मध्य प्रदेश

पेड़ों के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे वीडियो ने खोली स्कूल की बदहाली की पोल

Kavita2
10 Sept 2026 4:21 PM IST
पेड़ों के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे वीडियो ने खोली स्कूल की बदहाली की पोल
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छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से सामने आए एक वीडियो ने ग्रामीण क्षेत्रों की स्कूली शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह वीडियो बरबंद गांव के एक स्कूल का बताया जा रहा है, जहां बच्चे स्कूल की सुरक्षित और व्यवस्थित इमारत के बजाय पेड़ों के नीचे तथा खुले मैदान में बैठकर पढ़ाई करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीण स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

सोशल मीडिया पर प्रसारित इस वीडियो को कथित रूप से ‘खुरपंच बुंदेलखंड’ नामक मंच से पोस्ट किया गया है। वीडियो एक महिला ने बनाया है, जो स्कूल परिसर का निरीक्षण करते हुए वहां की परिस्थितियों को दिखाती नजर आ रही है। महिला ने परिसर में बच्चों के पढ़ने की जगह, उपलब्ध कमरे और अन्य व्यवस्थाओं को कैमरे में रिकॉर्ड किया है। वीडियो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि स्कूल में विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त कमरे और जरूरी शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।



वीडियो में कई बच्चे खुले स्थान पर बैठकर पढ़ाई करते हुए दिखाई दे रहे हैं। कुछ विद्यार्थी पेड़ों की छाया में बैठे हैं, जबकि अन्य खुले मैदान में अपनी कक्षाएं लगाते नजर आते हैं। स्कूल में एक छोटे कमरे जैसी जगह भी दिखाई गई है, लेकिन वहां बच्चों के बैठने और पढ़ाने के लिए समुचित इंतजाम नजर नहीं आते। वीडियो में उस स्थान पर ब्लैकबोर्ड, मेज और कुर्सियों जैसी सामान्य सुविधाएं दिखाई नहीं देतीं।

इन दृश्यों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बदलते मौसम के बीच बच्चों की पढ़ाई कैसे संचालित की जाती होगी। गर्मी के दिनों में खुले मैदान में बैठना विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। बरसात के दौरान कक्षाओं का संचालन और कठिन हो सकता है, जबकि सर्दियों में खुले में बैठकर पढ़ाई करना छोटे बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इसके साथ ही तेज हवा, धूल और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियां भी पढ़ाई को प्रभावित कर सकती हैं।

स्कूल केवल पुस्तकीय शिक्षा देने की जगह नहीं होता, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, सामाजिक विकास और मानसिक प्रगति से भी जुड़ा होता है। इसके लिए सुरक्षित भवन, हवादार कक्षाएं, पीने का स्वच्छ पानी, शौचालय, बिजली और बैठने की उचित व्यवस्था जैसी सुविधाएं आवश्यक मानी जाती हैं। बरबंद गांव के बताए जा रहे इस स्कूल का वीडियो इन बुनियादी जरूरतों की उपलब्धता पर सवाल उठा रहा है।

वीडियो में दिखाई गई स्थिति को लेकर यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि स्कूल में कितने विद्यार्थी पंजीकृत हैं और उनके लिए कितने शिक्षक नियुक्त हैं। इसके अलावा भवन की वास्तविक स्थिति, कक्षाओं की संख्या, पेयजल तथा शौचालय की व्यवस्था और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अध्ययन सामग्री की जानकारी भी सामने आनी चाहिए। वीडियो के दावों का संबंधित शिक्षा विभाग की ओर से निरीक्षण और सत्यापन किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए सरकारी स्कूल शिक्षा का प्रमुख माध्यम होते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार निजी विद्यालयों का खर्च नहीं उठा पाते और अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए सरकारी व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि स्कूल में भवन और बैठने की जगह जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध न हों तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की उपस्थिति, पढ़ाई की गुणवत्ता और सीखने की क्षमता पर पड़ सकता है।

अपर्याप्त व्यवस्था शिक्षकों के काम को भी प्रभावित करती है। बिना ब्लैकबोर्ड, मेज-कुर्सी और पर्याप्त कक्षाओं के अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाना मुश्किल हो जाता है। खुले स्थान पर आसपास का शोर, मौसम और अन्य गतिविधियां बच्चों का ध्यान भटका सकती हैं। इससे शिक्षक चाहकर भी बच्चों को वैसा शैक्षणिक वातावरण नहीं दे पाते, जिसकी उनसे अपेक्षा की जाती है।

सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद लोग स्कूल की स्थिति में तत्काल सुधार की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि बच्चों को सुरक्षित भवन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। वीडियो में सामने आए दावों की पुष्टि होने पर स्कूल के लिए पर्याप्त कक्षों का निर्माण कराने के साथ ही ब्लैकबोर्ड, फर्नीचर, पेयजल, शौचालय और बिजली जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत होगी।

यह वीडियो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी की आवश्यकता भी रेखांकित करता है। शिक्षा के लिए बजट और योजनाएं बनाए जाने के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि उनका लाभ वास्तविक जरूरत वाले स्कूलों और बच्चों तक पहुंचे। नियमित निरीक्षण होने से भवन की खराब स्थिति, संसाधनों की कमी और अन्य समस्याओं की समय रहते पहचान की जा सकती है।

हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर सामने आए सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने आना जरूरी है। यदि वीडियो में दिखाया गया स्थान वास्तव में नियमित स्कूल परिसर है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। वहीं यदि कोई भवन निर्माणाधीन है या किसी कारण से अस्थायी रूप से कक्षाएं बाहर लगाई जा रही हैं, तो प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

बरबंद गांव से जुड़ा बताया जा रहा यह मामला बच्चों के शिक्षा के अधिकार और सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई की जरूरत से जुड़ा है। ग्रामीण विद्यार्थियों को केवल स्कूल में दाखिला दिलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसा परिसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है, जहां वे सम्मानजनक और सुरक्षित तरीके से पढ़ सकें। अब निगाहें संबंधित अधिकारियों पर हैं कि वे वीडियो का संज्ञान लेकर स्कूल की वास्तविक स्थिति का आकलन करते हैं या नहीं और बच्चों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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