मध्य प्रदेश

बालाघाट में बच्चों की मौत पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल

Ratna Netam
1 Oct 2026 5:40 PM IST
बालाघाट में बच्चों की मौत पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल
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बालाघाट। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले का दौरा किया और आदिवासी समुदाय से जुड़े स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के मुद्दों को उठाया। प्रभावित परिवारों से मुलाकात के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी बहुल इलाकों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा और रोजगार के पर्याप्त अवसरों की कमी है। उन्होंने राज्य सरकार पर अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं करने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी बालाघाट के आदिवासी बहुल क्षेत्र में उन परिवारों से मिलने पहुंचे, जिन्होंने पिछले कुछ महीनों के दौरान अपने बच्चों को खोया है। उन्होंने स्थानीय लोगों और मृत बच्चों के परिजनों से बातचीत की और स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर रोजगार तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी उनकी समस्याएं सुनीं। उनके दौरे से पहले भी कांग्रेस बालाघाट में हुई बच्चों की मौतों को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगती रही है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीमारी और कुपोषण के बीच कई बच्चों की जान गई और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पर्याप्त पहुंच नहीं है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के लिए बेहतर अस्पताल, डॉक्टर, दवाएं और समय पर इलाज की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल और अन्य सुविधाएं मजबूत करने की जरूरत बताई।
कांग्रेस नेता ने रोजगार का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ रोजगार को भी प्राथमिकता देने की मांग की।
राहुल गांधी ने कहा कि आदिवासी समुदाय को केवल योजनाओं की घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि सरकारी सुविधाओं का लाभ जमीन पर भी पहुंचना चाहिए। उन्होंने प्रभावित परिवारों की समस्याओं को सुनते हुए कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों और रोजगार के अवसरों तक लोगों की वास्तविक पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
बालाघाट में बच्चों की मौत का मुद्दा पिछले कुछ महीनों से चर्चा में है। प्रभावित इलाके मुख्य रूप से बैगा जनजाति की आबादी वाले दूरस्थ क्षेत्र हैं। बच्चों की मौत के कारणों को लेकर अलग-अलग आंकड़े और दावे सामने आए हैं। सितंबर के मध्य तक विभिन्न रिपोर्टों में 30 से अधिक मौतों का उल्लेख किया गया था, जबकि शुरुआती चरण में सरकारी और स्थानीय स्तर पर मृत्यु संख्या को लेकर अंतर था।
स्वास्थ्य जांच में किसी एक बीमारी को सभी मौतों का कारण नहीं माना गया है। केंद्र और राज्य से जुड़ी स्वास्थ्य जांच में मलेरिया, खसरा, दोनों संक्रमण एक साथ होने, एनीमिया, कुपोषण, निमोनिया, डिहाइड्रेशन और अन्य गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों को अलग-अलग मामलों से जोड़ा गया है। इसलिए सभी बच्चों की मौत को केवल कुपोषण या किसी एक बीमारी से जोड़ना अभी उपलब्ध चिकित्सा निष्कर्षों के अनुरूप नहीं होगा।
सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य अभियान भी चलाया है। बालाघाट के दूरस्थ इलाकों में दर्जनों मेडिकल टीमें भेजी गई हैं और हजारों लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई है। मलेरिया और दूसरी बीमारियों की स्क्रीनिंग के साथ टीकाकरण तथा गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की कार्रवाई की गई है। सरकार की ओर से नए डॉक्टरों की तैनाती और स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था मजबूत करने की बात भी कही गई है।
इससे पहले प्रभावित गांवों में जांच के दौरान कई बच्चों में कुपोषण के मामले भी सामने आए थे। सरकारी आंकड़ों के आधार पर किए गए आकलन में गंभीर और मध्यम स्तर के कुपोषण की स्थिति दर्ज की गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी बताया कि कुपोषण, एनीमिया और स्वास्थ्य सेवाओं तक देर से पहुंच जैसी स्थितियां संक्रमण को अधिक गंभीर बना सकती हैं।
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था की समीक्षा की गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी गांवों का दौरा कर आंगनवाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य सुविधाओं और पोषण व्यवस्था का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने कुपोषित बच्चों की नियमित निगरानी और जरूरत पड़ने पर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती कराने के निर्देश दिए थे।
राहुल गांधी ने हालांकि इन कदमों को पर्याप्त नहीं बताते हुए राज्य सरकार की आलोचना की। उनका कहना था कि अगर स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की व्यवस्था पहले से मजबूत होती तो आदिवासी समुदाय को इतनी गंभीर समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता। यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक आरोप है, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा टीमें, जांच, टीकाकरण और उपचार के उपाय किए जा रहे हैं।
राहुल गांधी ने आदिवासी बच्चों के लिए बेहतर अस्पताल और शिक्षण संस्थान उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को भी वही सुविधाएं मिलनी चाहिए जो दूसरे क्षेत्रों में उपलब्ध हैं।
बालाघाट दौरे के साथ आदिवासी स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा एक बार फिर मध्य प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस जहां बच्चों की मौत और स्थानीय परिस्थितियों को लेकर सरकार पर सवाल उठा रही है, वहीं प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में चलाए जा रहे स्वास्थ्य अभियानों और जांच का हवाला दे रहा है। बच्चों की मौतों के अलग-अलग कारणों की जांच जारी रहने के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण, साफ पानी और समय पर इलाज की उपलब्धता इस पूरे मामले के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
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