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आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण आहार सप्लाई प्रभावित, प्रशासन ने शुरू की वैकल्पिक व्यवस्था

छतरपुर : जिले के आंगनवाड़ी केंद्रों में पिछले कुछ महीनों से पोषण आहार की सप्लाई व्यवस्था प्रभावित होने के कारण हजारों बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले में कुल 2,058 आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें से कई केंद्रों पर नियमित रूप से मिलने वाला पौष्टिक भोजन समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अब वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है, ताकि लाभार्थियों को पोषण आहार मिलना जारी रह सके।
प्रशासन की ओर से शुरू की गई अस्थायी व्यवस्था के तहत निर्धारित समूहों के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों तक भोजन पहुंचाया जा रहा है। इन केंद्रों पर बच्चों और महिलाओं के लिए मिक्स खिचड़ी और गेहूं से तैयार दलिया उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था तब तक जारी रखी जाएगी, जब तक नियमित पोषण आहार सप्लाई व्यवस्था दोबारा सुचारू रूप से शुरू नहीं हो जाती।
आंगनवाड़ी केंद्रों का मुख्य उद्देश्य छोटे बच्चों को पोषण उपलब्ध कराना और गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना है। इन केंद्रों के माध्यम से सरकार की ओर से बच्चों के विकास और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जाती हैं। ऐसे में भोजन की सप्लाई में रुकावट आने से लाभार्थियों पर सीधा असर पड़ रहा था।
पिछले कुछ समय से कई आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण आहार की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। इसके चलते केंद्र संचालकों और कार्यकर्ताओं को भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। बच्चों को मिलने वाले निर्धारित भोजन में कमी आने से अभिभावकों में भी चिंता बढ़ने लगी थी। वहीं, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पौष्टिक आहार की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की। अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर समूहों का चयन कर उन्हें भोजन तैयार करने और आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी है। इसके तहत मिक्स खिचड़ी और गेहूं से बना दलिया तैयार कर केंद्रों पर वितरित किया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि इस व्यवस्था से फिलहाल पोषण आहार की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों के अनुसार, यह वैकल्पिक व्यवस्था लगभग तीन महीने तक चलने की उम्मीद है। इस दौरान नियमित सप्लाई सिस्टम को दोबारा मजबूत करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द पहले जैसी व्यवस्था बहाल हो और आंगनवाड़ी केंद्रों में मिलने वाला पोषण आहार बिना किसी बाधा के उपलब्ध कराया जा सके।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि बच्चों और महिलाओं को समय पर भोजन उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। सप्लाई बाधित होने के कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन नई व्यवस्था शुरू होने से अब राहत मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही स्थायी समाधान निकल जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के शुरुआती विकास में पोषण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। खासकर छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को संतुलित आहार मिलना जरूरी है। लंबे समय तक पोषण आहार की कमी रहने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए प्रशासन द्वारा समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था शुरू करना जरूरी कदम माना जा रहा है।
प्रशासन अब नियमित सप्लाई व्यवस्था को बहाल करने की दिशा में काम कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सभी आंगनवाड़ी केंद्रों की निगरानी की जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी लाभार्थी को पोषण आहार से वंचित न रहना पड़े।
फिलहाल अस्थायी व्यवस्था के माध्यम से जिले के आंगनवाड़ी केंद्रों में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नियमित सप्लाई व्यवस्था कितनी जल्दी बहाल होती है और क्या सभी केंद्रों पर पोषण आहार की उपलब्धता पहले की तरह सुनिश्चित हो पाती है।





