चा का विषय बन सकता है। वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम, दुकान की स्थिति और वहां मौजूद लोगों की पहचान के आधार पर पूरी घटना की पुष्टि की जाएगी। फिलहाल पुलिस ने मौके पर पहुंचकर महिलाओं को शांत कराया है और क्षेत्र में स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि प्रशासन शराब दुकान हटाने की मांग पर क्या निर्णय लेता है। ग्रामीण महिलाएं अपनी मांग पर कायम रहती हैं तो वे ज्ञापन देकर या शांतिपूर्ण धरना आयोजित कर अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचा सकती हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए उनकी शिकायतों का समाधान निकालना प्रशासन की प्राथमिकता होगी।





