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नेताओं-अधिकारियों के संरक्षण में चावल माफिया सक्रिय, जांच में बड़े खुलासे

भोपाल। मध्य प्रदेश में एथेनॉल उत्पादन के नाम पर सरकारी चावल के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि लंबे समय से चल रहे इस घोटाले में राजनेताओं और अधिकारियों के संरक्षण में सरकारी चावल की हेराफेरी की गई। एसआईटी की जांच में इस फर्जीवाड़े का दायरा बढ़कर 21 जिलों तक पहुंच गया है। मामले में कई राइस मिल संचालकों और संबंधित लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है।
जांच के अनुसार, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे मध्य प्रदेश के कई जिलों में एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित चावल को नियमों के विपरीत इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। शुरुआती जांच में बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और जबलपुर समेत कई जिलों में इस नेटवर्क के सक्रिय होने की बात सामने आई है।
एसआईटी जांच में बालाघाट की हर्ष राइस मिल भी संदेह के घेरे में आई है। बताया जा रहा है कि इस मिल में पूर्व मंत्री और बालाघाट भाजपा जिलाध्यक्ष राम किशोर कावरे के भाई कुमार कावरे और विनोद शर्मा की साझेदारी है। जांच एजेंसी ने विनोद शर्मा से मामले को लेकर लंबी पूछताछ भी की है।
बालाघाट से आगे बढ़ा जांच का दायरा
चावल घोटाले की जांच अब केवल बालाघाट तक सीमित नहीं रह गई है। एसआईटी को जांच के दौरान पता चला है कि सिवनी जिले से भी एथेनॉल निर्माता कंपनी एवीजे के नाम पर बड़ी मात्रा में चावल उठाया गया था।
जानकारी के मुताबिक, सिवनी से एवीजे कंपनी के नाम पर करीब 43 ट्रक यानी 489 क्विंटल चावल भेजा गया था। हालांकि, इस मामले में स्थानीय स्तर पर जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कंपनी के संचालक अभिनव सिंघल और उनके बेटे अरुण के फरार होने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि सरकारी चावल आवंटन की प्रक्रिया में किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि चावल को निर्धारित उद्देश्य यानी एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल किया गया या फिर उसे बाजार में खपाया गया।
कई जिलों में फैले नेटवर्क की आशंका
एसआईटी की जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह मामला एक जिले या कुछ राइस मिलों तक सीमित नहीं है। 21 जिलों में फैले नेटवर्क की जांच की जा रही है। एजेंसी अब उन राइस मिलों, परिवहनकर्ताओं और कंपनियों की जानकारी जुटा रही है, जिनके माध्यम से चावल की सप्लाई और इस्तेमाल किया गया।
मामले में अधिकारियों की भूमिका भी जांच के केंद्र में है। आरोप है कि बिना उचित निगरानी के सरकारी चावल का आवंटन और परिवहन किया गया। जांच एजेंसियां दस्तावेजों, परिवहन रिकॉर्ड और चावल की सप्लाई से जुड़े कागजात की जांच कर रही हैं।
सरकार और प्रशासन की बढ़ी चुनौती
एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से खाद्यान्न आधारित एथेनॉल उत्पादन की नीति लागू की गई है। इसके तहत निर्धारित नियमों के अनुसार चावल उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन यदि आवंटित चावल का गलत इस्तेमाल हुआ है तो यह सरकारी योजना में बड़ी अनियमितता मानी जा रही है।
इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। एसआईटी अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और लोगों से पूछताछ या कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित घोटाले में कितनी बड़ी रकम का नुकसान हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।





