मध्य प्रदेश

राहुल गांधी के बालाघाट दौरे पर राजेंद्र शुक्ला का हमला

Ratna Netam
1 Oct 2026 7:26 PM IST
राहुल गांधी के बालाघाट दौरे पर राजेंद्र शुक्ला का हमला
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भोपाल। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बालाघाट दौरे की आलोचना की। उन्होंने राहुल गांधी के दौरे को “नाटकीय” और “बहुत गैर-गंभीर” करार देते हुए कांग्रेस के पुराने शासनकाल में नक्सलवाद से निपटने के तरीके पर भी सवाल उठाए। शुक्ला का बयान उस समय आया जब राहुल गांधी बालाघाट के आदिवासी बहुल इलाके में प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा रोजगार की स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर आरोप लगाए।
राहुल गांधी गुरुवार को बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड स्थित जगला गांव पहुंचे। यहां उन्होंने हाल के महीनों में बच्चों को खोने वाले आदिवासी परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आदिवासी समुदाय के लोगों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने इसे सरकार की विफलता बताते हुए इन क्षेत्रों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
राहुल गांधी के दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि उन्हें यह दौरा गंभीर जनसरोकार से ज्यादा राजनीतिक और नाटकीय लगा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जिस बालाघाट में पहुंचे हैं, वह लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है और इस समस्या का इतिहास काफी पुराना है। शुक्ला ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि केंद्र में सत्ता में रहने के दौरान पार्टी ने नक्सलवाद के खिलाफ पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाई। यह शुक्ला का राजनीतिक आरोप है।
शुक्ला ने एक पुराने नक्सली हमले का भी जिक्र किया। उनके बयान में तत्कालीन मध्य प्रदेश के एक मंत्री की घर में घुसकर हत्या किए जाने की घटना का उल्लेख किया गया। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार दिसंबर 1999 में बालाघाट के तत्कालीन परिवहन मंत्री लिखीराम कावरे की नक्सलियों ने उनके गांव सोनेपुरी में हत्या कर दी थी। मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही में भी उनकी हत्या का उल्लेख दर्ज है। इसलिए इस घटना को तत्कालीन “गृह मंत्री” की हत्या बताना उपलब्ध रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता।
शुक्ला ने इस घटना को आधार बनाते हुए कहा कि बालाघाट ने लंबे समय तक नक्सली हिंसा का सामना किया है। सरकारी रिकॉर्ड में भी बालाघाट को वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिले के रूप में चिन्हित किए जाने के उदाहरण मौजूद हैं। सुरक्षा एजेंसियां यहां लंबे समय से नक्सल विरोधी अभियान चलाती रही हैं।
दूसरी ओर राहुल गांधी ने अपने दौरे में वर्तमान स्वास्थ्य व्यवस्था और आदिवासी समुदाय की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीमारी और कुपोषण के कारण बच्चों की मौत हुई और प्रभावित परिवारों को पर्याप्त सरकारी सहायता नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में अस्पताल, स्कूल और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं मजबूत होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य सुविधाओं, इलाज तक पहुंच और रोजगार से जुड़े मुद्दे उनके सामने रखे। राहुल गांधी ने कहा कि आदिवासी समुदाय से जुड़े इन मुद्दों को वह संसद में भी उठाएंगे।
बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला पिछले कुछ समय से राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बना हुआ है। अलग-अलग मामलों में बीमारी, संक्रमण, कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी अन्य परिस्थितियों की बात सामने आई है। यही वजह है कि बच्चों की सभी मौतों को किसी एक कारण से जोड़ने के बजाय विस्तृत चिकित्सा जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजेंद्र शुक्ला ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस के शासनकाल और नक्सलवाद के पुराने इतिहास को सामने रखा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को वर्तमान सरकार पर सवाल उठाने से पहले अपने कार्यकाल के दौरान नक्सलवाद को लेकर किए गए प्रयासों पर भी विचार करना चाहिए।
इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के राजनीतिक दावे अलग-अलग हैं। राहुल गांधी वर्तमान राज्य सरकार को आदिवासी स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि राजेंद्र शुक्ला कांग्रेस के पुराने शासनकाल में नक्सलवाद से जुड़े हालात का हवाला देकर पलटवार कर रहे हैं।
बालाघाट की भौगोलिक स्थिति भी सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण रही है। यह जिला महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमाओं से जुड़ा है और इसके बड़े हिस्से में घने जंगल हैं। इसी कारण यहां लंबे समय से नक्सली गतिविधियों को लेकर सुरक्षा बल सतर्क रहे हैं। बालाघाट पुलिस और हॉक फोर्स ने पिछले वर्षों में कई नक्सल विरोधी अभियान भी चलाए हैं।
फिलहाल राहुल गांधी के बालाघाट दौरे के बाद मध्य प्रदेश में आदिवासी स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ नक्सलवाद का पुराना मुद्दा भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। कांग्रेस जहां प्रभावित आदिवासी परिवारों की समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठा रही है, वहीं बीजेपी नेताओं की ओर से कांग्रेस के शासनकाल और नक्सलवाद से निपटने के उसके रिकॉर्ड पर सवाल किए जा रहे हैं।
राहुल गांधी और राजेंद्र शुक्ला के इन बयानों के बीच बालाघाट में स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा से जुड़े जमीनी मुद्दे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। आने वाले दिनों में बच्चों की मौतों से जुड़ी जांच और सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर भी नजर रहेगी।
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