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Sehore: सीहोर जिले में छह महीने पुराने एक सनसनीखेज अंधे कत्ल की गुत्थी आखिरकार सुलझ गई। जावर थाना पुलिस ने हत्या में शामिल दोनों आरोपियों को पंजाब के फिरोजपुर से गिरफ्तार कर लिया है। हत्या की वजह आपसी रंजिश, दबंगई और नशे की लत बताई गई है।
6 अक्टूबर 2025 की सुबह जावर थाना क्षेत्र के हकीमपुर खोयरा में उस समय सनसनी फैल गई, जब इंडियन पेट्रोल पंप के पीछे मयूर झाला के खाली पड़े मकान के पास एक अज्ञात व्यक्ति की लाश पड़ी मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शव की हालत देखकर साफ था कि यह सामान्य मौत नहीं बल्कि क्रूर हत्या का मामला है। सिर पर गंभीर चोट के निशान थे और आसपास खून के धब्बे मिले थे। पुलिस ने अज्ञात शव का मर्ग कायम कर जांच शुरू की, लेकिन पहचान न होने से मामला पूरी तरह ब्लाइंड बन चुका था।
जांच के दौरान पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की। इसी बीच हार्वेस्टर एजेंट अनिल ठाकुर ने मृतक की शर्ट देखकर उसकी पहचान मिट्टू सिंह, हार्वेस्टर चालक के रूप में की। हालांकि पुलिस ने जल्दबाजी नहीं की और परिजनों का डीएनए टेस्ट कराया गया। डीएनए रिपोर्ट मिलते ही पुष्टि हो गई कि शव मिट्टू सिंह का ही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर हार्ड एंड शार्प ऑब्जेक्ट से वार कर हत्या की बात सामने आई, जिससे मामला सीधे मर्डर में बदल गया।
एसडीओपी प्रवीण कुमार चढोकर ने बताया कि पुलिस जांच में यह अहम सुराग मिला कि मिट्टू सिंह को आखिरी बार इंडियन पेट्रोल पंप के पास दो युवकों के साथ देखा गया था। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और परिजनों से पहचान कराई गई। दोनों युवकों की पहचान गुरप्रीत उर्फ दिलप्रीत उर्फ दिलबर और परमजीत उर्फ पम्मा के रूप में हुई, जो करिकंला थाना लख्खो के बहराम जिला फिरोजपुर पंजाब के रहने वाले थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि ये दोनों घटना के बाद से ही 17 सितंबर 2025 से फरार थे।
जावर थाना पुलिस ने तकनीकी जांच करते हुए मृतक का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकलवाया। इसमें कुछ ऐसे नंबर सामने आए जिनकी लोकेशन ट्रेस करने पर वह फिरोजपुर, पंजाब से जुड़े मिले। पुलिस को शक पुख्ता हुआ और विशेष टीम गठित कर पंजाब रवाना की गई। कई दिनों की निगरानी और दबिश के बाद आखिरकार दोनों आरोपियों को पकड़ लिया गया। गिरफ्तारी के साथ ही हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार और हार्वेस्टर मशीन भी बरामद कर ली गई।
पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाला खुलासा किया। दोनों ने बताया कि वे और मृतक तीनों अक्सर नशे में रहते थे। मिट्टू सिंह लगातार रौब दिखाता था, बात-बात पर झगड़ा करता था और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। उसी रात नशे की हालत में विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में उन्होंने सिर पर जानलेवा वार कर दिया। बाद में शव को खाली मकान के पास फेंककर दोनों पंजाब भाग गए, ताकि कोई उन पर शक न कर सके।
इस पूरे ऑपरेशन में पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला के निर्देशन में एसडीओपी प्रवीण कुमार चढोकर, तत्कालीन एसडीओपी आकाश अमलकर और थाना प्रभारी हेमंत पांडेय की टीम ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने न केवल छह महीने पुराने ब्लाइंड मर्डर को सुलझाया बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर फरार आरोपियों को पकड़कर यह साबित कर दिया कि अपराध चाहे जितना भी शातिर हो, कानून से बच नहीं सकता। अब दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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