मध्य प्रदेश

बालाघाट में आदिवासी परिवारों से मिले राहुल गांधी

Kavita2
1 Oct 2026 5:44 PM IST
बालाघाट में आदिवासी परिवारों से मिले राहुल गांधी
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बालाघाट। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार, 1 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने उन आदिवासी परिवारों से मुलाकात की, जिनके बच्चों की हाल के महीनों में बीमारी, कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच मौत हुई है। राहुल गांधी ने इन मौतों और क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार तथा बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। दूसरी ओर राज्य के मंत्री विश्वास सारंग ने राहुल गांधी के दौरे को लेकर आलोचना की और उन पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया।


बालाघाट के आदिवासी इलाकों में पिछले कुछ समय से बच्चों की बीमारी और मौत के मामले चिंता का विषय बने हुए हैं। अगस्त में बैहर क्षेत्र के कुछ गांवों में बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने और छह बच्चों की मौत की पुष्टि हुई थी। स्वास्थ्य अधिकारियों ने उस समय बीमारी का सटीक कारण पता लगाने के लिए नमूने जांच के लिए भेजे थे।

राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों से बातचीत करते हुए उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि कई बच्चों की मौत बीमारी और कुपोषण के कारण हुई है और परिवारों को पर्याप्त सरकारी मदद नहीं मिल पा रही है। उनका आरोप था कि स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतों में भी आदिवासी परिवारों को अपेक्षित सहायता नहीं मिल रही है।

राहुल गांधी ने कहा कि यह स्थिति इसलिए गंभीर है क्योंकि प्रभावित परिवार दूरदराज और आदिवासी बहुल इलाकों में रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे परिवार खुद को सरकारी व्यवस्था से कटा हुआ महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय से जुड़े जमीन के अधिकार, मनरेगा, वन अधिकार अधिनियम और रोजगार जैसे मुद्दे भी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं। राहुल गांधी ने इन मुद्दों को आदिवासी समाज की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जब किसी परिवार के पास नियमित आय, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं तक आसान पहुंच नहीं होती तो बीमारी और कुपोषण जैसी समस्याएं और गंभीर हो जाती हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में केवल योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका लाभ जमीन पर परिवारों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्रों, डॉक्टरों, दवाइयों और इलाज की उपलब्धता बेहतर करने की मांग की।

बालाघाट जिले के दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। हाल में बच्चों में बीमारी फैलने के दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी कुछ बस्तियों तक पहुंचने में भौगोलिक कठिनाइयों का जिक्र किया था। कई प्रभावित घर जंगल और पहाड़ी इलाकों के पास स्थित हैं।

राहुल गांधी ने परिवारों से मुलाकात के दौरान पानी की उपलब्धता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित पेयजल और पोषण बच्चों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़े हुए हैं और इन क्षेत्रों में इन दोनों सुविधाओं को मजबूत किया जाना चाहिए।

उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी का कहना था कि आदिवासी बच्चों को बेहतर स्कूल, शिक्षक और आगे की पढ़ाई के अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे रोजगार और आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य की ओर बढ़ सकें।

कांग्रेस नेता ने मनरेगा से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण परिवारों को नियमित रोजगार मिलना जरूरी है। उनका कहना था कि यदि गांवों में रोजगार के पर्याप्त अवसर होंगे तो परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे स्वास्थ्य तथा शिक्षा पर बेहतर खर्च कर सकेंगे।

वन अधिकार और भूमि अधिकार का मुद्दा भी उनकी बातचीत का हिस्सा रहा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के लिए जमीन केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि उनकी सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी है।

राहुल गांधी ने राज्य और केंद्र सरकार दोनों पर आरोप लगाया कि आदिवासी परिवारों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ये कांग्रेस नेता के राजनीतिक आरोप हैं।

दूसरी ओर मध्य प्रदेश सरकार की ओर से राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार किया गया। राज्य सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने उनके बालाघाट दौरे की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बच्चों की मौत जैसे संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

सारंग का कहना था कि राज्य सरकार प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और राहत से जुड़ी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कांग्रेस पर मामले को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।

इस तरह बालाघाट में बच्चों की मौत का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। कांग्रेस जहां इसे स्वास्थ्य व्यवस्था, कुपोषण और आदिवासी अधिकारों से जोड़ रही है, वहीं भाजपा सरकार कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक हमला बता रही है।

अगस्त में बालाघाट के बैहर क्षेत्र के अदोरी, कुंडेकसा, बोंदारी और कोरका सहित कुछ गांवों में बच्चों के बीमार होने के मामले सामने आए थे। रिपोर्टों के अनुसार करीब 100 बच्चे बीमार हुए थे और स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति की जांच शुरू की थी।

स्वास्थ्य टीमों ने बच्चों के रक्त नमूने जांच के लिए बाहर भेजे थे, क्योंकि शुरुआती चरण में बीमारी के कारण को लेकर स्पष्टता नहीं थी। बुखार, शरीर पर चकत्ते, पेट दर्द और अन्य लक्षण बताए गए थे।

राहुल गांधी की यात्रा के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय नेता भी मौजूद रहे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली।

परिवारों ने स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी अपनी परेशानी सामने रखी। राहुल गांधी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह उनकी समस्याओं को राजनीतिक और सार्वजनिक मंचों पर उठाएंगे।

आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पोषण लंबे समय से नीति निर्माताओं के सामने चुनौती रहे हैं। विशेष रूप से दूरदराज इलाकों में डॉक्टरों की उपलब्धता, समय पर इलाज और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

बालाघाट में राहुल गांधी के दौरे के बाद अब राज्य सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।

कांग्रेस इस घटनाक्रम को आदिवासी अधिकार, स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी जवाबदेही से जोड़ रही है। वहीं भाजपा की ओर से कहा जा रहा है कि सरकार प्रभावित इलाकों में आवश्यक कदम उठा रही है और विपक्ष संवेदनशील घटनाओं को राजनीति से जोड़ रहा है।

राहुल गांधी ने अपने दौरे में कहा कि आदिवासी समुदाय के लोगों को केवल चुनाव के समय याद नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और जमीन के अधिकारों पर निरंतर काम होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत केवल व्यक्तिगत परिवारों की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल भी खड़े करती है।

अब इस पूरे मामले में स्वास्थ्य जांच की रिपोर्ट, प्रभावित परिवारों को मिलने वाली सहायता और सरकार की आगे की कार्रवाई पर भी नजर रहेगी।

बालाघाट का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और बच्चों की मौत को लेकर पहले से सवाल उठ रहे हैं। राहुल गांधी ने इन्हीं मुद्दों को केंद्र में रखते हुए राज्य और केंद्र सरकार से जवाब मांगा, जबकि विश्वास सारंग ने उनके आरोपों को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया।

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