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UPI पर नए चार्ज का विरोध, 23 सितंबर को इंदौर के व्यापारी मनाएंगे ‘No UPI Day’

इंदौर। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के कुछ मर्चेंट भुगतान पर 15 अक्टूबर से लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के विरोध में इंदौर के व्यापारियों ने बड़ा फैसला लिया है। शहर के व्यापारी संगठनों ने 23 सितंबर को ‘No UPI Day’ मनाने की घोषणा की है। इस दिन आंदोलन में शामिल व्यापारी UPI के जरिए भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे और अपने QR कोड तथा स्कैनर को काले कपड़े से ढककर विरोध दर्ज कराएंगे।
शुक्रवार को अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के बैनर तले हुई विशेष बैठक में यह निर्णय लिया गया। रिपोर्टों के अनुसार शहर के 125 से अधिक व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधि इस अभियान से जुड़े हैं। इनमें सराफा, रिटेल गारमेंट, सियागंज, पेट्रोल-डीजल, प्लाईवुड, दाल-चावल सहित अलग-अलग कारोबार से जुड़े संगठन शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में इस विरोध में करीब दो लाख व्यापारियों की भागीदारी का अनुमान भी लगाया गया है।
अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने कहा कि बैठक का उद्देश्य UPI पर लागू होने वाले MDR को लेकर व्यापारियों की चिंताओं पर चर्चा करना था। उन्होंने कहा कि व्यापारियों ने एकमत होकर नए शुल्क का विरोध किया है। उनका तर्क है कि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त कारोबारी लागत बढ़ने से ‘डिजिटल इंडिया’ को बढ़ावा देने के प्रयासों पर असर पड़ सकता है।
बैठक के दौरान कैलाश मुगद, अक्षय जैन, प्रतिपाल टोंग्या, अनिल रांका, गोपालदास अग्रवाल, नरेंद्र बाफना, अंकुर जैन और राजेश बहेती सहित विभिन्न व्यापारिक प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में दुकानदारों ने UPI और QR कोड आधारित भुगतान व्यवस्था को बड़े पैमाने पर अपनाया है। ऐसे में भुगतान स्वीकार करने पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनके कारोबार की लागत बढ़ेगी।
बैठक में यह भी तय किया गया कि यदि उनकी मांग पर विचार नहीं हुआ तो 15 अक्टूबर से आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। व्यापारी संगठनों के अनुसार ऐसी स्थिति में आंदोलन से जुड़े दुकानदार 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान स्वीकार करना बंद कर सकते हैं। यानी ग्राहक को बड़ी खरीदारी के लिए दूसरे भुगतान माध्यम का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
केंद्र सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा घोषित नए ढांचे के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 से निर्दिष्ट पर्सन-टू-मर्चेंट यानी P2M UPI भुगतान पर MDR लागू होगा। सामान्य मर्चेंट श्रेणी में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर MDR की दर 0.4 प्रतिशत निर्धारित की गई है। 75,000 रुपये या इससे अधिक के भुगतान पर MDR अधिकतम 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर UPI भुगतान पर शुल्क लगने जा रहा है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त बने रहेंगे, चाहे रकम कितनी भी हो। इसके अलावा 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान और निर्धारित जीरो-MDR व्यवस्था के दायरे में आने वाले छोटे व्यापारियों के लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे। सरकार के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत P2M UPI ट्रांजैक्शन नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।
छोटे व्यापारियों को भी कुछ राहत दी गई है। NPCI के नए ढांचे के मुताबिक UPI QR के जरिए सीधे खाते में हर महीने एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे विक्रेता जीरो-MDR व्यवस्था के दायरे में रहेंगे। इसलिए यह कहना कि 15 अक्टूबर से सभी व्यापारियों और सभी 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर एक समान शुल्क लगेगा, पूरी तरह सटीक नहीं होगा।
नए नियम में कुछ क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसी चुनिंदा श्रेणियों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत के बजाय पांच रुपये का फ्लैट MDR तय किया गया है। सरकार का कहना है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था में शामिल बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच वितरित होने वाला शुल्क है, जिसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम के संचालन और विस्तार की लागत को सहारा देना है।
व्यापारियों की मुख्य चिंता इस शुल्क के उनके मार्जिन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर है। उदाहरण के तौर पर सामान्य मर्चेंट श्रेणी में 10 हजार रुपये का पात्र UPI भुगतान प्राप्त करने पर 0.4 प्रतिशत की दर से 40 रुपये MDR बनता है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि कम मार्जिन वाले कारोबार में बड़ी संख्या में ऐसे ट्रांजैक्शन होने पर कुल लागत महत्वपूर्ण हो सकती है। दूसरी तरफ सरकार का तर्क है कि अधिकांश छोटे UPI भुगतान और छोटे व्यापारी इस व्यवस्था से बाहर रखे गए हैं।
इंदौर के व्यापारियों ने अपनी मांग केंद्र तक पहुंचाने की रणनीति भी बनाई है। अहिल्या चैंबर इस मुद्दे को नेशनल ट्रेड वेलफेयर बोर्ड के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्रालय के सामने उठाने की तैयारी में है। मध्य प्रदेश के अन्य शहरों में भी इस मुद्दे पर व्यापारी संगठनों की गतिविधियां शुरू हुई हैं। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री भी इस विषय पर बैठक और केंद्र तथा राज्य सरकार को ज्ञापन देने की तैयारी कर रहा है।
23 सितंबर के ‘No UPI Day’ में शामिल दुकानों पर पूरे दिन UPI भुगतान बंद रखने की योजना है। व्यापारियों ने QR कोड और UPI साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढकने का भी निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य ग्राहकों को आंदोलन और उसकी वजह के बारे में जानकारी देना बताया गया है।
UPI भारत में खुदरा डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। इसी कारण MDR व्यवस्था में बदलाव का मुद्दा व्यापारी संगठनों और भुगतान उद्योग दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। केंद्र का कहना है कि नई व्यवस्था UPI प्रणाली को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए लाई गई है, जबकि विरोध कर रहे व्यापारियों का कहना है कि भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ने से नकद लेनदेन को दोबारा बढ़ावा मिल सकता है।
फिलहाल इंदौर के व्यापारियों ने 23 सितंबर को एक दिन के सांकेतिक विरोध की घोषणा की है। यदि MDR वापस लेने की उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने की चेतावनी दी गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार, भुगतान संस्थाओं और व्यापारी संगठनों के बीच इस मुद्दे पर होने वाली बातचीत पर नजर रहेगी।





