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UCC लागू होने की तैयारी: लिव-इन से तलाक तक महिलाओं को मिलेंगे समान अधिकार, जानिए क्या बदलेंगे नियम

Bhopal, भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) यानी UCC लागू करने की तैयारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सरकार का दावा है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने के बाद विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप और उत्तराधिकार जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू होंगे। खासतौर पर महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की बात कही जा रही है।
मध्य प्रदेश के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने UCC का समर्थन करते हुए कहा कि इससे समाज में समानता और एकरूपता आएगी। उन्होंने कहा कि इस कानून के जरिए महिलाओं के अधिकारों का संरक्षण होगा। उनके अनुसार, विरोध वही लोग करेंगे जो महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ हैं और जाति-धर्म की राजनीति करते हैं।
लिव-इन रिलेशनशिप में आएंगे नए नियम
UCC के तहत लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित बताए जा रहे हैं। इसके अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जा सकता है। रजिस्ट्रेशन की जानकारी संबंधित रजिस्ट्रार के माध्यम से स्थानीय थाने तक भी भेजी जा सकती है।
यदि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के बाद पुरुष अपने साथी को छोड़ देता है, तो महिला को गुजारा भत्ता मांगने का कानूनी अधिकार मिल सकता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना बताया जा रहा है।
वहीं, लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान जन्म लेने वाली संतान को भी कानूनी अधिकार मिलने की बात कही गई है। ऐसी संतान को उत्तराधिकार में अधिकार प्राप्त होगा।
नाबालिग के साथ लिव-इन पर होगी कार्रवाई
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि कोई वयस्क व्यक्ति किसी नाबालिग के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
इसके अलावा ऐसे लिव-इन संबंधों का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा, जिनमें पहले से कोई व्यक्ति शादीशुदा हो, कोई साथी नाबालिग हो या फिर संबंध बनाने की सहमति दबाव, धोखे या अनुचित प्रभाव से हासिल की गई हो।
रजिस्ट्रार को ऐसे मामलों की जांच करने का अधिकार होगा। जांच के बाद ही लिव-इन रिलेशनशिप का प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
लिव-इन खत्म करने के लिए भी देनी होगी जानकारी
UCC लागू होने के बाद लिव-इन रिलेशनशिप खत्म करना भी एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत होगा। यदि कोई एक पार्टनर संबंध समाप्त करता है, तो इसकी जानकारी रजिस्ट्रार को देनी होगी।
रजिस्ट्रार दूसरे पार्टनर को इसकी सूचना उपलब्ध कराएगा और दोनों पक्षों को संबंध समाप्त होने का प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
हालांकि, यदि दोनों पार्टनर बाद में आपस में विवाह कर लेते हैं तो अलग से लिव-इन खत्म करने की जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी और संबंध स्वत: समाप्त माना जाएगा।
शादी और तलाक में भी समान अधिकार का दावा
UCC समर्थकों का कहना है कि यह कानून विवाह और तलाक से जुड़े मामलों में पुरुष और महिलाओं को बराबर अधिकार देगा। तलाक की प्रक्रिया, भरण-पोषण और अन्य कानूनी अधिकारों में समानता लाने का उद्देश्य बताया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि UCC का मुख्य उद्देश्य किसी धर्म विशेष को प्रभावित करना नहीं बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था बनाना है।
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?
यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता का मतलब है कि देश के सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत मामलों जैसे शादी, तलाक, गोद लेने और संपत्ति के अधिकारों से जुड़े नियम समान हों।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश दिया गया है।
फिलहाल UCC को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। समर्थक इसे समानता और महिला अधिकारों से जोड़ रहे हैं, जबकि कुछ संगठन इसके प्रावधानों को लेकर आपत्तियां भी जताते रहे हैं। मध्य प्रदेश में इसके लागू होने के बाद इसके वास्तविक प्रभाव को लेकर सभी की नजरें रहेंगी।





