मध्य प्रदेश

IEHE में नेशनल स्पेस डे शुरू, छात्रों ने समझी अंतरिक्ष विज्ञान की नई दिशा

Kavita2
21 Aug 2026 2:06 PM IST
IEHE में नेशनल स्पेस डे शुरू, छात्रों ने समझी अंतरिक्ष विज्ञान की नई दिशा
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भोपाल। राजधानी भोपाल स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सीलेंस इन हायर एजुकेशन (IEHE) में बुधवार को नेशनल स्पेस डे के अवसर पर दो दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में कॉलेज के छात्र-छात्राओं के साथ फैकल्टी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, खगोल विज्ञान और ब्रह्मांड से जुड़े आधुनिक शोध के बारे में जानकारी देना तथा उनमें वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित करना रहा।

दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत और दुनिया में हुई प्रगति, खगोल विज्ञान से जुड़े विषयों और भविष्य में शोध की संभावनाओं पर केंद्रित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। उद्घाटन दिवस पर विद्यार्थियों को विशेषज्ञ व्याख्यान के माध्यम से उन वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने का अवसर मिला, जो सामान्य तौर पर उनके पाठ्यक्रम से आगे की विषयवस्तु मानी जाती हैं।

एस्ट्रोफिजिक्स विशेषज्ञ ने दिया विशेष व्याख्यान

कार्यक्रम के पहले दिन का प्रमुख आकर्षण IISER भोपाल में एस्ट्रोफिजिक्स के असिस्टेंट प्रोफेसर मयूरेश सुरनिस का विशेष व्याख्यान रहा। उन्होंने “गैलेक्सी के आकार का ग्रेविटेशनल वेव डिटेक्टर बनाना” विषय पर विद्यार्थियों से संवाद किया।

व्याख्यान में उन्होंने गुरुत्वाकर्षण तरंगों यानी ग्रेविटेशनल वेव्स की अवधारणा को सरल तरीके से समझाने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि ब्रह्मांड में होने वाली कई महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में वैज्ञानिकों को गुरुत्वाकर्षण तरंगों के अध्ययन से नई जानकारी हासिल हो सकती है।

ग्रेविटेशनल वेव्स अंतरिक्ष और समय में पैदा होने वाली ऐसी हलचल हैं, जो ब्रह्मांड की अत्यंत शक्तिशाली खगोलीय घटनाओं से उत्पन्न होती हैं। इनके अध्ययन से वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की संरचना, विकास और उसमें होने वाली असाधारण घटनाओं को समझने में मदद मिलती है।

ब्रह्मांड को समझने में ग्रेविटेशनल वेव्स की भूमिका

लेक्चर के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि खगोल विज्ञान में केवल प्रकाश या अन्य विद्युतचुंबकीय संकेतों के माध्यम से ब्रह्मांड का अध्ययन करना पर्याप्त नहीं है। ग्रेविटेशनल वेव्स वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड को एक अलग दृष्टिकोण से देखने का अवसर देती हैं।

ऐसे संकेतों का पता लगाने के लिए अत्यंत संवेदनशील वैज्ञानिक उपकरणों और उन्नत तकनीक की आवश्यकता होती है। इन तरंगों का प्रभाव बेहद सूक्ष्म होता है, इसलिए उन्हें पहचानना वैज्ञानिकों के सामने बड़ी चुनौती है।

इसी संदर्भ में प्रोफेसर सुरनिस ने बड़े पैमाने पर ग्रेविटेशनल वेव डिटेक्टर की अवधारणा पर चर्चा की। विद्यार्थियों के लिए यह विषय खासा आकर्षक रहा, क्योंकि इसमें खगोल विज्ञान, भौतिक विज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच संबंध देखने को मिलता है।

विद्यार्थियों को मिली रिसर्च की नई जानकारी

विशेष व्याख्यान के माध्यम से छात्रों को एस्ट्रोफिजिक्स के क्षेत्र में हो रहे नए शोध और तकनीकी विकास के बारे में जानने का अवसर मिला। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह समझने में भी मदद की कि ब्रह्मांड से जुड़े सवालों के जवाब तलाशने के लिए वैज्ञानिक किस तरह नई तकनीकों और शोध पद्धतियों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं को भी संबोधित किया गया। इससे उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उच्च शिक्षा और शोध के संभावित अवसरों के बारे में जानकारी मिली।

वैज्ञानिक सोच विकसित करने पर जोर

नेशनल स्पेस डे के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य छात्रों के बीच वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना भी है। अंतरिक्ष विज्ञान ऐसा क्षेत्र है, जिसमें लगातार नई खोजें हो रही हैं और युवाओं के लिए शोध के अनेक अवसर मौजूद हैं।

कार्यक्रम में शामिल फैकल्टी सदस्यों और विद्यार्थियों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान तथा खगोल विज्ञान से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। आयोजकों का प्रयास रहा कि छात्रों को केवल अंतरिक्ष अभियानों की जानकारी देने के बजाय उन वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से भी परिचित कराया जाए, जिनके जरिए ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने का प्रयास किया जाता है।

दो दिन तक चलेंगी गतिविधियां

IEHE में शुरू हुआ यह कार्यक्रम दो दिनों तक चलेगा। आयोजन के दौरान अंतरिक्ष विज्ञान और खगोल विज्ञान से जुड़े विभिन्न विषयों पर गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने और आधुनिक वैज्ञानिक शोध को समझने का अवसर मिलेगा।

कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी यह दर्शाती है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर रुचि लगातार बढ़ रही है। खासकर ऐसे समय में जब भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है, विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से परिचित कराना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भविष्य के शोध के लिए प्रेरणा

नेशनल स्पेस डे समारोह विद्यार्थियों के लिए केवल एक शैक्षणिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा। विशेष व्याख्यान और अन्य गतिविधियों ने उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भविष्य के शोध की संभावनाओं पर विचार करने का अवसर दिया।

ग्रेविटेशनल वेव्स जैसे अत्याधुनिक विषय पर विशेषज्ञ की प्रस्तुति से छात्रों को यह समझने का मौका मिला कि ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने के लिए विज्ञान किस स्तर तक पहुंच चुका है और आने वाले समय में किन नई तकनीकों की जरूरत पड़ सकती है।

IEHE में आयोजित यह दो दिवसीय कार्यक्रम विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की नई दुनिया से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक सोच की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।

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