मध्य प्रदेश

रिटायरमेंट पर जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह का बड़ा संकल्प, GPF के 1.01 करोड़ PM CARES को देंगे

Kavita2
19 Sept 2026 9:32 AM IST
रिटायरमेंट पर जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह का बड़ा संकल्प, GPF के 1.01 करोड़ PM CARES को देंगे
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जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त हुए जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने अपने विदाई समारोह में दो महत्वपूर्ण संकल्पों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) से मिलने वाली करीब 1.01 करोड़ रुपये की पूरी राशि प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपात स्थिति राहत कोष यानी PM CARES Fund में दान करेंगे। इसके साथ ही जस्टिस सिंह और उनकी पत्नी इंदिरा सिंह ने मृत्यु के बाद अपनी देह मेडिकल शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए दान करने का संकल्प लिया है।

जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह 17 सितंबर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त हुए। इस मौके पर आयोजित फुल कोर्ट फेयरवेल में उन्होंने अपने न्यायिक जीवन के अनुभव साझा किए और भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आधिकारिक गणना के अनुसार उन्हें GPF खाते से करीब 1.01 करोड़ रुपये मिलने हैं और वह पूरी राशि PM CARES Fund को देने का संकल्प लेते हैं।

अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में इस रकम को करीब एक करोड़ से 1.1 करोड़ रुपये तक बताया गया है। हालांकि जस्टिस सिंह के विदाई भाषण का हवाला देने वाली रिपोर्ट में आधिकारिक गणना के आधार पर राशि लगभग 1.01 करोड़ रुपये बताई गई है। इसलिए 1.01 करोड़ रुपये का आंकड़ा अधिक सटीक माना जा सकता है।

अपने संबोधन में जस्टिस सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि रिटायरमेंट को वह अपनी सामाजिक भूमिका का अंत नहीं मानते। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद उनके जीवन का नया अध्याय शुरू होगा और वह एक नए मंच से समाज के लिए काम करना जारी रखेंगे। उन्होंने GPF की पूरी राशि दान करने के फैसले को भी इसी सोच से जोड़ा।

जस्टिस सिंह ने पत्नी के साथ देहदान करने के फैसले की जानकारी भी समारोह में साझा की। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्ति से दो दिन पहले दोनों ने मेडिकल कॉलेज के माध्यम से इसके लिए पंजीकरण कराया था। मृत्यु के बाद उनकी देह का इस्तेमाल मेडिकल शिक्षा और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकेगा।

जस्टिस सिंह के मुताबिक देहदान का विचार उनकी पत्नी की ओर से आया था। उनकी पत्नी ने ही GPF की राशि PM CARES Fund में देने का सुझाव भी दिया। बाद में दोनों ने इस पर सहमति जताते हुए अपनी बचत और देह को सामाजिक उपयोग से जोड़ने का फैसला किया।

उन्होंने अपने विदाई संबोधन में समाज के प्रति जिम्मेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि ईश्वर की सेवा केवल पूजा के जरिए ही नहीं, बल्कि उसकी बनाई दुनिया और लोगों की देखभाल के माध्यम से भी की जा सकती है। इसी विचार के तहत उन्होंने पत्नी के साथ देहदान का पंजीकरण कराने और GPF की राशि को सार्वजनिक उद्देश्य के लिए समर्पित करने की बात कही।

जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह का न्यायिक सेवा में लंबा कार्यकाल रहा है। उन्होंने 31 मई 1990 को सिविल जज क्लास-2 के रूप में न्यायिक सेवा की शुरुआत की थी। बाद के वर्षों में उन्होंने न्यायपालिका में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 2018 में उन्हें छतरपुर का प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज नियुक्त किया गया और 2022 में उन्होंने धार में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज के रूप में जिम्मेदारी संभाली।

इसके बाद 1 मई 2023 को उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। करीब 36 वर्षों की न्यायिक सेवा पूरी करने के बाद 17 सितंबर 2026 को वह सेवानिवृत्त हुए। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के एटा जिले में 18 सितंबर 1964 को हुआ था। उन्होंने बीएससी और एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की।

अपने लंबे न्यायिक सफर को याद करते हुए जस्टिस सिंह ने न्यायपालिका में आए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल उन लोगों तक पहुंचना नहीं है जो अदालतों में आते हैं, बल्कि उन नागरिकों तक भी न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है जो किसी कारण से अदालत तक नहीं पहुंच पाते।

विदाई समारोह के दौरान उन्होंने न्यायाधीश के रूप में काम करते समय मिली एक महत्वपूर्ण सीख भी साझा की। उन्होंने एक वरिष्ठ न्यायाधीश की सलाह का जिक्र करते हुए कहा कि न्यायाधीश को आलोचना के दबाव में नहीं आना चाहिए। साथ ही यदि किसी मामले को देखते समय किसी पक्ष के प्रति गुस्सा या विशेष लगाव जैसी भावना मन में हो तो उस स्थिति में उस मामले को नहीं देखना चाहिए।

सेवानिवृत्ति के अगले दिन जस्टिस सिंह और उनकी पत्नी ने स्थानीय पत्रकारों से बातचीत में भी अपने दोनों फैसलों की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि दोनों पेंशनभोगी हैं और अपनी बचत को केवल परिवार के लिए रखने के बजाय उसका कुछ हिस्सा व्यापक सामाजिक उद्देश्य से जोड़ना चाहते हैं।

जस्टिस सिंह की घोषणा के बाद उनका विदाई समारोह चर्चा में आ गया। खासकर GPF की पूरी राशि देने और पति-पत्नी दोनों के देहदान के संकल्प को लेकर विभिन्न मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट प्रकाशित की हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि उन्होंने GPF की राशि मिलने के बाद उसे PM CARES Fund में देने का संकल्प और घोषणा की है। इसलिए इसे राशि पहले ही हस्तांतरित कर दिए जाने के रूप में लिखने के बजाय दान करने की घोषणा के रूप में प्रस्तुत करना अधिक सटीक है।

करीब 36 वर्षों की न्यायिक सेवा के बाद जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने अपने विदाई संबोधन में साफ किया कि सेवानिवृत्ति के बाद भी वह समाज से जुड़े रहना चाहते हैं। GPF के करीब 1.01 करोड़ रुपये PM CARES Fund को देने और पत्नी के साथ देहदान के संकल्प के जरिए उन्होंने अपने रिटायरमेंट के बाद की दिशा भी सार्वजनिक कर दी है।

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