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त्वचा रोगों पर सरकार का फैसला: इलाज के लिए नया प्रोटोकॉल जारी

Tara Tandi
13 Oct 2026 6:56 PM IST
त्वचा रोगों पर सरकार का फैसला: इलाज के लिए नया प्रोटोकॉल जारी
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नई दिल्ली; आयुष मंत्रालय ने मंगलवार को आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी प्रणालियों में त्वचा संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए 'स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस' (STGs) जारी कीं। इसमें योग को भी शामिल किया गया है। इस कदम का मकसद आयुष हेल्थकेयर में एकरूपता, क्वालिटी एश्योरेंस और सबूतों पर आधारित क्लिनिकल प्रैक्टिस को बढ़ावा देना है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत 'डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ हेल्थ सर्विसेज़' (DGHS) के आयुष वर्टिकल द्वारा तैयार की गई ये गाइडलाइंस त्वचा से जुड़ी समस्याओं के लिए क्लिनिकल देखभाल को बेहतर बनाने और देश के व्यापक हेल्थकेयर ढांचे में आयुष प्रणालियों को शामिल करने में मदद करने के लिए बनाई गई हैं।
आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि ये गाइडलाइंस आम त्वचा रोगों के सुरक्षित, असरदार और समग्र इलाज के लिए सिस्टम-खास क्लिनिकल तरीकों को आधुनिक वैज्ञानिक सबूतों के साथ जोड़ती हैं।
उन्होंने कहा कि यह पहल स्टैंडर्ड और सबूतों पर आधारित इलाज के तरीकों को बढ़ावा देकर मरीज़ों की देखभाल को बेहतर बनाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य में आयुष प्रणालियों के योगदान को बढ़ाने में मदद करेगी। आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि ये गाइडलाइंस आयुष प्रणालियों में स्टैंडर्डाइज़ेशन, क्वालिटी और सबूतों पर आधारित प्रैक्टिस को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम हैं।
उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों से सलाह और आधुनिक वैज्ञानिक सबूतों के आकलन से तैयार किया गया यह दस्तावेज़ हर पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के मूल सिद्धांतों को बनाए रखते हुए मरीज़ों की रोकथाम, जांच, इलाज और फ़ॉलो-अप के लिए व्यावहारिक सुझाव देता है।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ हेल्थ सर्विसेज़ के डॉ. लोवनीश जी. कृष्णा ने कहा कि ये गाइडलाइंस आयुष प्रणालियों में हेल्थकेयर सर्विस देने में क्वालिटी एश्योरेंस और ज़्यादा एकरूपता को बढ़ावा देंगी। उन्होंने ज़ोर दिया कि मल्टी-डिसिप्लिनरी सहयोग से प्रैक्टिशनर्स को सुरक्षित, असरदार और मरीज़-केंद्रित देखभाल देने में मदद मिलेगी।
ये गाइडलाइंस 11वें आयुर्वेद दिवस के मौके पर जारी की गईं और इनमें सोरायसिस, डर्मेटाइटिस, विटिलिगो, अर्टिकेरिया और डर्मेटोफाइटोसिस जैसी आम त्वचा की बीमारियां शामिल हैं। हर आयुष सिस्टम के लिए, यह दस्तावेज़ रोकथाम, जांच, इलाज, फ़ॉलो-अप देखभाल और रिहैबिलिटेशन के लिए सिस्टम-खास तरीकों की रूपरेखा बताता है। मंत्रालय के अनुसार, इन गाइडलाइंस को तैयार करने में कई क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर व्यापक प्रयास किया गया। इसमें आयुष रिसर्च काउंसिल के विशेषज्ञ, आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी के वरिष्ठ शिक्षाविद, योग विशेषज्ञ और आधुनिक चिकित्सा के विशेषज्ञ शामिल थे। इस प्रक्रिया में पारंपरिक ग्रंथों की समीक्षा, वैज्ञानिक प्रमाणों का मूल्यांकन, विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा और आम सहमति पर आधारित चर्चाएँ शामिल थीं।
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