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इंदौर। मध्य प्रदेश में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN) ने संयुक्त ऑपरेशन में तीन कथित ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने आरोपियों के कब्जे से 7.116 किलोग्राम एम्फेटामाइन जब्त करने की जानकारी दी है। बरामद नशीले पदार्थ की अनुमानित कीमत करीब 5.69 करोड़ रुपये बताई गई है।
आधिकारिक बयान के मुताबिक यह कार्रवाई एक विशेष खुफिया सूचना के आधार पर की गई। एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि कर्नाटक नंबर वाली एक काली SUV में तीन लोग बड़ी मात्रा में साइकोट्रोपिक पदार्थ एम्फेटामाइन लेकर जा रहे हैं। सूचना मिलने के बाद DRI और CBN ने संयुक्त टीम बनाई और संदिग्ध वाहन को पकड़ने के लिए रणनीति तैयार की।
जानकारी के आधार पर अधिकारियों की टीम ने 30 सितंबर की सुबह देवास जिले के बांगर क्षेत्र में उज्जैन-देवास टोल प्लाजा के पास निगरानी शुरू की। अधिकारियों को संदिग्ध काली SUV के इसी रास्ते से गुजरने की सूचना थी। टीम ने वाहन की पहचान के लिए टोल प्लाजा और आसपास के इलाके में पहले से मोर्चा संभाल लिया था।
कुछ समय बाद कर्नाटक नंबर वाली संदिग्ध SUV टोल प्लाजा की ओर आती दिखाई दी। अधिकारियों ने वाहन को रुकने का संकेत दिया, लेकिन चालक ने गाड़ी रोकने के बजाय कथित रूप से बैरिकेड तोड़ दिया और तेज रफ्तार से मौके से भागने की कोशिश की। अचानक हुई इस घटना के बाद अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वाहन का पीछा शुरू किया।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार बाद में संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए वाहन में सवार तीन लोगों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध पदार्थ बरामद किया गया। जांच में पदार्थ के एम्फेटामाइन होने की पुष्टि होने के बाद इसे जब्त कर लिया गया। बरामद पदार्थ का कुल वजन 7.116 किलोग्राम बताया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक जब्त एम्फेटामाइन की अवैध बाजार में अनुमानित कीमत करीब 5.69 करोड़ रुपये है। इसके बाद वाहन में सवार तीनों लोगों को मादक पदार्थों से जुड़े कानून के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया। एजेंसियां अब इस मामले में आगे की जांच कर रही हैं।
जांच अधिकारियों का ध्यान अब इस बात पर है कि जब्त एम्फेटामाइन कहां से लाया गया था और इसकी अंतिम डिलीवरी किसे की जानी थी। इसके साथ ही गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े दूसरे लोगों और संभावित सप्लाई नेटवर्क की भी जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्क और यात्रा से संबंधित जानकारियों की पड़ताल की जा सकती है।
एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या तीनों आरोपी किसी बड़े अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का हिस्सा हैं। वाहन पर कर्नाटक का रजिस्ट्रेशन नंबर होने के कारण तस्करी नेटवर्क के दूसरे राज्यों तक फैले होने की संभावना भी जांच के दायरे में है। हालांकि किसी बड़े नेटवर्क से आरोपियों के संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।
एम्फेटामाइन एक शक्तिशाली साइकोट्रोपिक पदार्थ है और इसका अवैध कारोबार नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस यानी NDPS कानून के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसी कारण बड़ी मात्रा में ऐसे पदार्थ की बरामदगी के मामलों में जांच एजेंसियां केवल गिरफ्तार व्यक्ति तक सीमित न रहकर पूरी सप्लाई चेन और वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश करती हैं।
इस संयुक्त कार्रवाई में DRI और CBN ने मिली खुफिया सूचना के आधार पर सड़क मार्ग की निगरानी की। अधिकारियों द्वारा वाहन रोकने का प्रयास किए जाने के बावजूद संदिग्धों के भागने की कोशिश ने ऑपरेशन को चुनौतीपूर्ण बना दिया। इसके बावजूद संयुक्त टीम ने आरोपियों को पकड़कर बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ की खेप जब्त करने में सफलता हासिल की।
मध्य प्रदेश में पिछले कुछ समय से केंद्रीय और राज्य एजेंसियां सिंथेटिक ड्रग्स तथा अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगातार कार्रवाई कर रही हैं। इंदौर और आसपास के हाईवे तथा दूसरे परिवहन मार्गों पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। तस्कर सड़क मार्ग के जरिए एक राज्य से दूसरे राज्य में नशीले पदार्थ पहुंचाने के लिए निजी वाहनों और अन्य साधनों का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए खुफिया सूचनाओं के आधार पर वाहनों की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।
ताजा कार्रवाई में भी एक निजी SUV का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। टोल प्लाजा जैसी जगह पर वाहन को रोकने की योजना इसी वजह से बनाई गई थी, क्योंकि यहां गाड़ियों की गति कम होती है और उनकी पहचान अपेक्षाकृत आसानी से की जा सकती है। हालांकि संदिग्ध चालक ने बैरिकेड तोड़कर भागने की कोशिश की।
DRI और CBN अब गिरफ्तार तीनों आरोपियों की भूमिका की अलग-अलग जांच कर रहे हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि वाहन किसका था, नशीला पदार्थ किसने उपलब्ध कराया था और आरोपियों को इसे कहां पहुंचाने के निर्देश मिले थे।
इसके साथ ही जब्त पदार्थ की आपूर्ति से जुड़े वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा सकती है। बड़े ड्रग मामलों में जांच एजेंसियां आम तौर पर यह पता लगाने की कोशिश करती हैं कि खरीद और बिक्री के लिए रकम किस माध्यम से दी गई और नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
फिलहाल 7.116 किलोग्राम एम्फेटामाइन की जब्ती और तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच जारी है। करीब 5.69 करोड़ रुपये कीमत की इस खेप को पकड़ने को नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। आगे की जांच में इसके स्रोत, गंतव्य और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।
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