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मध्य प्रदेश
Ramlila में कुंभकरण वध की लीला प्रसंग _श्रीराम लीला मेला देखने मेला ग्राउंड उमड़ा जनसैलाब
Gulabi Jagat
3 Jan 2026 11:22 PM IST
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Raisen रायसेन ।रायसेन शहर में चल रही रामलीला महोत्सव के चलते शनिवार को लंकापति रावण के भाई महाबलशाली कुंभकरण वध की लीला प्रसंग का शानदार तरीके से आयोजन किया गया । रविवार को अतिकाय, देवांतक वध की लीला की प्रस्तुति आयोजित की जाएगी। कुंभकरण का रोल राजेश पंथी पहलवान ने निभाया। वह लगातार चार दशक से कुंभकरण का जोरदार अभिनय कर रहे हैं।
श्री रामलीला देखने एवं मेले का आनंद लेने के लिए भारी जन सैलाब उमड़ पड़ा। रामलीला मैदान से लेकर पूरे मेला स्थल पर जिधर देखो उधर जनता ही जनता नजर आ रही थी। कुंभकरण वध की आकर्षक लीला को देखने के लिए मैदान के चारों तरफ बड़ी संख्या में दर्शक लीला देखने के लिए खड़े हुए थे।
श्रीराम लीलामेला समिति के कार्यकारी अध्यक्ष पंडित ब्रजेश चतुर्वेदी, संचालन समिति के प्रमुख राजेंद्र प्रसाद शुक्ला के मुताबिक प्रस्तुत की गई लीला के अनुसार लंकापति रावण अपने भाई कुंभकरण जो कि कई माह से गहरी नींद में सो रहा था। उसे कुछ खेल खबर ही नहीं थी। इधर रावण सेनापति को कुंभकरण के पास भेजता है। सेना के राक्षसी सेना द्वारा कुंभकरण की नींद जगाने के लिए कई उपाय किए जाते हैं। जब वह जागता है तो अपने भ्राता श्री रावण से कहता है कि आप अनीति कर रहे हैं अधर्म के मार्ग पर चल रहे हैं।पराई स्त्री सीता का हरण कर लंका में कैद कर उसे रखे हुए हैं। यह गलत है, इस पर दशकंधर नाराज होता है।
वह योजना बनाते हुए सेनापति को आदेश देता है कि जाओ इस कुंभकरण को जमकर मद्रा पान पिलाओ। ताकि इसे होश ना रहे तब जाकर इसकी अकल ठिकाने आएगी। रावण की सेना ऐसा ही करती है और नशे में मदहोश होकर कुंभकरण रामकी सेना से युद्ध करने के लिए चलता है। रामा दल में भगवान राम बैठे होते हैं और हनुमान जी से कहते हैं कि देखो सामने कौन आ रहा है। आप जाकर देखिए परंतु विभीषण को भेजा जाता है।क्योंकि वह आपस में भाई थे। विभीषण कुंभकरण को समझाने के लिए आते हैं। कुंभकरण विभीषण को बहुत बुरा भला कहता है और नीच कायर की उपमा देकर उन्हें वापस जाने के लिए कहता है। विभीषण राम जी के पास पहुंचते हैं। कहते हैं कि हे प्रभु वह मेरी बात नहीं मान रहा है, इस प्रकार से भगवान राम लक्ष्मण अपनी राम सेना को साथ लेकर और कुंभकरण के पास चल देते हैं। आमने सामने रामलीला मैदान में घनघोर युद्ध होता है। अंत में प्रभु श्री रामके हाथों महाबलशाली कुंभकरण का वध हो जाता है। रावण की राक्षसी सेना में भगदड़ मच जाती है।
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