मध्य प्रदेश

रिटायर्ड LIC अधिकारी से 6 लाख की साइबर ठगी

Rajeshwari Nishad
13 Oct 2026 7:16 PM IST
रिटायर्ड LIC अधिकारी से 6 लाख की साइबर ठगी
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देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले में पेंशन कार्ड अपडेट करने और इनकम टैक्स में भारी छूट दिलाने का लालच देकर भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के सेवानिवृत्त अधिकारी से 6 लाख 3 हजार रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने इस मामले में 21 वर्षीय आरोपी सचिन कुमार पासवान को गिरफ्तार किया है। उसकी निशानदेही पर पांच लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं। जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम पहले केरल के एक बैंक खाते में ट्रांसफर की गई और इसके बाद पश्चिम बंगाल में एटीएम के जरिए निकाली गई। पुलिस अब इस अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
पुलिस के अनुसार, ठगी का यह मामला देवास के कोतवाली थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पीड़ित की पहचान 62 वर्षीय मनोहर लाल सिलोदिया के रूप में हुई है, जो एलआईसी के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। साइबर अपराधियों ने बैंक अधिकारी बनकर उनसे संपर्क किया और पेंशन कार्ड अपडेट कराने के साथ टैक्स में बड़ी राहत मिलने का भरोसा दिलाया। इसी झांसे में आकर पीड़ित को 6.03 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
बैंक अधिकारी बनकर सेवानिवृत्त कर्मचारी को फंसाया
जानकारी के मुताबिक, साइबर ठगों ने मनोहर लाल सिलोदिया को निशाना बनाने के लिए पेंशन संबंधी काम का बहाना बनाया। आरोपियों ने खुद को बैंक से जुड़ा अधिकारी बताते हुए पेंशन कार्ड अपडेट कराने की बात कही।
इसके साथ ही इनकम टैक्स में भारी छूट मिलने का भी लालच दिया गया। पेंशन और टैक्स से संबंधित काम होने के कारण सेवानिवृत्त अधिकारी ठगों की बातों में आ गए।इसका फायदा उठाकर आरोपियों ने उनके खाते से कुल 6 लाख 3 हजार रुपये की ठगी कर ली।हालांकि, अपराधियों ने बैंक खाते की जानकारी किस तरीके से हासिल की और रकम निकालने के लिए कौन-सी तकनीक अपनाई, इसका विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने शुरू की जांच
साइबर ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर ई-जीरो एफआईआर दर्ज की गई।इसके बाद देवास कोतवाली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।पुलिस ने ठगी की रकम के लेनदेन और संबंधित बैंक खातों की जानकारी जुटाई। जांच में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पैसे के स्थानांतरण से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद के निर्देशन में टीम ने मामले की जांच आगे बढ़ाई और संदिग्ध आरोपियों का पता लगाने का प्रयास किया।
केरल के बैंक खाते में पहुंची थी रकम
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि पीड़ित के खाते से निकाली गई रकम केरल के एक बैंक खाते में ट्रांसफर हुई थी।इसके बाद रकम पश्चिम बंगाल में एटीएम के माध्यम से निकाली गई। अलग-अलग राज्यों के बैंकिंग लेनदेन की जानकारी सामने आने से पुलिस को इस मामले में अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क की भूमिका के संकेत मिले।पुलिस ने बैंक खातों से जुड़े लेनदेन की पड़ताल की और तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपित तक पहुंचने की कोशिश की।रकम के केरल पहुंचने और पश्चिम बंगाल में निकाले जाने से यह स्पष्ट हुआ कि ठगी का पैसा एक ही राज्य तक सीमित नहीं था।
बिहार के कटिहार का रहने वाला है आरोपी
पुलिस ने जांच के बाद 21 वर्षीय सचिन कुमार पासवान को गिरफ्तार किया। वह बिहार के कटिहार जिले के रौतारा थाना क्षेत्र के खुदनापसपुर गांव का रहने वाला है।पुलिस के मुताबिक, सचिन की गिरफ्तारी झारखंड के जामताड़ा से की गई। गिरफ्तारी के बाद उसकी निशानदेही पर पांच लाख रुपये नकद जब्त किए गए।इस कार्रवाई में कोतवाली थाना प्रभारी शशिकांत चौरसिया, उपनिरीक्षक सचिन सोनगरा, उपनिरीक्षक डीके त्यागी और साइबर सेल की टीम की भूमिका रही।
जामताड़ा से जुड़े नेटवर्क की जांच
पुलिस की जांच में साइबर ठगी के तार जामताड़ा से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।जामताड़ा पहले भी साइबर अपराध से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी के जामताड़ा से पकड़े जाने के बाद पुलिस अब उसके संपर्कों की जांच कर रही है।जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ठगी की रकम अलग-अलग राज्यों के बैंक खातों से कैसे गुजरी और नकदी निकालने में किन व्यक्तियों की भूमिका थी।हालांकि, अभी किसी अन्य व्यक्ति की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस नेटवर्क से जुड़े संभावित आरोपियों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है।
पांच लाख रुपये जब्त, बाकी रकम की जांचएलआईसी के सेवानिवृत्त अधिकारी से कुल 6 लाख 3 हजार रुपये की ठगी हुई थी। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी की निशानदेही पर पांच लाख रुपये नकद जब्त किए हैं।इस प्रकार ठगी की कुल रकम में से बड़ी राशि पुलिस के हाथ लगी है। हालांकि, नकदी जब्त होने और पीड़ित को रकम वापस मिलने की प्रक्रिया अलग-अलग होती है।
फिलहाल बरामद पांच लाख रुपये पीड़ित को लौटाए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। शेष धनराशि और अन्य संबंधित लेनदेन की जांच भी महत्वपूर्ण है।साइबर ठगी के खिलाफ देवास पुलिस का अभियानदेवास पुलिस साइबर अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चला रही है। पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद के अनुसार, जिले में ऑपरेशन साइबर और ई-जीरो एफआईआर के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 130 ई-जीरो एफआईआर के मामलों में 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।इसके अलावा पुलिस ने 98.52 लाख रुपये से अधिक की रकम जब्त की है। साइबर ठगी के पीड़ितों को 3.89 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वापस कराई गई है।साथ ही विभिन्न बैंक खातों में 5.27 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध धनराशि होल्ड कराई गई है।
पेंशनधारकों को साइबर ठग बना रहे निशाना
यह घटना पेंशनधारकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी है। साइबर अपराधी कई बार बैंक अधिकारी या किसी संस्थान के प्रतिनिधि बनकर संपर्क करते हैं।वे पेंशन बंद होने, केवाईसी अपडेट करने या टैक्स में छूट दिलाने जैसे बहानों का इस्तेमाल करके लोगों से बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।ऐसी स्थिति में किसी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, पासवर्ड, एटीएम कार्ड या बैंक खाते की गोपनीय जानकारी नहीं देनी चाहिए।
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