मध्य प्रदेश

Omkareshwar News: मां नर्मदा के तट पर चातुर्मास शुरू, देवशयनी एकादशी पर 25 हजार महिलाओं ने किया स्नान

Sarita
6 July 2025 2:38 PM IST
Omkareshwar News: मां नर्मदा के तट पर चातुर्मास शुरू, देवशयनी एकादशी पर 25 हजार महिलाओं ने किया स्नान
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Omkareshwar News: भारी बारिश के बाद भी ओंकारेश्वर धाम में आस्था और भक्ति से गूंजने लगे बड़ी संख्या में लोग। रविवार 6 जुलाई को देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर करीब 25 हजार महिलाओं ने मां नर्मदा के पवित्र जल में स्नान कर चातुर्मास की शुरुआत की। यह अवसर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि क्षेत्रीय लोक परंपराओं और सनातन संस्कृति की गहराई को भी उजागर करता है।
महिलाओं ने मां नर्मदा में स्नान कर चातुर्मास की शुरुआत की। खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर समेत निमाड़-मालवा क्षेत्र से आए श्रद्धालुओं ने पूरी रात जागकर सुबह पवित्र स्नान कर जबरेश्वर और राधा-कृष्ण मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद ओंकार पर्वत की परिक्रमा कर भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए।
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान श्री हरि विष्णु योग निद्रा में लीन होकर चार माह के लिए क्षीर सागर में विश्राम करते हैं। इस काल को चातुर्मास कहते हैं, जिसमें व्रत, तप, स्नान और संयम का विशेष महत्व है। हर साल इस अवसर पर महिलाएं विशेष रूप से पुण्य प्राप्ति, परिवार की समृद्धि और अच्छी बारिश की कामना करती हैं।खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, सनावद, बड़वाह और निमाड़-मालवा क्षेत्र से हजारों महिलाएं शनिवार रात से ही ओंकारेश्वर और खेड़ीघाट (मोरटक्का) पहुंचने लगीं। धर्मशालाएं, रेलवे स्टेशन परिसर और नर्मदा तट धार्मिक जागरण और भक्ति गीतों से गूंज उठे। रात्रि जागरण के बाद महिलाएं नर्मदा स्नान के लिए उमड़ पड़ीं।
नर्मदा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने जबरेश्वर मंदिर और राधा-कृष्ण मंदिर में नारियल फोड़े और पूजा-अर्चना की। मंदिर के पुजारियों द्वारा माथे पर तिलक लगाने के बाद महिलाएं ओंकारेश्वर पहुंचीं, जहां उन्होंने ओंकार पर्वत की परिक्रमा की और भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए। संपूर्ण यात्रा का उद्देश्य आत्मिक शुद्धि, पुण्य अर्जन और लोक कल्याण की भावना से प्रेरित था।
चातुर्मास प्रारंभ होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष उल्लास देखने को मिलता है। पारंपरिक परिधानों में महिलाएं सिर पर कलश और हाथों में पूजा की थालियां लेकर सामूहिक भजन-कीर्तन गाती हुई घाटों की ओर बढ़ती हैं। यह दृश्य धर्म, संस्कृति और सामूहिक चेतना का अनूठा उदाहरण बन जाता है। देवशयनी एकादशी पर महिलाओं द्वारा नर्मदा स्नान और ओंकार पर्वत की परिक्रमा के साथ चातुर्मास का प्रारंभ करना आस्था और भक्ति का जीवंत उदाहरण है। यह महज धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की निरन्तरता का प्रतीक है। नर्मदा तट पर व्यक्त की गई यह भक्ति भावी पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।
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